प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन 17 सितंबर को देशभर में बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है। इस बार जन्मदिन को प्रधानमंत्री के 25 साल के सार्वजनिक जीवन से भी जोड़ा गया है। बीजेपी ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक महीने भर चलने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ की योजना बनाई है। लेकिन इस पूरे आयोजन का एक अहम पहलू राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। क्या प्रधानमंत्री के जन्मदिन को सरकारी कार्यक्रमों के साथ इस तरह जोड़ना उचित है और इन आयोजनों का खर्च किस मद से हो रहा है?
इस साल कई बीजेपी शासित राज्यों में प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सरकारी स्तर पर कार्यक्रमों की घोषणा हुई है। दिल्ली सरकार ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने की घोषणा की है। इसमें रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर, श्रमिक पंजीकरण, स्वच्छता और पौधारोपण जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। दिल्ली सरकार के मुताबिक इस दौरान करीब 13,820 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास भी किया जाना है। 17 सितंबर को दिल्ली में 1.25 लाख दीये जलाने, मेगा ब्लड डोनेशन कैंप, 108-कुंड यज्ञ और ‘नमो श्रमिक सेवा केंद्र’ शुरू करने जैसे कार्यक्रम भी रखे गए हैं।

गुजरात में इस साल भी 14 करोड़ का खर्च?

गुजरात में मोदी के जन्मदिन पर ‘विकास सप्ताह’ हर साल 7 से 15 अक्टूबर के बीच आयोजित किया जाता है। इस साल भी गुजरात सरकार बड़े पैमाने पर आयोजन कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पीएम मोदी के गृह नगर वड नगर में शर्मिष्ठा झील के किनारे महाआरती करने पहुंचे हैं। मोदी के पैतृक गांव में भी सेवा संकल्प अभियान हो रहा है, जहां डमरू की थाप और शंख की ध्वनि के बीच यह समारोह पूरा हुआ। न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के 24 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित नौ दिवसीय ‘विकास सप्ताह’ (Vikas Saptah) पर राज्य सरकार ने 14.05 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
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2024 में विज्ञापनों पर खर्च हुए थे 8.81 करोड़

मोदी के सार्वजनिक जीवन के वर्षों को सरकारी प्रचार अभियान से जोड़ने का यह पहला मामला नहीं है। 2024 में मोदी के सार्वजनिक जीवन के 23 वर्ष पूरे होने के मौके पर गुजरात सरकार ने विज्ञापन अभियान चलाया था। बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में गुजरात सरकार के सूचना विभाग ने बताया कि इस अभियान पर 8.81 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस राशि से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया में विज्ञापन दिए गए थे। इनमें एक विज्ञापन का शीर्षक ‘23 Years of Successful and Capable Leadership’ था, जिसमें मोदी के सार्वजनिक जीवन के 23 वर्ष पूरे होने पर उन्हें बधाई दी गई थी।

‘GST बचत उत्सव’ पर भी 22 करोड़ रुपये का विज्ञापन खर्च

सरकारी प्रचार का यह सिलसिला सिर्फ मोदी के जन्मदिन या राजनीतिक वर्षगांठ तक सीमित नहीं है। GST दरों में बदलाव के बाद केंद्र सरकार ने ‘GST बचत उत्सव’ नाम से 4 सितंबर से 28 अक्टूबर 2025 तक अभियान चलाया था। राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इस अभियान के विज्ञापनों पर 22 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसी तरह पहले ‘9 साल–सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण’ अभियान चलाया गया था। प्रधानमंत्री के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 100वें एपिसोड को लेकर भी देश और विदेश में कार्यक्रम तथा प्रचार अभियान हुए। आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना और जनधन खातों जैसी योजनाओं की वर्षगांठ पर भी विज्ञापन अभियान चलाए जाते रहे हैं।

गुजरात में 2025 में प्रचार पर 108.80 करोड़ रुपये

गुजरात सरकार के सूचना एवं प्रसारण विभाग ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त होने वाले वर्ष में 108.80 करोड़ रुपये प्रचार पर खर्च किए थे। विधानसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक, यह राशि प्रिंट, डिजिटल और सोशल मीडिया प्रचार पर खर्च हुई। इसका औसत लगभग 29.8 लाख रुपये प्रतिदिन बैठता है। 
यह जानकारी कांग्रेस विधायक डॉ. किरीटकुमार चिमनलाल पटेल के सवाल के जवाब में दी गई थी। ‘विकास सप्ताह’ पर खर्च किए गए 14.05 करोड़ रुपये इसी बड़े प्रचार खर्च का हिस्सा थे। हालांकि विधानसभा के जवाब में 108.80 करोड़ रुपये के खर्च का माध्यमवार अलग-अलग ब्योरा नहीं दिया गया।

मोदी-योगी में विज्ञापन खर्च का मुकाबलाः नरेंद्र मोदी सरकार ने 2014-15 से 2024-25 के बीच विज्ञापनों पर 5,987 करोड़ रुपये खर्च किए। इसी अवधि में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा सरकारी विज्ञापनों पर 6,811.94 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया है। उत्तराखंड में पांच वित्तीय वर्षों में सरकारी विज्ञापन खर्च 1,001 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

हरियाणा के रोहतक स्थित सरकारी पीजीआईएमएस में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर लगभग 10 हजार दीये जलाने की तैयारी की खबर सामने आई है। संस्थान के अनुसार कार्यक्रम में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के शामिल होने की योजना है। यानी विवाद केवल बीजेपी के पार्टी कार्यालयों में होने वाले कार्यक्रमों का नहीं है। सवाल उस स्थिति पर उठ रहा है जब सरकारी संस्थान और सरकारी कर्मचारी भी प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े आयोजनों का हिस्सा बनते दिखाई देते हैं।

तेजस्वी यादव का सवाल- बाढ़ पीड़ितों के लिए पैसा नहीं, जन्मदिन पर दीये?

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने 16 सितंबर को बिहार की बाढ़ का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर होने वाले दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रमों पर सवाल उठाया। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीये जलाने के लिए पैसा खर्च किया जा रहा है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब बिहार के 15 जिलों में लगभग 50 लाख लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने की रिपोर्ट थी।

बीजेपी का तर्क क्या है?

सरकार और बीजेपी इन कार्यक्रमों को प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत जन्मदिन के बजाय ‘सेवा’ और जनकल्याण के अभियान के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। बीजेपी के अनुसार ‘सेवा पखवाड़ा’ की शुरुआत मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हुई और इसके तहत सफाई अभियान, स्वास्थ्य एवं कल्याण योजनाएं और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 2026 में इसे मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन से भी जोड़ा गया है। बीजेपी की योजना में देशभर में सेवा गतिविधियां, जनसंपर्क, दीप प्रज्ज्वलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और दूसरे आयोजन शामिल हैं। इस लिहाज से सरकार का पक्ष यह है कि जन्मदिन केवल व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि ‘सेवा’ को समर्पित अभियान का अवसर है। लेकिन यहीं से विपक्ष का सवाल शुरू होता है। सरकारी आयोजन किसी प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर कैसे हो सकता है।

क्या पहले प्रधानमंत्रियों के जन्मदिन मनाए जाते थे?

देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और डॉ मनमोहन सिंह तक कभी भी उनके जन्मदिन सरकारी तौर पर नहीं मनाये गये। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्रियों की जयंती/जन्मदिन पर सरकारी संस्थानों में श्रद्धांजलि और पुष्पांजलि कार्यक्रम जरूर होते रहे हैं। लेकिन मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनका जन्मदिन इस तरह मनाया जा रहा है। दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि बीजेपी शासित राज्यों में वहां के मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से ऐसे कार्यक्रमों का सरकारीकरण कर रहे हैं। तमाम राज्यों में स्कूल टीचरों से कहा गया है कि वे स्कूल के बच्चों के वीडियो बनाकर पोस्ट करें, जिनमें मोदी की तारीफ होना चाहिए।