पहलगाम हमले की पहली बरसी पर कांग्रेस सासंद जयराम रमेश ने मोदी सरकार की विदेश नीति की विफलता का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि पाकिस्तान ने वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा वापस हासिल कर ली है। दूसरी तरफ पीएम मोदी ने भी पहलगाम को याद किया।
कांग्रेस ने बुधवार 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर मोदी सरकार की विदेश नीति को पूरी तरह विफल करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि 2008 के मुंबई हमलों के बाद एक बार पूरी तरह अलग-थलग पड़े पाकिस्तान को अब वैश्विक सम्मान मिल रहा है। कांग्रेस ने सरकार से विदेश नीति पर फिर से विचार की मांग की, लेकिन साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा करने वाले नहीं हैं।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "22 अप्रैल हमेशा हर भारतीय के लिए दर्द और पीड़ा का दिन रहेगा। ठीक एक साल पहले पाकिस्तान द्वारा संचालित आतंकी हमला पहलगाम में हुआ था। हम शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। हम उस बहादुर स्थानीय पोनीवाले युवक को भी याद करते हैं, जिसे एक पर्यटक को बचाने की कोशिश करते हुए गोली मार दी गई।"
जयराम रमेश ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने स्वीकार किया था कि यह खुफिया विफलता थी। उन्होंने कहा, "इस स्वीकारोक्ति पर क्या कार्रवाई हुई, यह स्पष्ट नहीं है, हालांकि कुछ महीने बाद हमलावरों को न्याय के कटघरे में लाया गया।"
जयराम रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया था। उन्होंने पाकिस्तान की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा, "इसकी अर्थव्यवस्था अभी भी चरमरा रही है और बाहरी दानदाताओं की मेहरबानी पर टिकी हुई है। अलगाववादी आंदोलन उसके राजनीतिक और सामाजिक ढांचे में गहरे जड़ जमा चुके हैं। उसके नेता, राजनीतिक दल पूरी तरह ठप हो गए हैं और वहां सेना ही फैसले करती है।"
कांग्रेस के संचार प्रभारी रमेश ने आरोप लगाया कि हमले से कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के आर्मी चीफ द्वारा सांप्रदायिक और भड़काऊ बयान देने वाले इस विफल राज्य को आज नया वैश्विक सम्मान मिल रहा है। उन्होंने कहा, "यह प्रधानमंत्री की विदेश नीति की पूरी विफलता और उनके कूटनीतिक जुड़ाव की आत्म-प्रशंसात्मक शैली को बताता है।"
जयराम रमेश ने सवाल किया, "क्या वो विदेश नीति को रीसेट करेंगे? बिल्कुल नहीं। ज्यादातर लोगों को यकीन नहीं।"
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन घाटी में लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया था। इस हमले में 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर देश के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यटक थे। हमले में एक स्थानीय मुस्लिम पोनीवाला सैयद अदिल हुसैन शाह भी शहीद हुए, जिन्होंने पर्यटकों को बचाने की कोशिश में आतंकवादी के राइफल छीनने का साहसिक प्रयास किया था।
हमले के बाद भारत ने जवाबी सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर शुरू की, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सैन्य तथा आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। लेकिन यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम करा दिया। इसकी घोषणा भी ट्रंप ने पहले की और भारत ने बाद में। हालांकि भारत का आजतक यही दावा है कि युद्धविराम में किसी तीसरे देश ने दखल नहीं दिया। लेकिन ट्रंप अब तक 100 से ज्यादा बार दोहरा चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्धविराम कराया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी पहलगाम याद किया
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर एक पोस्ट में शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा:"पहलगाम आतंकी हमले में इस दिन एक साल पहले खोए निर्दोष जिंदगियों को याद करते हुए। वे कभी नहीं भुलाए जाएंगे। मेरे विचार उन शोक संतप्त परिवारों के साथ भी हैं, जो इस नुकसान से जूझ रहे हैं। एक राष्ट्र के रूप में, हम दुख और संकल्प में एकजुट हैं। भारत किसी भी प्रकार के आतंकवाद के सामने कभी नहीं झुकेगा। आतंकवादियों की घृणित साजिशें कभी सफल नहीं होंगी।"
कांग्रेस के आरोपों और प्रधानमंत्री के संदेश के बीच आज पूरे देश में सवाल हो रहा है कि आखिर पाकिस्तान को पूरी दुनिया में अचानक इतना भाव क्यों मिल रहा है। जबकि अमेरिका भारत से भी दोस्ती का दम भरता है।