जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने 'बदला' लेने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बयान की कड़ी आलोचना की है। डोभाल के बयान को मुसलमानों के खिलाफ नफरत और हिंसा भड़काने वाले संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का बदला लेने वाला बयान विवादों में घिरता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने डोभाल की 'इतिहास का बदला' वाली टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इसे 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि एक उच्च अधिकारी का इस तरह की भाषा में बोलना मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाना है।
महबूबा मुफ्ती ने रविवार को अपने बयान में कहा कि डोभाल का कर्तव्य देश को आंतरिक और बाहरी खतरों से बचाना है, लेकिन वे 'नफरत की सांप्रदायिक विचारधारा' में शामिल होकर मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "21वीं सदी में सदियों पुरानी घटनाओं का बदला लेने की बात करना सिर्फ एक 'डॉग व्हिसल' है, जो गरीब और अशिक्षित युवाओं को पहले से ही हर तरफ से हमलों का सामना कर रही अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए उकसा रहा है।"
यह विवाद डोभाल के 10 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में 'विकसित भारत युवा संवाद' में दिए गए भाषण से शुरू हुआ। डोभाल ने कहा था, "हमारे पूर्वजों ने बड़े बलिदान दिए, अपमान सहा। हमारे मंदिर लूटे गए और हम चुपचाप देखते रहे। यह इतिहास हमें चुनौती देता है कि "हमें अपने इतिहास का बदला लेना है। आज के हर युवा में ऐसी आग होनी चाहिए।" उन्होंने जोर देकर कहा, हमें देश को वापस वहां ले जाना है जहां हम अपने हक, विचारों और विश्वासों पर आधारित महान भारत बना सकें।"
यह टिप्पणी मुख्य रूप से इसलिए विवादास्पद हो गई क्योंकि इसे सांप्रदायिक और नफरत फैलाने वाला माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि सदियों पुरानी घटनाओं (जैसे मध्यकालीन आक्रमणों) का जिक्र कर 'बदला' की बात करना 21वीं सदी में अल्पसंख्यक समुदाय (खासकर मुसलमानों) के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने जैसा है।
देश की प्रमुख पार्टी कांग्रेस की ओर से इस पर आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन पार्टी के पूर्व सांसद उदित राज ने डोभाल के 'मंदिर लूट' वाले जिक्र पर पलटवार किया और कहा कि मंदिर वर्ण व्यवस्था के कारण 'लुटवाए' गए थे, क्या आक्रांता कम थे। उन्होंने जातिगत पाखंड पर भी सवाल उठाए।
कश्मीर के डॉक्टर तलत मजीद (@talat_majid) ने डोभाल की टिप्पणी को 'सांप्रदायिक जहर' बताते हुए कहा कि यह युवाओं को मुसलमानों के खिलाफ कट्टर बनाता है और संविधान का उल्लंघन है।
हरजीत एस चोपड़ा (@Harjeet_Chopra) ने डोभाल की आलोचना की और कहा कि शिक्षित युवाओं को 1000 साल पुरानी घटनाओं का बदला लेने की सलाह देना गलत है, इससे देश बर्बाद हो रहा है।
दूसरी तरफ, हितेश सतावत (@hiteshsatawat) ने मुफ्ती पर पलटवार करते हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का जिक्र किया और कहा कि मुफ्ती का परिवार खुद राजनीतिक अवसरवाद का दोषी है। उन्होंने डोभाल की बात को ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित बताया।
डॉक्टर निखिल आनंद (@NikhilAnandBJP) ने मुफ्ती को 'इस्लामिक गेटो मानसिकता' वाला बताते हुए चुप रहने की सलाह दी और कहा कि डोभाल की बातें देशहित में हैं, जबकि मुफ्ती राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।