ईरान की मध्यस्थता पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि भारत पाकिस्तान की तरह "दलाल देश" नहीं है। विपक्ष ने इस टिप्पणी पर पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी के रूस-यूक्रेन शांति प्रयास भी "दलाल" वाले थे?
ईरान-इसराइल के बीच युद्ध रोकने की कोशिश को ‘दलाली’ कहकर विदेश मंत्री एस जयशंकर चारों ओर से घिर गए हैं । कांग्रेस ने सवाल उठा दिए हैं कि अगर युद्धविराम की पेशकश करना दलाली है तो क्या पीएम मोदी भी रूस-यूक्रेन के बीच दलाली कर चुके हैं। पूरे सोशल मीडिया पर सवालों की लाइन लगी हुई है और जयशंकर की जमकर निंदा हो रही है।
ईरान-इसराइल जंग के मुद्दे पर हुई बुधवार को सर्वदलीय बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई । जब विपक्ष ने ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता के ऑफर पर सवाल किया तो विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि हम पाकिस्तान की तरह 'दलाल देश' नहीं हैं। जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान 1981 से ऐसा करता आ रहा है, इसमें कोई नई बात नहीं है। और ये करके पाकिस्तान ने कोई बड़ा काम नहीं कर दिया है । जयशंकर ने ये भी कहा कि अगर अमेरिका को लगता है कि पाकिस्तान के बात करने पर युद्धविराम हो सकता है तो हम अमेरिका को नियंत्रित नहीं कर सकते ।
जयशंकर के इस बयान की चौतरफा निंदा हो रही है । लोग सवाल उठा रहे हैं कि भारत के विदेश मंत्री मध्यस्थता को दलाली कैसे कह सकते हैं । क्या जयशंकर को दलाली और मध्यस्थता में कोई अंतर ही नहीं लगता । या फिर पाकिस्तान की कूटनीति को देखकर भारत सरकार अपनी कूटनीतिक कमियों को ढांकने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस ने भी जयशंकर समेत मोदी सरकार को निशाने पर लिया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि जयशंकर इस बयान से पाकिस्तान के मध्यस्थ और पहलकर्ता के रूप में उभरने से भारत को हुई भारी शर्मिंदगी और क्षेत्रीय कूटनीति को लगे झटके को ढकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी सवाल उठाया कि तो क्या Narendra Modi ‘दलाली’ कर रहे थे, जब उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता की पेशकश की थी? या फिर क्या वह ‘दलाली’ थी, जब उनके समर्थकों ने दावा किया कि उन्होंने युद्ध रुकवा दिया? विदेश मंत्री की यह बात साफ तौर पर विरोधाभासी लगती है। सुप्रिया ने मीडिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि जो लोग इस बयान को तेजी से शेयर कर रहे हैं, क्या अब दलाल शब्द इस्तेमाल करना सही माना जा रहा है?
शिवसेना यूबीटी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा कि मुझे कोई दिक्कत नहीं है अगर पाकिस्तान को दलाल कहा जाए क्योंकि वह देश अक्सर दूसरों के झगड़ों में खुद को बीच में डालता है। लेकिन मुझे इस बात से जरूर दिक्कत है कि भारत ने इस युद्ध में एक तरफ झुकाव दिखाया, देर से ईरान से संपर्क किया, और अब स्थिति यह है कि शांति बातचीत में भारत की कोई खास भूमिका नहीं दिख रही है।
RJD की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने जयशंकर का एक वीडियो शेयर किया इसमें जयशंकर कह रहे हैं कि हमने रूस और यूक्रेन का युद्ध रुकवाया। मैं आपको डेट समय सब बता सकता हूँ। इस पर प्रियंका भारती ने सवाल उठाया कि युद्धविराम की पेशकश अगर दलाली है तो तब आप भी दलाली कर रहे थे क्या ?
कुल मिलाकर इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भारत की विदेश नीति और उसकी भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ सरकार मध्यस्थता से दूरी बनाने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष और कई नेता इसे विरोधाभास बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जयशंकर के इस बयान पर सरकार क्या सफाई देती है और क्या भारत आगे भी खुद को सिर्फ एक पक्ष तक सीमित रखेगा या वैश्विक स्तर पर शांति वार्ता में सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश करेगा।