संसद परिसर में बुधवार को विपक्षी दलों के सांसदों ने सरकार के खिलाफ काले कपड़े पहनकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों के मुद्दों, लगातार हो रहे पेपर लीक और पुलिस की कार्रवाई के विरोध में विपक्षी नेताओं ने एकजुट होकर सरकार के रवैये पर सवाल उठाए।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने किया। इस बीच संसद में हंगामा तीसरे दिन भी जारी है। विपक्ष मांग कर रहा है कि सरकार छात्रों की बर्बर पिटाई के मामले में संसद में बयान दे। पीएम मोदी माफी मांगें।
विपक्ष का प्रदर्शन मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास (लोक कल्याण मार्ग) के बाहर कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई के मद्देनज़र हुआ है। मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया था, जिन्हें बाद में देर रात रिहा कर दिया गया।

तीसरे दिन भी स्थगन और हंगामा, सरकार कुछ पिघलती नज़र आई

बुधवार (22 जुलाई, 2026) को लगातार तीसरे दिन भी संसद के मॉनसून सत्र की कार्यवाही बार-बार स्थगित होने के कारण बाधित रही, क्योंकि विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग पर अड़ा हुआ है। जहां राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और जे.पी. नड्डा ने कहा कि सरकार NEET-UG पेपर लीक और अन्य मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है, वहीं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद में निष्पक्ष चर्चा के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पहले इस्तीफा देना होगा। इससे पहले आज, कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने लोकसभा में पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस की बर्बरता का मुद्दा उठाया और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उच्च सदन में यह मुद्दा उठाया।

कांग्रेस चर्चा के लिए नई शर्तें जोड़ रही हैः रिजिजू

रिजिजू का कहना है कि कांग्रेस अब संसद में चर्चा के लिए नई शर्तें जोड़ रही है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस पर अपनी बात से पलटने का आरोप लगाते हुए कहा कि शुरुआत में तो कांग्रेस पार्टी चर्चा चाहती थी, लेकिन अब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे बहस के लिए नई शर्तें जोड़ रहे हैं। DMK सांसद तिरुचि शिवा ने विपक्ष की मांगों पर बात करते हुए कहा कि अभी जो स्थिति बनी है, वह एक "दुर्लभ" मौका है और इस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। डिप्टी चेयरमैन हरिवंश सदन के सभी वरिष्ठ सदस्यों से अपील करते हैं कि वे कोई समाधान निकालें और सदन की कार्यवाही चलने दें। 

सरकार ने जंतर मंतर, पेपर लीक मुद्दे पर तीसरे दिन भी चर्चा नहीं होने दी

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में कई विपक्षी दलों ने नियम 267 के तहत एक नोटिस दिया है। इसमें 20 जुलाई, 2026 को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के मामले पर तत्काल चर्चा करने और सदन के सामान्य कामकाज को स्थगित करने की मांग की गई। लेकिन सरकार ने तीसरे दिन भी सदन में चर्चा नहीं होने दी।

मल्लिकार्जुन खड़गे का हमला

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा: "यह कोई लोकतांत्रिक सरकार नहीं है, बल्कि तानाशाही की तरह काम कर रही है। सरकार सांसदों का कोई सम्मान नहीं करती। अगर आप हमारे वरिष्ठ नेताओं और छात्रों को कुचलने की कोशिश करेंगे, तो देश के लाखों लोग खड़े हो जाएंगे और तब आप उन्हें नियंत्रित नहीं कर पाएंगे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस ने जो किया, उसके लिए सरकार को पछताना पड़ेगा। कांग्रेस पार्टी और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन पीछे हटने वाले नहीं हैं।"
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वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा- "देश का शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़ रुपये है, लेकिन सरकार अडानी और अंबानी का 16 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर रही है। छात्र अपने अधिकारों और वास्तविक बदलाव के लिए संघर्ष कर रहे हैं। देश में बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना पूरी तरह लोकतांत्रिक है, लेकिन छात्रों और संसद के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, वह पूरी तरह गैर-लोकतांत्रिक है।"
इस बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन दिल्ली में छात्रों के साथ हुए दुर्व्यवहार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद पर बने रहने की जिद और छात्र असंतोष पर सरकार के नकारात्मक रवैये के खिलाफ है।