संसद के बचे हुए हिस्से के बजट सत्र की शुरुआत सोमवार 9 मार्च को हुई। लेकिन विपक्ष के हंगामे के बीच संसद बार-बार स्थगित होती रही। विदेश मंत्री एस जयशंकर जियो पॉलिटिक्स पर बोलने खड़े हुए तो हंगामा हुआ। संसद परिसर में विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया।
संसद परिसर में विभिन्न मुद्दों पर प्रदर्शन करते विपक्षी दल
संसद परिसर में विपक्षी INDIA गठबंधन के सांसदों ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता तथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया। संसद के दोनों सदनों में भी इस मुद्दे पर हंगामा हुआ। विपक्ष ने इस पर चर्चा की मांग की लेकिन सरकार विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान देने पर अड़ी रही। दोनों सदन कई बार स्थगित हुए।
प्रदर्शनकारी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर एक बड़ा बैनर लहराया, जिस पर लिखा था: "गल्फ जल रहा है, तेल का झटका। भारतीय फंसे हुए। भारत को नेतृत्व चाहिए - चुप्पी नहीं।" विपक्षी सांसदों ने नारे लगाते हुए सरकार से पश्चिम एशिया की स्थिति पर तत्काल चर्चा की मांग की और तेल-गैस सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई।
राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर बयान दिया, लेकिन विपक्षी सांसदों द्वारा नारे लगाए जाने के बीच कोई सवाल या स्पष्टीकरण की अनुमति नहीं दी गई। विपक्ष ने तत्काल चर्चा की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद विरोध प्रदर्शन के बाद सभी विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, "जैसा उम्मीद थी, विदेश मंत्री ने राज्यसभा में स्वत: संज्ञान बयान दिया, जिसमें कोई सवाल नहीं पूछा जा सकता या स्पष्टीकरण नहीं मांगा जा सकता। पूरा विपक्ष पश्चिम एशियाई स्थिति पर तत्काल चर्चा चाहता था। इसे अस्वीकार कर दिया गया, इसलिए विरोध के बाद विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट किया।"
मल्लिकार्जुन खरगे ने मांग की कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर उभरती चुनौतियों पर अल्पकालिक चर्चा हो। उन्होंने कहा, "यह संघर्ष केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है; इसने अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा और देश की छवि को प्रभावित किया है। इस संघर्ष के परिणाम हमारी आर्थिक स्थिरता पर भी असर डालेंगे।" उन्होंने खाना बनाने के गैस की कीमतों में वृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर प्रभाव का जिक्र किया।
जयशंकर ने राज्यसभा में कहा, "प्रधानमंत्री स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और संबंधित मंत्रालय प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं।"इसके अलावा, निलंबित सांसदों ने भी संसद परिसर में अलग से विरोध किया और एक बैनर लहराया जिस पर लिखा था: "विपक्ष को चुप कराना लोकतंत्र की हत्या के समान है।"
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया का संघर्ष भारत के लिए तेल आपूर्ति, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आर्थिक प्रभाव के कारण गंभीर चिंता का विषय बन गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है और संसद में ठोस चर्चा से बच रही है।
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका-इसराइल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया। ईरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई और शासन के कई प्रमुख सदस्यों की हत्या कर दी गई। ईरान ने भी खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों और इसराइल पर जवाबी हमले किए। ईरान पर थोपे गए युद्ध का विश्व अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। भारत पर भी इसका असर हुआ है।