विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व संकट के मद्देनज़र जनता से फिजूलखर्ची से बचने की सलाह दी थी। हैदराबाद में दिए गए भाषण में मोदी ने कहा था कि कोविड 19 जैसी व्यवस्था फिर से लागू करना चाहिए। मोदी की ताज़ा  सलाहों में लोग घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करें, तेल कम खाएं, ईंधन बचाएं, विदेश यात्रा न करें, गोल्ड एक साल तक नहीं खरीदें जैसी बातें शामिल हैं। इस पर कांग्रेस, सपा प्रमुख अखिलेश यादव शिवसेना (UBT) और तृणमूल कांग्रेस आदि ने केंद्र सरकार पर 'नीति विफलता' का आरोप लगाया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान 'नेशन फर्स्ट' (राष्ट्र प्रथम) के तहत सामूहिक जिम्मेदारी की अपील की। उन्होंने जनता को कीमतों में वृद्धि, फिजूलखर्ची रोकने और वैश्विक अनिश्चितता से निपटने के लिए कई उपाय सुझाए। मोदी ने सलाह दी- जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम (WFH) को प्राथमिकता दें। पेट्रोल और डीजल की खपत कम करें, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं। अनावश्यक विदेश यात्राएं और विदेश में शादियां एक साल के लिए टालें। गैर-जरूरी गोल्ड की खरीदारी एक साल के लिए रोकें। स्वदेशी (मेड इन इंडिया) उत्पादों को बढ़ावा दें। परिवारों को खाने के तेल की खपत घटाने की सलाह। किसानों से रासायनिक खादों का इस्तेमाल कम करने, प्राकृतिक खेती और सोलर पंपों की ओर बढ़ने का आह्वान। सरकार का कहना है कि ये कदम मिडिल ईस्ट संकट से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों से भारत को बचाने के लिए हैं।

जनता का सोशल मीडिया पर गुस्सा और विपक्ष का हमला

विपक्षी नेताओं ने इन अपीलों को सरकार की 'नीति विफलता' और आर्थिक तैयारियों की कमी का सबूत बताया। सबसे खास बात ये है कि विपक्ष के अलावा जनता भी सोशल मीडिया पर गुस्सा जता रही है। उसने मोदी के पुराने फोटो को शेयर करते हुए सवाल पूछे हैं। इसमें मोदी के रोड शो में वाहनों का इस्तेमाल और पेट्रोल खर्च, महंगा चश्मा, महंगा सूट और विदेश यात्राओं पर सवाल शामिल हैं। मोदी इसी हफ्ते शुक्रवार को सात देशों की यात्रा पर जा रहे हैं। जनता ने सोशल मीडिया पर कहा कि इन यात्राओं में होने वाली फिजूलखर्ची कौन रोकेगा। अभी पांच राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान वाहनों, प्लेन का विमान क्या था। तमाम मंत्री भी विदेश यात्राएं कर रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी का बयान

कांग्रेस पार्टी ने मोदी की सलाह पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने एक्स पर लिखा है- नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है। वहीं, आने वाला वक्त और कठिन होगा। चुनाव की वजह से मोदी ने समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए। अब चुनाव बाद सारी जिम्मेदारी जनता पर थोप कर खुद मजे कर रहे हैं।
• पेट्रोल डीजल मत खरीदो
• सोना मत खरीदो
• खाद का इस्तेमाल कम करो
• खाने वाले तेल का इस्तेमाल कम करो
कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि सारा बोझ जनता उठाए, ये बस 'प्रचारमंत्री' बने यहां-वहां घूमते रहें। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पहले ही इसकी चेतावानी दी थी, लेकिन मोदी ने इसके बाद भी तैयारी नहीं की। जब बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे देश तैयारियों में जुटे थे, तब हमारे राजा बाबू चुनाव-चुनाव खेल रहे थे। ये आपदा मोदी जनित है, जैसे कोविड के वक्त ये सुस्त पड़े रहे। इस बार भी इन्होंने वही काम किया है। अब मोदी की इस लापरवाही का खामियाजा देश और जनता को उठाना होगा।

आप के संजय सिंह का वायरल वीडियो

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर वीडियो जारी किया। वीडियो वायरल हो गया है। वीडियो जारी करते हुए संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा है- प्यारे देश वासियों, चुनाव तक मोदी जी ने आपका बोझ उठाया, चुनाव ख़त्म आपका इस्तेमाल ख़त्म। अब देशभक्ति के नाम पर लाइन में लग जाओ। गैस महँगी हो गई अब पेट्रोल डीज़ल भी मँहगा होगा। आप देश भक्ति के नाम पर पेट्रोल डीज़ल गैस का इस्तेमाल न करो, सोना न ख़रीदो, खाने के तेल का भी इस्तेमाल न करो। लेकिन मोदी जी अपनी रैलियों में लाखों लोगों को भर भर के लायेंगे विदेश यात्राएँ करेंगे खूब तेल फूकेंगे, उनके लोग सोना तो क्या पूरे देश की सम्पतियाँ ख़रीद लेंगे लेकिन आप फटीचर बने रहिए। और हाँ अगर आपने मोदी जी की मँहगाई बर्दाश्त नहीं की तो अंधभक्त और गोदी मीडिया आपको पाकिस्तानी घोषित कर देगा।

अखिलेश यादव का लंबा बयान, कहा- भाजपा ही संकट की जिम्मेदार

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मोदी सरकार और बीजेपी पर हमला किया है। अखिलेश ने एक्स पर लिखा-  चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया! दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’। इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पांच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है।
सपा प्रमुख ने कहा- सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए। क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक। वैसे सारी पाबंदियाँ चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या?
यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा- इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं। अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।

आरजेडी सांसद मनोज झा का बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्र से अपील पर आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा- "क्या ढाई महीने पहले कोई और प्रधानमंत्री था? या उन्हें अब जाकर एहसास हुआ है कि वे देश के प्रधानमंत्री हैं? 28 फरवरी से ही वैश्विक उथल-पुथल मची हुई है। प्रधानमंत्री बयानबाजी की सारी हदें पार कर रहे हैं। क्या वे पांच चुनाव खत्म होने का इंतजार कर रहे थे? इन ढाई से लगभग तीन महीनों में आपकी तरफ से किसी ने भी गंभीरता नहीं दिखाई। बल्कि, जब भी हममें से किसी ने सवाल उठाए, तो आप कहते थे, 'घबराहट मत फैलाओ'। यह स्थिति रातोंरात नहीं बनी..."

मोदी को विदेश यात्राएं बंद करना चाहिएः उदितराज

कांग्रेस के पूर्व सांसद उदितारज ने कहा कि "मैं पूरी तरह सहमत हूं। प्रधानमंत्री मोदी को विदेश यात्राएं छोड़ देनी चाहिए। लोग इससे सीखेंगे... आप बेवजह महंगे विमान से जब चाहें दूसरे देशों की यात्रा करते हैं... आपको घर से काम करना चाहिए। कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यालय नहीं छोड़ता था... आप रैलियों में जाते हैं, हजारों कारों पर तेल खर्च होता है... अपने कपड़ों की खरीदारी कम करें... आपको खुद एक आदर्श बनना चाहिए...।"

कार्ति और वेणुगोपाल के बयान

कार्ति चिदंबरम (कांग्रेस नेता) ने कहा कि पीएमओ से आए ये "बहुत गंभीर निर्देश" हैं। उन्होंने संसद को तुरंत बुलाने और सरकार से पूरे देश को सच्चाई बताने की मांग की। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार पर आरोप लगाया कि वैश्विक संकट के महीनों के बावजूद भारत के ऊर्जा हितों की सुरक्षा नहीं की गई। उन्होंने इसे "शर्मनाक, लापरवाह और अनैतिक" बताया कि पीएम आम नागरिकों पर बोझ डाल रहे हैं, जबकि अर्थव्यवस्था को संकट से बचाने में विफल रहे।
टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने पूछा कि क्या भारत विदेशी मुद्रा संकट या भुगतान संतुलन संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने पूछा, "अगर मंत्री एयर फोर्स के विमानों से उड़ान भरते रहेंगे और बड़े काफिलों में यात्रा करेंगे, तो सिर्फ नागरिकों से ही बलिदान क्यों मांगा जा रहा है?" उन्होंने चुनावों के बाद इस घोषणा के समय पर भी सवाल उठाया।

जनता भी बोल रही है

सोशल मीडिया पर लोग पीएम मोदी से उनके बयान पर सवाल उठा रहे हैं। गुस्सा जता रहे हैं। इनमें कुछ एक्टर, पत्रकार भी शामिल हैं। एक्स पर आए कुछ बयानों को पेश किया जा रहा है-
सोशल मीडिया पर मोदी के बयान की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। एक्स पर यूजर सदफ आफरीन ने लिखा है- RSS वाले मोहन भगवत जो न मंत्री हैं, न सांसद है, न विधायक है, न कभी कोई चुनाव लड़े, उनके काफिले में 30 से अधिक गाड़ियां थी! आज मोदी जी आम जनता को पेट्रोल और डीजल की बचत करने की सलाह दे रहे है, विदेश जाने से मना कर रहे है! अब देखते है, कितने मंत्री अपने काफिले में कितनी गाड़ियां लेकर निकलते है! वैसे क्या मोदी जी एक साल तक विदेश यात्रा नहीं करेंगे??