प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कांग्रेस पर सरकार को जवाबदेह बनाने और व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले आंदोलनों को कमजोर करने का आरोप लगाया। एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में गुरुवार शाम को बोलते हुए मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की कमियों को उजागर करने और व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले आंदोलन जरूरी हैं, लेकिन कांग्रेस ऐसे आंदोलनों को भी कमजोर कर देती है। उन्होंने संसद की कार्यवाही बाधित करने के लिए भी कांग्रेस की आलोचना की और दावा किया कि पार्टी के दिमाग पर ‘दिमागी नक्सलियों’ ने कब्जा कर लिया है। मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में शुक्रवार 23 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आय़ुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन होने वाले हैं।
मोदी ने कहा, “ऐसे आंदोलन, जिनका स्वाभाविक उद्देश्य सरकार की कमियों को उजागर करना और व्यवस्था में सुधार लाना होता है, लोकतंत्र में जरूरी हैं। लेकिन कांग्रेस इन आंदोलनों को भी नष्ट कर देती है। वह एक ऐसे परजीवी की तरह बन गई है, जो नहीं चाहती कि कोई दूसरा आगे बढ़े।”
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि “दिमागी नक्सलियों ने कांग्रेस के दिमाग पर इस हद तक कब्जा कर लिया है कि पार्टी ने खुद सोचने की क्षमता खो दी है। जो लोग कभी जंगलों में विनाश करते थे, वे अब कांग्रेस में घुसपैठ कर रहे हैं और देश को पूरी तरह बर्बाद करने में लगे हैं।” मोदी ने कांग्रेस पर विपक्ष के युवा नेताओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस दूसरों को मौका नहीं देती। वह केवल एक व्यक्ति को सुर्खियों में बनाए रखना चाहती है और विपक्ष के युवा नेताओं की आवाज नहीं सुनती।”
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प्रधानमंत्री की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब दिल्ली में मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार पर लगाई जा रही पाबंदियों को लेकर लगातार आंदोलन हो रहे हैं।

कांग्रेस पर मोदी का तंज- ‘अंगूर खट्टे हैं’

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के नेतृत्व को आगे बढ़ाने की कोशिशों का मजाक उड़ाते हुए उसकी तुलना श्रीहरिकोटा से होने वाले रॉकेट प्रक्षेपणों से की। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि कांग्रेस अपने असफल उत्पाद को लॉन्च करने के लिए देश के हितों को कितने समय तक दांव पर लगाती रहेगी। एक साल में श्रीहरिकोटा से उतने प्रक्षेपण नहीं होते, जितनी बार कांग्रेस अपने नेता को लॉन्च करने की असफल कोशिश करती है।”
मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने नेतृत्व को बचाने के लिए देश की प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगा रही है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस अपने पतन के रास्ते पर चलती रह सकती है, हमें इससे कोई समस्या नहीं है। लेकिन अपनी बार-बार की विफलताओं से परिवार को बचाने के लिए वह देश की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा रही है। अंगूर इतने खट्टे हो गए हैं कि कांग्रेस उसी बेल को काटने की कोशिश कर रही है, जिस पर वे अंगूर लगे हैं।”

ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रदर्शन

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस महीने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
6 अक्टूबर को राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के कई नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और एसआईआर प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे। पुलिस ने मार्च को रोक दिया। बैरिकेड के पास पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के बाद विपक्ष के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी पुलिस के बैरिकेड पर चढ़ गए। उनके हाथ में एक तख्ती थी, जिस पर लिखा था, “ज्ञानेश, अब बस करो भाई!” बाद में उन्होंने यही संदेश सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी साझा किया और लिखा, “अब इस्तीफा देने का समय आ गया है।”

12 अक्टूबर को राहुल गांधी ने ‘इंडिया’ गठबंधन के एक और प्रदर्शन का नेतृत्व किया। इसे ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ नाम दिया गया था। प्रदर्शनकारी सर्वोच्च न्यायालय की ओर मार्च कर रहे थे। इस मार्च में प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और विपक्ष के अन्य नेता भी शामिल हुए। ये प्रदर्शन विपक्ष के ‘वोट चोरी’ अभियान का हिस्सा हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है।

SIR के खिलाफ छात्र संगठनों का प्रदर्शन

दिल्ली में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) सहित विभिन्न छात्र समूहों और युवा संगठनों ने भी एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं।प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया के कारण 13 करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा सकते हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के जुटने पर रोक, दूसरे स्थानों पर विरोध

10 अक्टूबर को पुलिस ने जंतर-मंतर पर बैरिकेडिंग कर दी। इसके बाद सिटिजन जर्नलिस्ट्स प्रोटेस्ट (सीजेपी) और छात्र संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों को कनॉट प्लेस और राजघाट सहित दूसरे स्थानों पर जुटना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को घसीटा तथा हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में हटाए जाने और ऐसे वैकल्पिक स्थानों पर प्रदर्शन करने की व्यवस्था का भी विरोध कर रहे थे, जहां आयोजन के लिए पहले से बुकिंग करानी पड़ती है और शुल्क देना होता है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) और इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) ने भी प्रदर्शन किए। इन संगठनों ने निर्वाचन आयोग से जवाबदेही तय करने और नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने की मांग की।