मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार, 23 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इस आंदोलन का आह्वान ‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ और ‘इंडिया अगेंस्ट एसआईआर’ से जुड़े संगठनों ने किया है। आंदोलन को किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों, छात्र संगठनों और सिविल सोसायटी के विभिन्न समूहों का समर्थन मिला है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करना, मतदाता सूची से हटाए गए पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है। आंदोलन से जुड़े संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। ताज़ा मामला दिल्ली और यूपी की मतदाता सूची में हेराफेरी करके लाखों वोटरों को उनके मौलिक अधिकार से वंचित करने का मामला सामने आ गया है।

प्रकाश राज, अभिजीत दिपके और परकला प्रभाकर भी आंदोलन के समर्थन में

इस आंदोलन को कई चर्चित हस्तियों का समर्थन मिलने की बात सामने आई है। अभिनेता प्रकाश राज, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े अभिजीत दिपके और राजनीतिक अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर ने प्रदर्शन में भाग लेने की घोषणा की है। परकला प्रभाकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति हैं। प्रदर्शन के समर्थन में आंदोलनकारियों ने नागरिकों से लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की है। किसान नेता राकेश टिकैत, वकील प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी और छात्र नेता आइशी घोष समेत अन्य लोगों के नाम भी आंदोलन में भागीदारी के संदर्भ में सामने आए हैं।
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किसान संगठनों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर ज्ञानेश को हटाने की मांग की

‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। किसान संगठन ने आरोप लगाया है कि ज्ञानेश कुमार ने अपने संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन किया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। संयुक्त किसान मोर्चा ने एसआईआर को रद्द करने और मतदाता सूची से कथित तौर पर बिना पारदर्शिता के हटाए गए नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल करने की मांग भी उठाई है। संगठन ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।

आंदोलन कितने बजे कहां से शुरू होगा

आयोजकों के मुताबिक, दिल्ली में प्रदर्शनकारी शुक्रवार दोपहर एक बजे के आसपास गुरुद्वारा बंगला साहिब, गोल डाकखाना और गोल मार्केट के निकट एकत्र होकर चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करेंगे। इसके बाद ‘पीपल्स पार्लियामेंट’ यानी जन संसद आयोजित करने की योजना है। आयोजकों ने कहा है कि यदि पुलिस मार्च को रोकती है, तो प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प लेंगे। आंदोलन का विस्तार जिला और तहसील मुख्यालयों से लेकर राज्यों की राजधानियों तक करने का आह्वान किया गया है।

मजदूर संगठनों ने भी जताया समर्थन

किसान संगठनों के अलावा ट्रेड यूनियनों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) के महासचिव एलामारम करीम ने कहा है कि मतदाता सूची से नाम हटने के कारण प्रभावित श्रमिकों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ हासिल करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उनका तर्क है कि मतदान के अधिकार से वंचित होने का असर श्रमिकों के व्यापक नागरिक और सामाजिक अधिकारों पर भी पड़ सकता है। इसी आधार पर उन्होंने एसआईआर रद्द करने की मांग का समर्थन किया है।

आंदोलन की प्रमुख मांगें क्या हैं?

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठनों ने कई मांगें रखी हैं:
  • - एसआईआर रद्द किया जाए: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को समाप्त किया जाए।
  • - ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई: मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग।
  • - मतदान का अधिकार बहाल हो: मतदाता सूची से हटाए गए सभी पात्र नागरिकों के नाम दोबारा जोड़े जाएं।
  • - चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव: मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून में संशोधन कर चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए।
  • - चुनावी सुधार: चुनाव में धनबल और बाहुबल पर अंकुश लगाने, आनुपातिक प्रतिनिधित्व लागू करने और चुनावों के लिए सरकारी वित्तपोषण की व्यवस्था करने की मांग।
  • - शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार: दिल्ली के जंतर-मंतर को फिर से निर्धारित विरोध स्थल घोषित करने की मांग।
दिल्ली में पहले भी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। पिछले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई, हिरासत और विरोध के लिए निर्धारित स्थानों को लेकर विवाद सामने आए थे। ऐसे में 23 अक्टूबर के देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान भी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिबंधों पर नजर रहेगी।
कुल मिलाकर, 23 अक्टूबर का प्रदर्शन एसआईआर के विरोध को किसान संगठनों, मजदूर यूनियनों, छात्रों और सिविल सोसायटी के साझा मंच पर लाने की कोशिश है। आंदोलनकारी इसे मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ा सवाल बता रहे हैं। अब इस बात पर नजर रहेगी कि देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किस स्तर पर होते हैं और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।