जब तक कोई नया अध्यक्ष नहीं चुना जाता, सबसे वरिष्ठ लोकसभा सांसद को अस्थायी अध्यक्ष चुना जाता है। इसके लिए, लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में उनके कार्यकाल के संदर्भ में सांसदों की वरिष्ठता के मद्देनजर फैसला लिया जाता है। प्रोटेम स्पीकर लोकसभा के पहले कुछ सत्रों की अध्यक्षता करता है और नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए मतदान कराता है। सरकार ने पहले ही भृर्तहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त कर दिया है। महताब बीजेडी में थे और अब भाजपा से इस बार जीते हैं। वो सात बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। लेकिन अगर वरिष्ठता पैमाना होता तो सरकार और भाजपा इंसाफ करते हैं। कांग्रेस के सांसद डी. सुरेश 8 बार जीतकर लोकसभा आ चुके हैं। लेकिन कांग्रेसी होने की वजह से सरकार ने उनकी वरिष्ठता को नजरन्दाज कर दिया।