30 मई 2026 को CUET-UG परीक्षा तकनीकी गड़बड़ी का शिकार हो गई। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर फिर से हमला किया। नीट, सीबीएसई परीक्षा नतीजों को लेकर सरकार आरोपों में घिरती जा रही है।
प्रयागराज में शनिवार को छात्रों का प्रदर्शन
'पहले नीट, फिर सीबीएसई, अब सीयूईटी'- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर एक और परीक्षा में देरी के कारण विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट-अंडरग्रेजुएट (CUET-UG) 2026 परीक्षा कई केंद्रों पर शनिवार को तकनीकी गड़बड़ी के कारण देरी से हुई, जिससे छात्रों और अभिभावकों में खासी नाराजगी फैल गई। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने बाद में स्पष्टीकरण जारी कर देरी की जिम्मेदारी अपने तकनीकी पार्टनर टीसीएस पर डाली। सीयूईटी परीक्षा में देरी की वजह से छात्रों को शनिवार को काफी परेशान होना पड़ा। जगह-जगह उन्होंने इसके विरोध में प्रदर्शन किए।
शनिवार, 30 मई 2026 को CUET-UG परीक्षा के आयोजन में सुबह की शिफ्ट में दो घंटे से अधिक की देरी हुई। कई राज्यों के परीक्षा केंद्रों पर छात्र घंटों इंतजार करते रहे, जिसके बाद केंद्रों के बाहर NTA की नोटिस चस्पा कर दी गई। NTA ने बताया कि तकनीकी पार्टनर M/s TCS की तरफ से तकनीकी गड़बड़ी (technical glitch) की वजह से देरी हुई। समस्या हल होने के बाद परीक्षा आयोजित की गई और सभी उम्मीदवारों को पूर्ण मुआवजा समय (compensatory time) दिया गया ताकि किसी को नुकसान न हो।
NTA ने एक बयान में कहा, “M/s TCS ने सूचित किया है कि उनके स्तर पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण 30.05.2026 को कुछ केंद्रों पर CUET (UG) 2026 की शुरुआत में देरी हुई। समस्या हल कर ली गई है और परीक्षा पूर्ण समय देने के साथ आयोजित की जा रही है।” एजेंसी ने छात्रों व अभिभावकों से हुई असुविधा के लिए खेद जताया और हेल्पलाइन नंबर (91-11-40759000) तथा ईमेल (cuet-ug@nta.ac.in) जारी किया।
पूर्व सीएम आतिशी का हमला
आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता और पूर्व दिल्ली सीएम आतिशी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा, “पहले NEET, फिर CBSE, अब CUET। आज CUET में ‘तकनीकी समस्या’ के कारण देरी हुई। पूरे भारत में लाखों छात्र परीक्षा देने वाले थे। घंटों इंतजार के बाद केंद्रों के बाहर नोटिस चस्पा किए गए। उल्लेखनीय अक्षमता धर्मेद्र प्रधान (केंद्रीय मंत्री)! आतिशी ने NTA नोटिस की फोटो भी साझा की।
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने परीक्षा केंद्रों के बाहर की अराजकता के वीडियो शेयर किए और कहा कि देरी “बड़ी सेंध” का संकेत हो सकती है।
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी हमला बोलते हुए कहा, “NEET। CBSE। SSC। और आज CUET। चार परीक्षाएं। एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं आयोजित हुई।” उन्होंने ‘विश्वगुरु’ के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा शिक्षा तंत्र बर्बाद कर दिया है। राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि जिस पीढ़ी का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है, वही पीढ़ी एक दिन जवाब मांगेगी।
आम आदमी पार्टी का बयान
कभी NEET का Paper Leak, कभी CBSE की गड़बड़ियां, और अब CUET Exam में तकनीकी फेलियर और Cancellation की खबरें। देश के करोड़ों छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन मोदी सरकार हर बड़ी परीक्षा को अव्यवस्था का शिकार बना रही है। अगर प्रधानमंत्री मोदी और शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से परीक्षाएं तक ठीक से नहीं करवाई जा रही हैं, तो सत्ता से चिपके रहने का क्या औचित्य है?
यह NTA के लिए कुछ हफ्तों में दूसरा बड़ा झटका है। NEET-UG 2026 परीक्षा (3 मई को आयोजित) पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी। अब 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए 21 जून को री-एग्जाम का आयोजन तय किया गया है और CBI जांच चल रही है। CBSE कक्षा 12 की अंक प्रणाली में भी विवाद हुआ था। SSC GD Constable Exam 2026 में भी सीटिंग क्षमता की गलत गणना, सर्वर क्रैश और बड़े स्तर पर चीटिंग रैकेट पकड़े जाने के कारण कुछ शिफ्ट रद्द करनी पड़ीं।विपक्षी पार्टियां लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही हैं और प्रधानमंत्री मोदी से इन मुद्दों पर चुप्पी तोड़ने की अपील कर रही हैं।
2022 में शुरू किया गया CUET-UG राष्ट्रीय स्तर का एंट्रेंस एग्जाम है, जो केंद्रीय, राज्य और कुछ निजी विश्वविद्यालयों में स्नातक कार्यक्रमों में दाखिले के लिए एक समान मंच प्रदान करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप यह भाषा कौशल, विषय-विशेष ज्ञान और सामान्य योग्यता का परीक्षण करता है। बड़ी संख्या में आवेदकों और विविध विषय संयोजनों के कारण CUET को कई तिथियों और शिफ्टों में आयोजित किया जाता है। इस वर्ष का चक्र 11 मई से शुरू होकर 31 मई तक चलने वाला है। NTA के इस स्पष्टीकरण के बावजूद, लगातार परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों ने NTA की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का भविष्य इससे प्रभावित हो रहा है और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।