नीट-यूजी (NEET-UG) पुनर्परीक्षा (21 जून) में इंडियन एयरफोर्स के प्रस्तावित इस्तेमाल को लेकर देश में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि आगामी परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और 'जीरो एरर' बनाने के लिए IAF के विमानों से पेपर्स को ट्रांसपोर्ट किया जाएगा। विपक्षी दलों ने सरकार पर जबरदस्त हमला किया है।
विपक्ष ने इसे सुरक्षा का नया पैमाना बताने के बजाय सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की प्रशासनिक नाकामी का सबसे बड़ा सुबूत करार दिया है।
शिवसेना (यूबीटी) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि एनटीए (राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी) और शिक्षा मंत्रालय की अक्षमता को छिपाने के लिए सेना का इस्तेमाल "शासन की विफलता" काी शर्मनाक स्वीकारोक्ति है।
राउत ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सेना देश की सीमाओं की रक्षा करती है, न कि एनटीए और शिक्षा मंत्रालय की अक्षमता को "कवर अप" करने के लिए। उन्होंने लिखा, "यह शासन विफलता की शर्मनाक स्वीकारोक्ति है। वर्षों से नीट पेपर लीक के कारण लाखों छात्रों के सपने चूर-चूर हो रहे हैं, अब सरकार वायुसेना से प्रश्न पत्र ढुलवाना चाहती है।"
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राउत ने आरोप लगाया कि दोषियों को सजा देने और सिस्टम को ठीक करने के बजाय केंद्र सरकार सेना को "बैंड-एड समाधान" के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पूछा, "मूलभूत परीक्षा लॉजिस्टिक्स के लिए रक्षा मंत्री को शिक्षा मंत्री के साथ बैठक की अध्यक्षता क्यों करनी पड़ रही है? यह एनटीए और शिक्षा मंत्रालय की अक्षमता को ही उजागर करता है।"
उन्होंने पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता व विश्वसनीयता बहाल करने के लिए सुधारों की अपील की। राउत ने कहा, "वास्तविक जवाबदेह लोगों की जानकारी छात्रों को मिलना चाहिए।" इसी पार्टी की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर 'क्रोनोलॉजी' समझाते हुए तंज कसा: "अगली बार आंसर शीट को परीक्षा केंद्रों से उठाने और सर्वर पर अपलोड करने के लिए नौसेना की सबमरीन (पनडुब्बियों) का इस्तेमाल कर लीजिए। जय हो सरकार!"
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इसे सरकार की नीति को पूरी तरह प्रशासनिक तंत्र की विफलता बताया गया है। उनका मानना है कि यदि देश की एक सामान्य प्रवेश परीक्षा कराने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ रही है, तो यह स्पष्ट करता है कि सरकार की अपनी सिविल एजेंसियां (जैसे NTA) और लॉजिस्टिक्स सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस कदम को एक 'दिखावा' और 'मूल समस्या से ध्यान भटकाने वाला' बताया है। पार्टी का कहना है कि सरकार बुनियादी सुधार और डेटा सुरक्षा को मजबूत करने के बजाय केवल बाहरी सुरक्षा का तमाशा कर रही है।

नीट के घटनाक्रम

  • नीट-यूजी परीक्षा 3 मई को भारत के 551 शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर आयोजित की गई थी।
  • लगभग 23 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था।
  • 12 मई को पेपर लीक की शिकायतों के बीच एनटीए ने परीक्षा रद्द कर दी।
  • री-एग्जाम 21 जून को प्रस्तावित है।
  • सरकार अब नीट पुनर्परीक्षा के पेपर्स इंडियन एयरफोर्स से भेजने की तैयारी कर रही है।

सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। पूरे देश में छापेमारी की गई है। अब तक 13 आरोपियों को दिल्ली, जयपुर, गुड़गांव, नासिक, पुणे, लातूर और अहमदनगर से गिरफ्तार किया जा चुका है।
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21 जून को होने वाले नीट-यूजी री-एग्जाम को फुलप्रूफ बनाने के लिए भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के जरिए परीक्षा प्रश्न पत्रों के परिवहन का विकल्प तलाशा जा रहा है। इस प्रस्ताव पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय बैठक हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल थे। हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।