पासपोर्ट वाले विदेश मंत्रालय के बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने कहा 'MEA और कितना बेतुका' साबित होगा? जावेद अख्तर ने पूछा कि बिना भारतीय नागरिकता जाँच के क्या यह 'यात्रा दस्तावेज' जारी होता है?
सरकार ने कह दिया है पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है और यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है। विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। लोगों ने पूछा कि क्या यह 'यात्रा दस्तावेज' विदेशियों को भी जारी होता है? शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने कहा- 'MEA और कितना बेतुका' साबित होगा? जावेद अख्तर ने पूछा कि बिना भारतीय नागरिकता जाँच के क्या यह 'यात्रा दस्तावेज' जारी होता है? किसी ने कहा कि जब यह नागरिकता का प्रमाण ही नहीं है तो फिर पुलिस का इतना सख़्त वेरिफिकेशन क्यों?
कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज कौन सा है? विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने क्या क्या सवाल किए, क्या तंज कसे, यह जानने से पहले विदेश मंत्रालय के बयान को जान लीजिए कि उसने क्या कहा है।
MEA का पासपोर्ट पर बयान
विदेश मंत्रालय ने 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर देश में पासपोर्ट सेवाओं के विस्तार और उपलब्धियों की जानकारी साझा की। इसी दौरान मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाने के लिए जारी किया जाने वाला सरकारी दस्तावेज है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का ठोस प्रमाण नहीं है। मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य विदेश यात्रा की अनुमति देना है, न कि नागरिकता निर्धारित करना।
पासपोर्ट पर आए विदेश मंत्रालय के इस ताज़ा बयान से पहले इस साल की शुरुआत में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न यानी एसआईआर पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है, बल्कि यह सिर्फ़ पहचान का एक दस्तावेज़ है। इन बयानों के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछना शुरू कर दिया कि 'पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, आधार भी नहीं, वोटर आईडी भी नहीं, पैन भी नहीं... तो फिर नागरिकता के लिए कौन सा दस्तावेज दिखाएँ'। 'MEA कितना बेतुका होगा'
शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि विदेश मंत्रालय और कितना बेतुका साबित होगा? उन्होंने एक्स पर लिखा, 'अगर MEA का मानना है कि पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज़ नहीं है, तो:
1) पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस किस चीज़ की जाँच करती है?
2) क्या हमारा देश गैर-भारतीयों को भी यात्रा दस्तावेज़ के तौर पर पासपोर्ट देता है?
3) क्या इस घोषणा से दूसरे देशों के मन में यह शक पैदा नहीं होगा कि क्या गैर-भारतीयों को भी यात्रा दस्तावेज़ के तौर पर भारतीय पासपोर्ट मिलता है?
अपनी बहुत उलझी हुई विदेश नीति के अलावा, विदेश मंत्रालय और कितना बेतुका हो सकता है?"बेतुकी बात: जावेद अख्तर
प्रसिद्ध गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज है तो क्या बिना नागरिकता की जांच किए किसी को भी पासपोर्ट जारी कर दिया जाता है? उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट यात्रा के लिए एक दस्तावेज़ है, न कि नागरिकता का सबूत। सच में? तो क्या वे कुछ लोगों को यह यात्रा दस्तावेज़ इसलिए दे रहे हैं क्योंकि उन्हें पूरा यकीन नहीं है कि वे भारतीय नागरिक हैं? यह बात बेतुकी है।' पत्रकार रोहिणी सिंह ने लिखा, 'तो क्या जो भारत के नागरिक नहीं हैं, उन्हें भी भारतीय पासपोर्ट मिल सकता है?'
वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने लिखा, 'आधार नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है। पासपोर्ट नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है। लेकिन इन दोनों के माध्यम से देश में हर दस्तावेज बना सकते हैं। हर दस्तावेज। अजब सिस्टम की ग़ज़ब कहानी!'
सरकार का तर्क क्या है?
कानूनी जानकारों के अनुसार किसी व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने से पहले उसकी नागरिकता की जांच ज़रूर की जाती है। लेकिन पासपोर्ट का उद्देश्य नागरिकता साबित करना नहीं बल्कि यात्रा की अनुमति देना होता है। यही कारण है कि कानून की नजर में पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज पहचान और अन्य प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन नागरिकता साबित करने के लिए अलग कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।दिलचस्प बात यह है कि भारतीय पासपोर्ट के पीछे स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि यह 'भारत सरकार की संपत्ति' है और सरकार के आदेश पर इसे वापस किया जा सकता है।
आधार और वोटर आईडी भी नहीं हैं प्रमाण
नागरिकता को लेकर यह बहस नई नहीं है। हाल ही में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि आधार कार्ड नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है। इसी तरह वोटर आईडी कार्ड भी मुख्य रूप से पहचान और निवास का दस्तावेज माना जाता है। यह केवल मतदान का अधिकार देता है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।
नागरिकता कैसे तय होती है?
भारतीय नागरिकता कानून के अनुसार 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाला व्यक्ति जन्म से भारतीय नागरिक माना जाता है। इस दौरान माता-पिता की राष्ट्रीयता कोई मायने नहीं रखती थी। यानी माता-पिता विदेशी भी हों, तो भी बच्चा भारत में जन्म लेने पर भारतीय नागरिक होता था।
लेकिन 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे व्यक्ति को नागरिकता तभी मिलेगी जब उसके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो। 3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्ति को तभी नागरिक माना जाएगा जब दोनों माता-पिता भारतीय हों या एक भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। यानी नागरिकता का निर्धारण संविधान और नागरिकता कानून के प्रावधानों के आधार पर किया जाता है।
पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, इसलिए व्यावहारिक रूप से सरकारी कामों, विदेश यात्रा, बैंक, वीजा आदि में इसे नागरिकता के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाता है। कई विशेषज्ञ इसे नागरिकता का 'सबसे मज़बूत दस्तावेजी सबूत' कहते हैं। लेकिन कानूनी स्थिति यह है कि पासपोर्ट 'मान लिया जाने वाला प्रमाण' है, पक्का सबूत नहीं। 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी एक फ़ैसले में कहा था कि पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या या आधार अकेले पर्याप्त नहीं हो सकते, जब तक माता-पिता की नागरिकता साबित न हो।
बहस का केंद्र क्या है?
विवाद का मुख्य कारण यह है कि सरकार एक तरफ़ कहती है कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ़ उसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण मानने से इंकार करती है।
क़ानूनी रूप से सरकार का तर्क चाहे जैसे भी हों, लेकिन आम लोगों के लिए यह सवाल अब भी बना हुआ है कि यदि पासपोर्ट, आधार और वोटर आईडी तीनों ही नागरिकता के अंतिम प्रमाण नहीं हैं तो आम नागरिक अपनी नागरिकता साबित करने के लिए किस दस्तावेज पर भरोसा करे। इसी सवाल ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है।