कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है। इस पर 125 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। इस बीच बीजेपी की महिला सांसदों ने स्पीकर में पूर्ण आस्था जताई और कांग्रेस की महिला सांसदों पर कार्रवाई की मांग की।
मोदी सरकार बनाम विपक्षः अपडेट
- विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को दिया
- संसद मंगलवार को भी बार-बार स्थगित की जा रही है, संसद शुरू होते ही हंगामा शुरू हो जाता है
- बीजेपी की महिला सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखकर उनकी तारीफ की, विपक्षी महिला सांसदों पर कार्रवाई की मांग की
- नेता विपक्ष राहुल गांधी ने 15 दिसंबर 2023 का जनरल नरवणे का ट्वीट उनकी किताब के प्रकाशन के संदर्भ में दिखाया
- जनरल नरवणे के ट्वीट से साफ है कि संसद में मोदी सरकार ने किताब के प्रकाशन पर झूठ बोल
- किताब को लेकर पेंगुइन का ट्वीट भी झूठा साबित हुआ, उसने किताब छपने वाला अपना पुराना ट्वीट डिलीट कर दिया
- राहुल गांधी ने कहा जनरल नरवणे झूठ नहीं बोल रहे हैं, मैं उनके साथ खड़ा हूं, पेंगुइन और मोदी सरकार झूठ बोल रही
लोकसभा में हंगामे और बार-बार कार्यवाही स्थगित होने के बीच, कांग्रेस के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टियां मंगलवार (10 फरवरी, 2026) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर सकती हैं। लोकसभा को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा महासचिव को इस संबंध में नोटिस सौंप दिया, जिससे संसद में सत्ताधारी और विपक्ष के बीच टकराव और गहरा गया है।
नोटिस पर 125 सांसदों के हस्ताक्षर
कांग्रेस के मुख्य व्हिप के. सुरेश और व्हिप जावेद अहमद ने यह नोटिस सौंपा। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर 125 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (एसपी), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और अन्य विपक्षी दल शामिल हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं और स्पीकर को जवाब देने के लिए एक-दो दिन का समय देने की सलाह दी है। टीएमसी के लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा, "हम नो-कॉन्फिडेंस रेजोल्यूशन पर हस्ताक्षर करने को तैयार हैं, लेकिन कांग्रेस को चार मुद्दों पर स्पीकर को पत्र भेजकर जवाब मांगना चाहिए।"
स्पीकर ओम बिड़ला पर मुख्य आरोप
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ओम बिड़ला पक्षपाती व्यवहार कर रहे हैं। प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
- लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया गया।
- हाल ही में 8 विपक्षी सांसदों (जिनमें 7 कांग्रेस के) को अनुशासनहीनता के नाम पर शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया।
- स्पीकर ने दावा किया कि उनके पास "ठोस जानकारी" थी कि कांग्रेस के सदस्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट की ओर जा सकते हैं और "कुछ अप्रत्याशित कार्य" कर सकते हैं, इसलिए उन्होंने पीएम को सदन में न आने की सलाह दी। विपक्ष इसे आधारहीन और पक्षपातपूर्ण बताता है।
- कांग्रेस की महिला सांसदों (प्रियंका गांधी वाड्रा, ज्योतिमणि आदि) ने स्पीकर को पत्र लिखकर कहा कि वे "पीएम की जन-विरोधी सरकार" के खिलाफ लड़ने के कारण निशाना बनाई जा रही हैं।
यह विवाद बजट सत्र के दौरान 4 फरवरी से शुरू हुए हंगामे से जुड़ा है, जब विपक्ष ने पीएम मोदी की अनुपस्थिति, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब से उद्धरण जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की। सदन बार-बार स्थगित हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्पीकर विपक्ष को दबा रहे हैं और सदन में "विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं बची है"।
नोटिस के बाद अब आगे क्या होगा
संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए कम से कम 14 दिनों का नोटिस आवश्यक है। इसलिए यह प्रस्ताव सत्र के दूसरे भाग में चर्चा के लिए आ सकता है। यदि बहुमत से पारित होता है, तो स्पीकर को हटाया जा सकता है। विपक्ष अब स्पीकर से निलंबन वापस लेने, राहुल गांधी को बोलने का मौका देने और पक्षपातपूर्ण टिप्पणियों को हटाने की मांग कर रहा है।
बीजेपी ने महिला सांसदों को आगे किया
लोकसभा में हंगामे के बीच 'पत्र बनाम पत्र' का नया दौर शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को पत्र लिखकर 4 फरवरी को सदन में हुए 'दुर्भाग्यपूर्ण' घटनाक्रम के लिए विपक्षी सांसदों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला और सदन की मर्यादा का उल्लंघन बताया है। इससे पहले कांग्रेस की महिला सांसदों ने स्पीकर के खिलाफ पत्र लिखा था। अब बीजेपी की महिला सांसदों ने उसका जवाब दिया है।
बिड़ला की तारीफों के पुल बांधे बीजेपी महिला सांसदों ने
भाजपा की महिला सांसदों ने अपने पत्र में स्पीकर की सराहना की और कहा, "4 फरवरी को सदन और पूरे देश ने लोकसभा कक्ष में एक सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक घटना देखी। विपक्ष के सदस्यों ने न केवल वेल में प्रवेश किया, बल्कि स्पीकर की टेबल पर चढ़ गए, कागज फाड़े और उन्हें स्पीकर की ओर फेंका।" पत्र में आगे कहा गया है कि "दुख की बात है कि कुछ माननीय महिला सदस्यों ने आक्रामक व्यवहार किया, बैनर और तख्तियां लेकर दूसरी ओर पार कर गईं, प्रधानमंत्री की सीट को घेरा और ट्रेजरी बेंच में घुस गईं... इसलिए हम आपसे अनुरोध करती हैं कि सदन परिसर में ऐसे घृणित कृत्यों के लिए जिम्मेदार विपक्षी सांसदों के खिलाफ नियमों के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई करें, जिन्होंने हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की बदनामी की है।"
यह पत्र कांग्रेस और अन्य विपक्षी महिला सांसदों के एक दिन पहले स्पीकर को लिखे गए पत्र के जवाब में आया है। कांग्रेस की महिला सांसदों (जिनमें प्रियंका गांधी वाड्रा, ज्योतिमणि आदि शामिल हैं) ने स्पीकर पर आरोप लगाया था कि वे सत्ताधारी दल के दबाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति को जस्टिफाई करने के लिए उनके खिलाफ "झूठे, आधारहीन और मानहानिकारक" आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए क्योंकि वे विपक्ष का सामना करने से डर रहे थे, न कि किसी खतरे की वजह से।
इस घटना के बाद स्पीकर ने 8 विपक्षी सांसदों (कांग्रेस और सीपीआई(एम) सहित) को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया था। यह विवाद बजट सत्र में जारी गतिरोध को और गहरा रहा है, जहां विपक्ष भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब से उद्धरण जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है। भाजपा का कहना है कि विपक्ष सदन की गरिमा भंग कर रहा है, जबकि विपक्ष स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगा रहा है।