पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर प्रोटेस्ट पर भारी दबाव के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को परीक्षा सुधार टास्क फोर्स की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि इस हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का नेतृत्व इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी करेंगे। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी एनटीए और देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए सुझाव देगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, वे अब जेल में हैं। सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए दीर्घकालिक सुधारों पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई टास्क फोर्स जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और सरकार उसकी सिफारिशों के आधार पर आगामी परीक्षाओं की व्यवस्था को मजबूत करेगी।

'NTA में बड़े सुधार होंगे'

सरकार के अनुसार यह हाई-पावर्ड टास्क फोर्स विशेष रूप से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की परीक्षा प्रणाली में सुधार पर काम करेगी। इस समिति का उद्देश्य केवल तकनीकी सुधार करना नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया की संरचना, सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता से जुड़े व्यापक बदलावों की भी सिफारिश करना होगा।
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सरकार ने इस समिति में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया है।

समिति के सदस्य

  • इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी (अध्यक्ष)
  • पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ
  • पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका
  • IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी
  • पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल
  • लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा
सरकार का कहना है कि यह बहु-विषयक विशेषज्ञ समूह परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए सुझाव देगा। यह घोषणा तब हुई है जब जंतर-मंतर से शुरू हुए छात्र आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है और सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए दबाव में है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अगले दिन हुई घोषणा

यह टास्क फोर्स ऐसे समय बनाई गई है जब एक दिन पहले ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। पिछले कई सप्ताह से देशभर में कथित पेपर लीक के विरोध में छात्र आंदोलन चल रहा था। जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन बाद में कई राज्यों तक फैल गया।

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज हो गया था। इसके बाद कई छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया।

नया एंटी-चीटिंग कानून भी लाएगी सरकार

सरकार केवल परीक्षा सुधार समिति तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। इसके साथ ही केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 भी पेश करने जा रही है। इस संशोधन का उद्देश्य परीक्षा में होने वाली धांधली और संगठित पेपर लीक पर और कड़ी कार्रवाई करना है।
सरकार के प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान होगा। जांच और मुकदमों को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी। संगठित परीक्षा माफिया के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन सुधारों का मक़सद केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के लाखों छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। टास्क फोर्स की रिपोर्ट आने के बाद परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लागू किए जाएंगे, ताकि भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।