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बुलडोजर पर मायावती का रणनीतिक बयान क्यों आया?

बीएसपी प्रमुख मायावती ने यूपी की बुलडोजर राजनीति की निन्दा की है। प्रयागराज में एक्टिविस्ट आफरीन फातिमा की मां परवीन फातिमा का घर गिराए जाने के संदर्भ में मायावती ने कहा कि बुलडोजर की आड़ में समुदाय विशेष को निशाना बनाया जा रहा है। मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब समाजवादी पार्टी के सारे मुस्लिम विधायकों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है। सपा नेता अखिलेश यादव मुखर होकर बुलडोजर राजनीति का विरोध तक नहीं कर पा रहे हैं। मायावती के इस बयान का संबंध दरअसल आजमगढ़ उपचुनाव से भी है। 

मायावती ने कहा कि यूपी सरकार एक समुदाय विशेष को टारगेट करके बुलडोजर विध्वंस व अन्य द्वेषपूर्ण आक्रामक कार्रवाई कर विरोध को कुचलने एवं भय व आतंक का जो माहौल बना रही है यह अनुचित व अन्यायपूर्ण। घरों को ध्वस्त करके पूरे परिवार को टारगेट करने की दोषपूर्ण कार्रवाई का कोर्ट जरूर संज्ञान ले।

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बीएसपी प्रमुख ने कहा - जबकि समस्या की मूल जड़ नूपुर शर्मा व नवीन जिन्दल हैं जिनके कारण देश का मान-सम्मान प्रभावित हुआ व हिंसा भड़की, उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं करके सरकार द्वारा कानून के राज का उपहास क्यों? दोनों आरोपियों को अभी तक जेल नहीं भेजना घोर पक्षपात व दुर्भाग्यपूर्ण। तत्काल गिरफ्तारी जरूरी।

मायावती ने कहा कि सरकार द्वारा नियम-कानून को ताक पर रखकर आपाधापी में किए जा रहे बुलडोजर विध्वंसक कार्रवाइयों में न केवल बेगुनाह परिवार पिस रहे हैं बल्कि निर्दोषों के घर भी ढह दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में पीएम आवास योजना के मकान को भी ध्वस्त कर देना काफी चर्चा में रहा, ऐसी ज्यादती क्यों?

यह पहला मौका नहीं है जब मायावती ने मुस्लिमों के मामले में इस तरह से अपनी बात रखी है। कानपुर हिंसा के बाद भी उनका बयान आया था। उन्होंने 6 जून को कहा था कि देश में सभी धर्मों का सम्मान जरूरी। किसी भी धर्म के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं। इस मामले में बीजेपी को भी अपने लोगों पर सख्ती से शिकंजा कसना चाहिए। केवल उनको सस्पेंड व निकालने से काम नहीं चलेगा बल्कि उनको सख्त कानूनों के तहत जेल भेजना चाहिए।

कानपुर की घटना पर बीएसपी प्रमुख ने कहा कि  इतना ही नहीं बल्कि कानपुर में अभी हाल ही में जो हिंसा हुई है, उसकी तह तक जाना बहुत जरूरी। साथ ही, इस हिंसा के विरुद्ध हो रही पुलिस कार्रवाइयों में निर्दोष लोगों को परेशान ना किया जाए, बीएसपी की यह भी माँग है।

सपा से निराशा

इस साल हुए यूपी विधानसभा चुनाव में मुसलमानों ने सपा के लिए एकतरफा वोटिंग की थी लेकिन सपा इस समय यूपी में बुलडोजर राजनीति का विरोध तक नहीं कर पा रही है। यूपी में इस समय सपा के तमाम विधायक अगर चाहें तो बड़े आंदोलन की शुरुआत कर सकते हैं लेकिन उन्होंने चुप्पी साध रखी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने खुद को सिर्फ ट्वीट तक सीमित कर लिया है। इस समय सपा के पास ही विपक्ष की भूमिका है लेकिन वो इस भूमिका को निभाने में नाकाम हो रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी सपा किसी सशक्त आंदोलन का नेतृत्व नहीं कर पाई थी।

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आजमगढ़ से बदलेगी राजनीति

आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव के नतीजे का बीएसपी को सबसे ज्यादा इंतजार है। दरअसल, मायावती ने सोमवार को जो बयान दिया है, उसका संबंध भी इस उपचुनाव है। मायावती ने आजमगढ़ से मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है। अगर बीएसपी इस सीट पर मुस्लिमों का वोट खींच लाती है और उसका प्रत्याशी गुड्डू जमाली जीतता है तो बीएसपी दलित-मुस्लिम राजनीति की तरफ लौटेगी। सपा और बीजेपी ने इस सीट से यादव प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ जिले में बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली थी। इस तरह बीएसपी और मायावती को अब राजनीतिक स्थितियां अनुकूल लग रही हैं। मुसलमानों किस तरह वोट करेंगे, आजमगढ़ से उसका पता चल जाएगा। यह सीट अखिलेश यादव के पास थी लेकिन अब सपा को यह सीट फिर से हासिल करने के लिए मुस्लिम वोटों को पाना होगा।

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