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नोबेल विजेता अभिजीत ने की थी नोटबंदी, जीएसटी की तीखी आलोचना  

नोबेल पुरस्कार के लिए चुने गए अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने नोटबंदी के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की तीखी आलोचना की थी। 'द वायर' को 20 दिसंबर, 2017 को दिए एक लंबे इंटरव्यू में बनर्जी ने नोटबंदी के बारे में कहा था कि इस सरकार ने दो बहुत ही विचित्र काम किए, उनमें से नोटबंदी है। उन्होंने कहा: 
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मुझे नहीं लगता है कि नोटबंदी के फ़ैसले के पीछे कोई अर्थशास्त्र था, इसकी कोई वजह नहीं है कि नोटबंदी से कोई फ़ायदा होगा। हालाँकि सरकार के लोग यह नहीं मानेंगे लेकिन मुझे नहीं लगता है कि वे ख़ुद इस बात से पूरी तरह सहमत होंगे कि यह सफल हो ही जाएगा।


अभिजीत बनर्जी, नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री

इसी तरह इस इंटरव्यू में नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री ने जीएसटी पर सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने साफ़ कहा था कि जीएसटी लंबे समय के लिए अच्छा विचार हो सकता है, पर उसके लिए अभी राजनीतिक दलों को कई लड़ाइयाँ लड़नी होंगी। 
अभिजीत बनर्जी ने कहा, 'मुझे नहीं लगता है कि जीएसटी का फ़ैसला सही था। लेकिन कई देशों ने इसे लागू किया है। हमें अब यह देखना होगा कि अनौपचारिक सेक्टर से हम कैसे निपटेते हैं। इसे बेहतर ढंग से लागू किया जा सकता था, पर ऐसा नहीं है कि इससे कोई विपदा आ जाएगी।'
यह अर्थशास्त्री विकास के बहुचर्चित गुजरात मॉडल से भी बहुत प्रभावित नहीं था। उसी इंटरव्यू में अभिजीत बनर्जी ने यह तो कहा कि गुजरात में ढाँचागत सुविधाएँ बहुत ही अच्छी थीं, पर इसके साथ यह जोड़ा कि उस हिसाब से वहाँ विकास नहीं हुआ। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 साल तक गुजरात के मुख्य मंत्री रहे। साल 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान गुजरात मॉडल का काफ़ी ढोल पीटा गया था और बीजेपी ने अपना चुनाव प्रचार उसी पर टिका रखा था। लेकिन बनर्जी ने इसकी भी आलोचना की। उन्होंने कहा था : 

गुजरात के नतीजे कुछ ख़ास नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि वह राज्य देश के सभी राज्यों से बहुत तेज़ रफ़्तार से विकास कर रहा था। यदि हम यह मानें कि पहले उसने बहुत तेज़ रफ़्तार से विकास किया और बाद में वह रफ़्तार धीमी हो गई, तो गुजरात कोई बहुत धनी राज्य भी नहीं है। यह चिंता की बात है। मैं नहीं समझ पा रहा हूँ कि गुजरात ज्यादा विकसित क्यों नहीं है।


अभिजीत बनर्जी, नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री

दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री ने संसद में जिस मनरेगा की काफ़ी आलोचना की और कहा कि आज़ादी के 70 साल बाद भी गड्ढा खोदने की ज़रूरत कांग्रेस सरकार की अर्थनीति की नाकामी उजागर करता है, अभिजीत बनर्जी ने उसकी तारीफ की। उन्होंने किसानों की आत्महत्या पर चिंता जताते हुए कहा कि गाँवों में इस तरह की घटना से यह साफ़ है कि वहां संकट है। हमारे पास जो सबसे अच्छी चीज है, वह है मनरेगा, हालाँकि मनरेगा संकट तुरन्त दूर करने का सही तरीका नहीं है। लेकिन मनरेगा से यह तो है कि लोगों को नकद पैसे मिल जाते हैं। 
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