खालिस्तानी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश का जुर्म कबूल करने वाले निखिल गुप्ता के पलटने से भारत के लिए फिर से असहज स्थिति पैदा हो गई है। अब एक रिपोर्ट में उन हालात पर प्रकाश डाला गया है कि अमेरिका को इस साजिश की जानकारी कैसे मिली, जिसके बारे में भारत ने किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अभियोजकों ने दावा किया है कि यह कथित साजिश जून 2023 में तब रची गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्हाइट हाउस की राजकीय यात्रा पर थे। तो क्या मोदी को इस सारी योजना की जानकारी पहले से थी। जैसा कि आरोप है कि रिसर्च एनॉलिसिसि विंग (रॉ) इस मामले को देख रहा था। रॉ के हर ऑपरेशन की जानकारी भारत के प्रधानमंत्री को दी जाती है।

मोदी के US दौरे के दौरान साजिश का दावा

न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, कथित साजिश जून 2023 में उस समय रची गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के सरकारी दौरे पर थे। 22 जून 2023 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रथम महिला जिल बाइडेन ने व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में भव्य राजकीय रात्रिभोज का आयोजन किया था। यह कार्यक्रम व्हाइट हाउस की भव्यता और कूटनीतिक महत्व के कारण काफी चर्चा में रहा था। मोदी ने जिल बाइडेन को महंगे तोहफे भेंट किए थे।
हालांकि, अमेरिकी अभियोजकों का दावा है कि जब बाइडेन और मोदी रात्रिभोज में शामिल थे, तब अमेरिकी राष्ट्रपति को इस बात की जानकारी नहीं थी कि एक भारतीय अधिकारी ने न्यूयॉर्क में पन्नू की हत्या की कथित साजिश को मंजूरी दी है। बाद में बाइडेन को इस कथित साजिश की जानकारी दी गई।
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निखिल गुप्ता की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण

निखिल गुप्ता (54) को राजकीय रात्रिभोज के कुछ ही दिनों बाद चेक गणराज्य में गिरफ्तार कर लिया गया था। वर्ष 2024 में उसे अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया। शुरुआत में गुप्ता ने सभी आरोपों से इनकार किया था, लेकिन अब उसने अपना रुख बदलते हुए तीन आरोपों को स्वीकार कर लिया है। शुक्रवार को गुप्ता ने ‘मर्डर-फॉर-हायर’ (किराए पर हत्या), हत्या की साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश जैसे तीन गंभीर आरोपों को स्वीकार किया। दोष स्वीकार करने के बाद अब उसे लंबी और चर्चित सुनवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। अमेरिकी सरकार ने उसके लिए 21 से 24 वर्ष की जेल की सजा की मांग की है। यदि मुकदमा चलता तो उसे अधिकतम 40 वर्ष तक की सजा हो सकती थी। उसकी सजा सुनाने की तारीख 29 मई तय की गई है।

कौन है निखिल गुप्ता?

अमेरिकी अभियोजकों के मुताबिक, निखिल गुप्ता, जिसे ‘निक’ के नाम से भी जाना जाता है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी से जुड़े रहा है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि वो पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी विकाश (विकास) यादव का सहयोगी था। विकाश यादव पर भी अमेरिका में अभियोग लगाया गया है, लेकिन उन्हें अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कथित साजिश के समय यादव कैबिनेट सचिवालय में कार्यरत थे, जिसके तहत रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) काम करती है।
अभियोजकों का दावा है कि यादव ने गुप्ता को अमेरिका की धरती पर पन्नू की हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए भर्ती किया था। इसके बाद गुप्ता ने एक शूटर की तलाश शुरू की और जिस व्यक्ति से संपर्क किया, उसे उन्होंने अपना आपराधिक सहयोगी समझा। हत्या के लिए 1 लाख डॉलर में सौदा तय हुआ।

अमेरिकी एजेंसियों की भूमिका

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, निखिल गुप्ता के टेक्स्ट संदेशों से पता चला कि उसने कथित रूप से हत्या की तारीख प्रधानमंत्री मोदी के राजकीय दौरे से टकराने से बचाने के लिए आगे बढ़ाने को कहा था। हालांकि, जिस व्यक्ति को गुप्ता ने शूटर समझा, वह वास्तव में अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) का अंडरकवर अधिकारी निकला। इसके बाद DEA और FBI ने मिलकर इस कथित साजिश को विफल कर दिया। लेकिन इससे खालिस्तान समर्थकों को भारत पर आरोप लगाने का मौका मिल गया।

अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि प्रधानमंत्री मोदी को इस कथित साजिश की जानकारी थी। न तो बाइडेन ने सार्वजनिक रूप से इस मामले का उल्लेख किया और न ही 2024 में राष्ट्रपति पद संभालने वाले Donald Trump ने इस पर कोई टिप्पणी की है या भारत पर उंगली उठाई है।

मामला फिर चर्चा में क्यों?

निखिल गुप्ता द्वारा अचानक दोष स्वीकार करने को इस मामले में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे पहले वो सभी आरोपों से इनकार कर रहा था। उसके इस यू-टर्न के बाद 2023 की इस कथित साजिश और भारत-अमेरिका संबंधों पर इसके प्रभाव को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। फिलहाल अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने का इंतजार है, जिसके बाद यह मामला और भी गरमाएगा।

क्या भारत के लिए असहज स्थिति

निखिल गुप्ता प्रकरण इसलिए मोदी सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करता है क्योंकि भारत सरकार ने शुरू से ही इस कथित साजिश से किसी भी तरह के आधिकारिक संबंध से इनकार किया था। नई दिल्ली का रुख स्पष्ट था कि भारत की किसी एजेंसी या सरकारी तंत्र का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन अब गुप्ता द्वारा अमेरिकी अदालत में दोष स्वीकार करने से यह मामला केवल आरोपों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत दर्ज तथ्यों और स्वीकारोक्ति का हिस्सा बन गया है। इससे सरकार की पहले की आधिकारिक सफाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू अमेरिकी जांच एजेंसियों द्वारा कथित रूप से गुप्ता और पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी विकाश यादव के बीच संबंध स्थापित किया जाना है। यदि अदालत में पेश सबूत इस संबंध को पुष्ट करते हैं, तो यह भारत के लिए कूटनीतिक रूप से संवेदनशील स्थिति बन सकती है, क्योंकि मामला सीधे एक मित्र देश की धरती पर कथित हत्या की साजिश से जुड़ा है।
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तीसरा पहलू भारत-अमेरिका संबंधों की छवि से जुड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे में इस तरह का मामला, जो प्रधानमंत्री के अमेरिकी दौरे के दौरान कथित रूप से सामने आया, विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का अवसर देता है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत जानकारी या भूमिका का कोई सबूत नहीं बताया है, फिर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह विवाद भारत की साख को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है।
हालांकि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि भारत ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि संबंधित अधिकारी अब सरकारी सेवा में नहीं हैं और यदि कोई व्यक्तिगत स्तर पर गलत कार्य हुआ है तो वह भारत सरकार की नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता। अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। लेकिन फिलहाल, निखिल गुप्ता की स्वीकारोक्ति ने उस राजनीतिक और कूटनीतिक बहस को फिर से तेज कर दिया है, जिसे सरकार पहले आरोप आधारित बताकर खारिज करती रही थी।