लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण से दूर रहने के लिए आलोचनाएँ झेल रहे प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। लेकिन हंगामे के बीच। विपक्ष के सांसदों ने जोरदार नारेबाजी की। वे लगातार 'विपक्ष के नेता को बोलने दो' और 'तानाशाही नहीं चलेगी' जैसे नारे लगा रहे थे।

पीएम के भाषण के दौरान हंगामे के बीच कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल सदन से वॉकआउट कर गए। यह सब तब हुआ जब राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने न देने का मुद्दा उठाया। खड़गे पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ हिस्सों का हवाला देना चाहते थे, लेकिन सदन के अध्यक्ष ने इसे रोक दिया। इससे पहले लोकसभा में भी राहुल उस किताब की कुछ लाइनों को पढ़ना चाहते थे, लेकिन उनको ऐसा नहीं करने दिया गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी इससे डर गये क्योंकि 'उनकी पोल खुल जाती'।

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने न दिए जाने से जुड़ा है। राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी से कुछ हिस्सों को उद्धृत करना चाहते थे। किताब में 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद पर बात है। राहुल का कहना है कि यह हिस्सा राष्ट्रीय हित में है, क्योंकि इसमें सरकार की ओर से निर्णायक कार्रवाई न करने का ज़िक्र है।

लेकिन लोकसभा स्पीकर ने संसदीय नियमों का हवाला देकर राहुल को ये उद्धरण पढ़ने से रोक दिया। नियम कहते हैं कि किसी दस्तावेज़ या किताब से उद्धरण देने के लिए उसे प्रमाणित करना पड़ता है, यानी सही होने की पुष्टि के साथ हस्ताक्षरित कॉपी जमा करनी होती है। किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए इसे अप्रमाणित माना गया। पिछले तीन दिनों से लोकसभा में इसी वजह से बार-बार सदन स्थगित हुआ और बहुत कम काम हो पाया।

विपक्ष का कहना है कि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष को बोलने का हक है, और अगर उन्हें रोका जा रहा है तो संसद ठीक से नहीं चल रही। राज्यसभा में खड़गे ने कहा, 'संसद में लोकसभा और राज्यसभा दोनों शामिल हैं। लोकसभा के विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जा रहा, तो सदन कैसे चलेगा?' भाजपा ने इसका विरोध किया और कहा कि लोकसभा की बातें राज्यसभा में नहीं उठाई जा सकतीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में जारी रखा, लेकिन विपक्ष की नारेबाजी के बीच। पीएम ने मल्लिकार्जुन खड़गे पर तंज कसा और कहा कि उनकी उम्र को देखते हुए वे बैठे-बैठे भी नारे लगा सकते हैं।

विपक्ष ने वॉकआउट करके विरोध जताया कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाई नहीं जा सकती। कांग्रेस, टीएमसी, आप, सीपीआई जैसे विपक्षी दलों ने साथ में यह कदम उठाया।
राज्यसभा में भी विपक्ष ने सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। खड़गे ने कहा कि संसद लोकसभा और राज्यसभा दोनों से मिलकर बनती है। अगर एक सदन में लोकसभा के विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता, तो लोकतंत्र की भावना का अपमान होता है। विपक्ष का कहना है कि सरकार अपनी गलतियों को छिपाने के लिए राहुल गांधी को बोलने से रोक रही है।

यह विवाद तब और गहरा गया जब राहुल गांधी ने लोकसभा में किताब की कॉपी दिखाई और कहा कि सरकार कहती है किताब है ही नहीं, लेकिन देखिए यह है। किताब अभी सेना और विदेश मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है, इसलिए प्रकाशित नहीं हुई। संसद का यह बजट सत्र लगातार बाधित हो रहा है। विपक्ष का कहना है कि वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि विपक्ष सदन नहीं चलने दे रहा।