मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ पर अपने भाषण से हटाए गए 'बड़े हिस्से' को बहाल करने की मांग की है। उन्होंने आख़िर क्यों चेताया कि न्याय नहीं मिलने पर वह इसे सार्वजनिक कर देंगे? पढ़िए राज्यसभा के सभापति ने क्या कहा।
क्या संसद में भी विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा है? राहुल को लोकसभा में नहीं बोलने देने के हाल के आरोपों के बाद अब राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण को सदन की कार्यवाही से हटाए जाने का बड़ा आरोप लगा है। खड़गे ने ऐसे ही सवाल उठाते हुए राज्यसभा चेयरमैन से मांग की है कि उनके भाषण के हटाए गए हिस्से को बहाल किया जाए। खड़गे ने चेताया है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो उन्हें बिना रिकॉर्ड किए हुए वर्जन को आम लोगों के बीच जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। तो सवाल है कि संसद में बहस नहीं होगी तो फिर क्या होगी? सदन में क्या तथ्यों के आधार पर मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना नहीं की जा सकती है? क्या बिना किसी ठोस आपत्ति के राज्यसभा में दिए गए भाषण को हटाना ठीक है?
कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि 4 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान दिए गए उनके भाषण के बड़े हिस्से को बिना ठीक कारण बताए हटा दिया गया या एक्सपंज कर दिया गया। खड़गे ने कहा कि यह संसद सदस्यों को संविधान के अनुच्छेद 105(1) के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
खड़गे का दावा
खड़गे ने सदन में कहा, 'मैंने 4 फरवरी को जो भाषण दिया, उसमें प्रधानमंत्री की कुछ नीतियों की आलोचना की थी, जो तथ्यों पर आधारित थी। ये हिस्से हटा दिए गए हैं। ये मेरे विपक्ष के नेता होने का कर्तव्य था, क्योंकि ये नीतियाँ देश की जनता पर बुरा असर डाल रही हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके भाषण में कोई अपमानजनक, असंसदीय या नियम-विरोधी बात नहीं थी। वे सदन की गरिमा, नियमों और परंपराओं का पूरा सम्मान करते हैं।
खड़गे ने आगे कहा कि अगर उन्हें इस मामले में न्याय नहीं मिला तो वह हटाए गए हिस्सों की अनरिकॉर्डेड कॉपी जनता के सामने रखने को मजबूर होंगे।राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि वे इस मुद्दे पर विचार करेंगे, लेकिन खड़गे के जनता के सामने रखने वाले बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि हटाए गए हिस्सों को बहाल नहीं किया जा सकता और अध्यक्ष को निर्देश देना सही नहीं है।
खड़गे के भाषण में क्या हटाया गया?
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध राज्यसभा की वेबसाइट पर अपलोड वीडियो और ट्रांसक्रिप्ट से पता चलता है कि भाषण के कुछ हिस्सों को 'नॉट रिकॉर्डेड' मार्क किया गया है। खड़गे ने बताया कि हटाए गए हिस्सों में वर्तमान सरकार के दौरान संसद की कार्यप्रणाली पर उनकी टिप्पणियां और प्रधानमंत्री की नीतियों की आलोचना शामिल थी। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी के ख़िलाफ़ है।सरकार की तरफ़ से क्या कहा गया?
इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खड़गे के आरोपों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पर आरोप लगाना सदन का अपमान है और यह उचित नहीं है। उन्होंने राज्यसभा नियम 261 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि अगर कोई सदस्य या मंत्री अपमानजनक, असभ्य, असंसदीय या गरिमा के खिलाफ शब्द इस्तेमाल करता है तो सभापति अपने विवेक से उन्हें हटा सकता है।
सीतारमण ने कहा, 'खड़गे जी खुद फ़ैसला कर रहे हैं कि उन्होंने कुछ ग़लत नहीं कहा, लेकिन अध्यक्ष के फ़ैसले पर सवाल उठाना सही नहीं है। यह प्रधानमंत्री की रक्षा करने का आरोप लगाना भी सही नहीं है।'
यह मामला क्यों अहम है?
यह घटना संसद में विपक्ष की आवाज़ दबाने के आरोपों को और मज़बूत करती है। खड़गे ने कहा कि वे 50 साल से ज़्यादा समय से संसद में हैं और सदन की गरिमा का पूरा ख्याल रखते हैं। उन्होंने नियम 261 का उल्लंघन नहीं किया।विपक्ष का कहना है कि सरकार आलोचना से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष का मानना है कि अध्यक्ष का फ़ैसला अंतिम है और नियमों के अनुसार लिया गया।
यह विवाद संसद की कार्यवाही में पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाता है। खड़गे ने सभापति से अनुरोध किया कि हटाए गए हिस्सों की समीक्षा की जाए, क्योंकि उनमें कुछ भी ग़लत नहीं था। अब देखना है कि सभापति इस मामले में क्या फ़ैसला लेते हैं और क्या हटाए गए हिस्से बहाल होते हैं या नहीं।