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कुछ लोग नये कृषि क़ानूनों पर भ्रम फैला रहे हैं: प्रधानमंत्री मोदी

पंजाब और हरियाणा के किसानों के आंदोलन की देश भर में चर्चा है क्योंकि किसान अपने राज्यों से निकलकर दिल्ली के बॉर्डर पर आ गए हैं। इस वजह से राजधानी का सियासी माहौल गर्म है और बीजेपी और मोदी सरकार किसानों को मनाने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में सोमवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कुछ लोग किसानों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। 

नए क़ानूनों के तहत मंडियों को ख़त्म करने को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर मोदी ने कहा है कि अगर मंडियों और एमएसपी को ख़त्म करना होता तो हम इन पर इतना निवेश क्यों करते। उन्होंने कहा कि सरकार मंडियों को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपये ख़र्च कर रही है।

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मोदी ने कहा, ‘सरकारों की नीतियों को लेकर सवाल उठना लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन अब विरोध का आधार सरकार के फ़ैसलों को नहीं बल्कि आशंकाओं को बनाया जा रहा है। ऐतिहासिक कृषि सुधारों के मामले में भी यही खेल खेला जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है।

किसान आंदोलन के कारण विपक्षी दलों के हमले झेल रही सरकार को बचाने उतरे मोदी ने कहा, ‘मुझे एहसास है कि दशकों का छलावा किसानों को आशंकित करता है। लेकिन अब छल से नहीं गंगाजल जैसी पवित्र नीयत के साथ काम किया जा रहा है।’ 

मोदी ने विरोधियों पर हमला बोलते हुए कहा, ‘आपको याद रखना है, ये वही लोग हैं जो पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर सवाल उठाते थे। ये अफवाह फैलाते थे कि चुनाव को देखते हुए 2 हजार रुपये दिए जा रहे हैं और चुनाव के बाद इस पैसे को ब्याज सहित वापस देना पड़ेगा।’

Modi on farm laws 2020 in varanasi - Satya Hindi

मोदी ने कहा कि हमने वादा किया था कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुकूल लागत का डेढ़ गुना एमएसपी देंगे और ये वादा सिर्फ कागज़ों पर ही पूरा नहीं किया गया, बल्कि किसानों के बैंक खाते तक पैसा पहुंचाया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते सालों में फसल बीमा हो या सिंचाई, बीज हो या बाजार, हर स्तर पर काम किया गया है और पीएम फसल बीमा योजना से देश के करीब 4 करोड़ किसान परिवारों की मदद हुई है।

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प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जब किसी क्षेत्र में आधुनिक कनेक्टिविटी का विस्तार होता है, तो इसका बहुत लाभ हमारे किसानों को होता है। बीते वर्षों में ये प्रयास हुआ है कि गांवों में आधुनिक सड़कों के साथ भंडारण, कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्थाएं खड़ी की जाएं और इसके लिए 1 लाख करोड़ का फंड भी बनाया गया है।’

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