संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत भी जोरदार हंगामे के साथ हुई। सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के विरोध के कारण बार-बार बाधित हुई। विपक्ष ने नीट (NEET) पेपर लीक, छात्र आंदोलन पर कथित पुलिस कार्रवाई और जंतर-मंतर की घटनाओं को लेकर सरकार को घेरा, जबकि सरकार ने परीक्षा सुधारों से जुड़ा नया विधेयक पेश किया और विपक्ष से चर्चा में भाग लेने की अपील की।
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए आसन के समीप पहुंच गए। इस बीच केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। सरकार का कहना है कि यह विधेयक पेपर लीक के मामलों में सजा और जुर्माने को कड़ा बनाने के लिए लाया गया है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत दोषियों के लिए सजा पांच से दस वर्ष तक तथा अधिकतम जुर्माना 50 लाख रुपये तक करने का प्रावधान है।
हालांकि विधेयक पेश होने के बावजूद सदन में शोर-शराबा जारी रहा। विपक्षी सदस्य लगातार नारे लगाते रहे और सरकार से छात्र आंदोलन तथा कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा की मांग करते रहे। हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर तक और बाद में दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
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राज्यसभा में भी हंगामा

उधर राज्यसभा में भी कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नियमों को स्थगित कर तत्काल चर्चा कराने की मांग उठाई। कांग्रेस, डीएमके और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ कथित पुलिस बल प्रयोग और नीट विवाद पर सरकार से जवाब मांगा। डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने कार्य स्थगन का नोटिस देकर नीट परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की समस्याओं और कथित छात्र आत्महत्याओं पर चर्चा कराने की मांग की। लगातार हंगामे के कारण राज्यसभा के सभापति को भी कार्यवाही दोपहर तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष का आरोप था कि सरकार छात्रों की चिंताओं और पुलिस कार्रवाई पर जवाब देने से बच रही है।
संसद परिसर के भीतर और बाहर भी विपक्ष ने प्रदर्शन जारी रखा। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने गृह मंत्री अमित शाह से कथित पुलिस कार्रवाई पर जवाब देने की मांग की और सरकार पर छात्र आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया।
वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि वह सदन चलने दे और परीक्षा सुधार संबंधी विधेयक पर सार्थक चर्चा में भाग ले। उनका कहना था कि सरकार छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए कानून को और अधिक प्रभावी बना रही है तथा लगातार व्यवधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है।
संसद का यह सत्र नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के लिए भी काफी अहम होगा। 25 जुलाई को बढ़ते दबाव के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। सोमवार को शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सवालों का जवाब देने के लिए उनका पहला प्रश्नकाल होगा।
यह संशोधन विधेयक 36 दिनों से चले आ रहे उस बड़े आंदोलन के बाद आ रहा है, जिसकी शुरुआत 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले हुई थी और 28 जून से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन उपवास से इसे भारी जनसमर्थन मिला।