केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 18 मार्च 2026 को सभी घरेलू एयरलाइंस को निर्देश जारी किया है कि हर उड़ान में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें सीट सिलेक्शन चार्ज के बिना रखनी होंगी। पहले केवल 20 प्रतिशत सीटें ही मुक्त थीं। डीजीसीए के जरिए जारी इस आदेश में परिवारों के लिए एक ही पीएनआर पर यात्रा करने वाले यात्रियों को पास-पास सीटें देने, स्पोर्ट्स सामान-म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स और पेट्स की पारदर्शी नीति बनाने तथा यात्री अधिकारों को वेबसाइट, ऐप और एयरपोर्ट पर प्रमुखता से प्रदर्शित करने का भी प्रावधान है। सिविल एविएशन मंत्री केआर रम्मोहन नायडू ने इसे “यात्री सुविधा की सर्वोच्च प्राथमिकता” बताया।
DGCA के आदेश में कहा गया है कि कई एयरलाइंस टिकट बुकिंग के बाद या वेब चेक-इन के दौरान पसंदीदा सीट चुनने के लिए अतिरिक्त पैसा वसूल रही थीं। नए निर्देश का मकसद ऐसी हरकतों पर अंकुश लगाना और यात्रियों को लाभ पहुंचाना है।

परिवार और ग्रुप को मिलेगी राहत

सरकार ने एयरलाइंस से यह भी तय करने का निर्देश दिया है कि एक ही पीएनआर (Passenger Name Record) पर यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को साथ-साथ, आसपास वाली सीटें दी जाएं। इससे परिवारों और समूहों को अतिरिक्त पैसे देकर पास वाली सीटें बुक करने की मजबूरी खत्म हो जाएगी।
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दो बेहद जरूरी निर्देश

डीजीसीए ने कहा कि खेल के सामान और म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स को लेजाने की सुविधा इस तरह दी जाए कि उसमें सुरक्षा मानकों का पालन भी हो। सभी एयरलाइंस को पालतू जानवरों (पेट्स) को ले जाने की नीति को स्पष्ट रूप से प्रकाशित करने को कहा गया है। जिससे यात्रियों में भ्रम न रहे।

यात्री अधिकारों पर सख्ती

सरकार ने यात्री अधिकारों के सख्त पालन करने पर जोर दिया है, खासकर उड़ान में देरी, रद्दीकरण और बोर्डिंग से इनकार के मामलों में। एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप, बुकिंग प्लेटफॉर्म और एयरपोर्ट काउंटर पर इन अधिकारों को प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। यात्रियों को उनके अधिकारों के बारे में क्षेत्रीय भाषाओं में भी जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच हो।

बढ़ता एविएशन मार्केट, घटती सुविधाएं

भारत का घरेलू एविएशन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। देश के एयरपोर्ट रोजाना पांच लाख से ज्यादा यात्रियों को हैंडल कर रहे हैं। लेकिन जिस तरह यह मार्केट बढ़ रहा है, एयरलाइंस जवाबदेही से बचना चाहती हैं। हाल ही में कुछ ऐसी घटनाएं सामने आईं जब एयरलाइंस ने घोर लापरवाहियां बरतीं। दिसंबर 2025 में हुई इंडिगो फ्लाइट संकट की घटना भूली नहीं जा सकती है। डीजीसीए के नए पायलट फेटिग नियम (FDTL) लागू होते ही देशभर में हजारों उड़ानें रद्द हुईं। सरकार ने नियम बनाए, लेकिन निगरानी और तैयारी के अभाव में संकट गहराया। बाद में डीजीसीए को नियमों में छूट देनी पड़ी और जनवरी 2026 में इंडिगो पर 22.2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस घटना से साफ हुआ कि रेगुलेटरी नियम अकेले पर्याप्त नहीं होते जब तक मजबूत निगरानी व्यवस्था न हो।
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नए निर्देश में कुछ चीजें अभी भी साफ नहीं हैं। यह नहीं बताया गया कि जिन एयरलाइंस ने इस नियम को तोड़ा, उनके उल्लंघन पर कितना जुर्माना लगेगा। इसका जिक्र नहीं किया गया है। इससे सवाल उठता है कि किसी यात्री से अतिरिक्त शुल्क वसूली की स्थिति में शिकायत निस्तारण का वास्तविक तंत्र क्या होगा। डीजीसीए ने मार्च 2026 में अनुपालन की साप्ताहिक-द्विसाप्ताहिक निगरानी और इंस्पेक्टर विजिट बढ़ाने की घोषणा की है। यात्री संगठनों को अब डीजीसीए से स्पष्ट समय-सीमा और निगरानी प्रोटोकॉल की मांग करनी होगी ताकि घोषित राहत वास्तविकता बन सके।