दिल्ली में नॉर्थ-ईस्ट के लोगों पर कथित हमलों को लेकर चिंता बढ़ी है। मेघालय के मुख्यमंत्री ने कहा है कि नस्लीय हमला किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
दिल्ली में फिर से नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के साथ कथित नस्लीय हिंसा की घटना हुई है। मणिपुर की एक युवती और असम से उसकी ट्रांसजेंडर दोस्त साकेत जिला कोर्ट के पास एक पार्क में टहल रही थीं। तभी कुछ लोगों ने उन पर अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। जब युवती ने इसका विरोध किया, तो बात बढ़ गई और आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। इस मुद्दे को मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने उठाया है और कहा है कि उत्तर पूर्व के लोगों के साथ इस तरह की नस्लीय हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनकी यह टिप्पणी तब आई है जब हाल में लगातार ऐसी कई घटनाएँ घटी हैं।
दिल्ली की यह ताज़ा घटना साउथ दिल्ली इलाक़े में साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट कॉम्प्लेक्स के पास हुई। पुलिस के मुताबिक़ युवती को मामूली चोटें आईं। उसे सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसका इलाज हुआ। अब उसकी हालत स्थिर है और चोटें गंभीर नहीं हैं।
दिल्ली पुलिस ने मौक़े पर पहुँचकर शिकायत ली। उन्होंने कहा कि मामले में उचित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इसमें महिला की गरिमा भंग करने, आपराधिक धमकी और समूह में हमला जैसी धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस पीड़िता से लगातार संपर्क में है और उसे हर जरूरी मदद दे रही है।
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने इस घटना पर रोष जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'भारत के मेनलैंड में पूर्वोत्तर के लोगों पर बार-बार हमले से बेहद ग़ुस्सा आ रहा है। दिल्ली के साकेत कोर्ट के पास मणिपुर और असम के हमारे दो लोगों पर शारीरिक हमला बेहद दुखद है। रेशियल बुलिंग यानी नस्लीय धौंस को नया सामान्य नहीं बनने देना चाहिए। हमें इसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी होगी।' उन्होंने दिल्ली पुलिस और अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग की।
दिल्ली पुलिस ने संगमा की पोस्ट का जवाब देते हुए कहा, 'सर, हम बताना चाहते हैं कि उचित धाराओं के तहत क्रिमिनल केस दर्ज किया गया है। हम पीड़िता से लगातार संपर्क में हैं और पूरी मदद दे रहे हैं। कई टीमों ने आरोपियों को पकड़ने के लिए काम शुरू कर दिया है। दिल्ली पुलिस ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करती। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।'
बाद में पुलिस ने उनकी पोस्ट पर अपडेट दिया है कि एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाक़ी आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमों ने छापेमारी शुरू कर दी है।
मालवीय नगर में भी हुई थी 'नस्लीय' घटना
दिल्ली में हाल ही में एक और 'नस्लीय अपमान' की घटना 20 फरवरी को हुई थी, जब तीन महिलाएं अपने चौथे मंजिल के किराए के फ्लैट में एसी लगवाने के लिए बिजली मिस्त्री बुलाई थीं। इनमें से एक यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। ड्रिलिंग के दौरान धूल और मलबा नीचे की मंजिल पर गिरा, जिससे पड़ोसी हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी जैन ने आपत्ति जताई। विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने महिलाओं पर नस्लीय टिप्पणियां कीं।वायरल वीडियो में आरोपी महिला को 'मोमो बेचने वाली', '500 रुपये में मसाज पार्लर में काम करने वाली धंधेवाली' जैसे अपमानजनक शब्द कहते सुना जा सकता है। उन्होंने महिलाओं को कथित तौर पर सेक्स वर्कर और ड्रग एडिक्ट भी कहा। बाद में आरोपियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई।
फ़रवरी के आख़िर में ही गोरखपुर में भी नगालैंड की एक डॉक्टर के साथ ऐसी ही घटना हुई थी। तब इन घटनाओं पर पूर्वोत्तर के नेता एकजुट होकर बोले थे कि अब समय आ गया है कि समाज में जागरूकता फैलाई जाए और ऐसे अपराधों पर सख्ती बरती जाए ताकि हर भारतीय सुरक्षित महसूस करे।
तीन सीएम ने जताई थी आपत्ति
संगमा ने तब न सिर्फ दिल्ली की घटना, बल्कि गोरखपुर के एम्स में नगालैंड की एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ नस्लीय और यौन उत्पीड़न का भी ज़िक्र किया था। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'महिला की गरिमा का अपमान एक सभ्य राष्ट्र में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। वे भी आपकी बहनें और बेटियां हैं। मैं अधिकारियों से अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील करता हूं।' पेमा खांडू, प्रेम सिंह तमांग और कॉनराड संगमा
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने घटना को शर्मनाक बताया और कहा था कि ऐसे व्यवहार समाज में बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'मैंने सोमवार को घटना के बारे में जानते ही दिल्ली पुलिस कमिश्नर से बात की और सख्त कार्रवाई की मांग की। आरोपी फरार हैं, लेकिन मुझे आश्वासन मिला है कि उन्हें जल्द पकड़ा जाएगा और कानून के अनुसार सजा दी जाएगी। हम अपनी तीन बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनकी सुरक्षा, सम्मान और न्याय हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।'
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने घटना को 'चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण' बताया था। उन्होंने कहा था, 'ऐसी घटनाएं हमें सम्मान और आपसी आदर की याद दिलाती हैं। पूर्वोत्तर हमारा अभिन्न अंग है और हर नागरिक को सम्मान, समानता और सुरक्षा मिलनी चाहिए।'
बहरहाल, साउथ दिल्ली की यह घटना पूर्वोत्तर के लोगों के ख़िलाफ़ नस्लवाद और भेदभाव की समस्या को फिर से उजागर करती है। कई बार दिल्ली और अन्य शहरों में उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोग ऐसी घटनाओं का शिकार होते हैं। संगमा जैसे नेता बार-बार इस मुद्दे पर आवाज़ उठाते हैं। पुलिस जाँच जारी है।