NCPI के संस्थापक और राष्ट्रीय संगठन सचिव शांतनु डे ने TMC के 20 सांसदों का अपनी पार्टी में स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी एनडीए का समर्थन करेगी। हालांकि एनसीपीआई राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त दल नहीं है।
टीएमसी के बागी सांसद स्पीकर ओम बिरला के साथ। उन्होंने एनसीपीआई में विलय की घोषणा की
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों ने दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला से मुलाकात कर एक और बेहद चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने त्रिपुरा आधारित एक गुमनाम सी राजनीतिक पार्टी 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) के साथ अपने विलय (Merger) की घोषणा कर दी है। उन्होंने स्पीकर से संसद में एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। एनसीपीआई ने कहा विलय का स्वागत किया और कहा कि एनसीपीआई एनडीए को समर्थन देने को तैयार है।
'20 सांसदों का NCPI में स्वागत है, एनडीए को समर्थन'
NCPI के संस्थापक और नेशनल ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी शांतनु डे ने कहा कि उन्हें से पहले इन अंदरूनी घटनाक्रमों के बारे में जानकारी नहीं थी। लेकिन यह खुशी की बात है कि 20 सांसद हमारी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। उनका स्वागत है। पार्टी बढ़ रही है। सवालों के जवाब में शांतनु डे ने कहा कि मुझे इसके बारे में सोशल मीडिया और खबरों से पता चला। मैं उनसे बातचीत करने के लिए तैयार हूँ। अगर मेरी पार्टी आगे बढ़ती है तो मुझे खुशी ही होगी। मैंने सुना है कि यह फैसला पार्टी अध्यक्ष ने लिया है। उन्होंने अभी तक मुझे इस बारे में फोन नहीं किया है। मैं पार्टी को आगे ले जाना चाहता हूँ। अगर मेरी पार्टी बढ़ती है, तो हम देश के लिए काम कर पाएँगे। हम पीएम मोदी का समर्थन करते हैं और देश के लिए NDA के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं... अगर काकोली दी हमसे बात करती हैं, तो हम ज़रूर (दिल्ली) जाएँगे। मुझे उम्मीद है कि हम बात करेंगे (NCPI और 20 TMC सांसद)। हम जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार को कहा था कि टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद NCPI में शामिल हो गए हैं और अब वे NDA को अपना समर्थन देंगे।
'20 सांसदों के NCPI में विलय पर टिप्पणी नहीं'
खुद को नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI) की पूर्व संस्थापक अध्यक्ष बताने वाली शेउली कुंडू ने कहा कि उन्होंने इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया है और उन्हें पार्टी के मौजूदा नेतृत्व के बारे में कोई जानकारी नहीं है। कुंडू ने कहा कि "मैं इस पार्टी की संस्थापक अध्यक्ष थी। मैंने अध्यक्ष पद से पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया है। पार्टी के नए अध्यक्ष ही इस बारे में जानकारी दे सकते हैं। मुझे नहीं पता कि नया अध्यक्ष कौन है।" उन्होंने कहा कि वह 20 बागी TMC सांसदों के NCPI में विलय पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस्तीफ़ा इसलिए दिया क्योंकि अपनी कानूनी प्रैक्टिस के कारण वह पार्टी के काम के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पा रही थीं। कुंडू ने पार्टी में शांतनु डे की भूमिका के दावों पर भी सवाल उठाए। शेउली कुंडू ने कहा- "शांतनु डे न तो पार्टी के संस्थापक हैं और न ही महासचिव। 2023 के बाद वह सदस्य नहीं रहे।"
TMC संकट में ताज़ा घटनाक्रम
- 20 सांसदों की बगावत: कुल 20 सांसदों ने इस बगावत को अंजाम दिया है। इनमें से 19 सांसद व्यक्तिगत रूप से स्पीकर ओम बिरला से मिलने पहुंचे थे। जबकि पहली बार सांसद बनीं रचना बनर्जी, जो इस समय मलेशिया में हैं, उन्होंने भी इस पत्र पर अपनी सहमति दी है।
- NDA को समर्थन: बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने साफ किया कि वे सभी NCPI में शामिल होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करेंगे।
- संसद का गणित और प्रभाव: अगर स्पीकर इस विलय को मंजूरी दे देते हैं, तो लोकसभा में एनडीए (NDA) की ताकत 294 से बढ़कर 314 हो जाएगी। हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत से 46 सीटें कम है।
लोकसभा में अलग बैठाने की मांग
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा: "TMC के दो-तिहाई लोकसभा सदस्यों ने अलग बैठने की व्यवस्था के लिए स्पीकर को पत्र सौंपा है। हम नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर रहे हैं और एनडीए का समर्थन करेंगे।" एक अन्य प्रमुख बागी सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि उन्होंने पार्टी सिंबल (चुनाव चिह्न) पर कोई दावा नहीं किया है और इस पर अंतिम फैसला स्पीकर का होगा।अभिषेक बनर्जी और TMC ने 20 सांसदों की पहल को चुनौती दी
इस बगावत की भनक लगते ही टीएमसी के वफादार सांसदों सागरिका घोष और कीर्ति आजाद ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और टीएमसी के लोकसभा फ्लोर लीडर अभिषेक बनर्जी का एक पत्र उन्हें सौंपा। अभिषेक बनर्जी ने दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) का हवाला देते हुए इस कदम को चुनौती दी है। उन्होंने महाराष्ट्र राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) के तहत किसी विधायी पार्टी के भीतर 'विभाजन' (Split) को अब मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने लिखा कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) एक अखंड राजनीतिक दल है और कोई भी गुट खुद को अलग पार्टी के रूप में स्थापित नहीं कर सकता।
प्रसिद्ध वकील और स्वतंत्र सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए X पर लिखा कि भारतीय लोकतंत्र एक 'मजाक' बन गया है। बागी सांसद खुद से किसी दल में विलय नहीं कर सकते, ऐसा तभी हो सकता है जब मूल पार्टी (TMC) इसका फैसला करे। उन्होंने इन सांसदों को अयोग्य घोषित (Disqualify) करने की मांग की।
आखिर क्या है यह 'NCPI' पार्टी?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाला नाम 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) का है। यह त्रिपुरा की एक बेहद छोटी और गुमनाम पार्टी है।
गठन और प्रभाव: इस पार्टी का रजिस्ट्रेशन साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ था। इसका मुख्य प्रभाव त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में है, लेकिन इसका कोई चुनावी वजूद नहीं रहा है। इस समय देश की किसी भी विधानसभा या संसद में इसका कोई भी चुना हुआ प्रतिनिधि नहीं है।
चुनाव रिकॉर्ड: 2023 के त्रिपुरा चुनावों में इस पार्टी ने केवल 4 सीटों पर चुनाव लड़ा था। चावमनु (Chawamanu) सीट पर इसके उम्मीदवार बर्जेदा त्रिपुरा को महज 536 वोट मिले थे, जो कि नोटा (NOTA - 500 वोट) से जरा सा ही ज्यादा था। इस पार्टी का चुनाव चिह्न 'पेन की निब' (Pen Nib) था।
रणनीतिक चयन: बीजेपी के एक सूत्र के मुताबिक, बागी सांसदों ने इस पार्टी को इसलिए चुना ताकि वे पश्चिम बंगाल से अपना नाता भी न खोएं और पूर्वोत्तर (Northeast) क्षेत्र को लोकसभा में एक बड़ा प्रतिनिधित्व भी मिल सके।उम्मीदवार भी रह गए हैरान
जब 2023 में NCPI के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले 62 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर बर्जेदा त्रिपुरा को इस विलय की खबर मिली, तो वे दंग रह गए। उन्होंने कहा, "मैंने 2023 में चुनाव लड़ा था। अब तीन साल बाद यह क्या हो रहा है? मुझे तो खुद एक व्यक्ति ने इस पार्टी से चुनाव लड़ने को कहा था।" बता दें कि एनसीपीआई को चुनाव आयोग ने राज्य स्तर पर या राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त दल का दर्जा नहीं दे रखा है।क्या फैसला लेंगे स्पीकर ओम बिरला
लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, स्पीकर ओम बिरला इस विलय पर कोई भी फैसला लेने से पहले सभी 20 बागी सांसदों के हस्ताक्षरों (Signatures) की गहन जांच और सत्यापन (Verification) करेंगे। यदि दलबदल विरोधी कानून के तहत दो-तिहाई सदस्यों के विलय के नियम को सही माना जाता है, तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा। लेकिन इसके कई तकनीकी पहलू हैं। अगर ओम बिरला नियम विरुद्ध फैसला लेते हैं तो स्पीकर के फैसले को अदालत में चुनौती मिल सकती है।