प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 अप्रैल, 2026 को रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। इससे पहले कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी ने विपक्ष पर जमकर हमला किया और महिलाओं के खिलाफ विपक्ष के रुख को एक "गलती" बताया, जिसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह
131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने पर पीएम मोदी अब विपक्ष को चुनौती देने जा रहे हैं। मोदी आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। उनका यह संबोधन लोकसभा में 17 अप्रैल को विधेयक पर पराजित होने के एक दिन बाद होगा। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सूचना जारी कर दी गई है।
शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महिलाओं के आरक्षण विधेयक को समर्थन न देकर विपक्ष ने महिलाओं के खिलाफ काम किया है और वे इसके लिए "दोषी" हैं।
विपक्ष के खिलाफ गांव-गांव संदेश पहुंचाने को कहा
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी ने बैठक में विपक्ष की इस हरकत को "गलती" बताते हुए कहा कि विपक्ष को भविष्य में इसका "राजनीतिक मूल्य" चुकाना पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरे देश के हर गांव तक यह संदेश पहुंचाना चाहिए कि विपक्ष की महिलाओं के प्रति "नेगेटिव मानसिकता" है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्षी दल अब अपनी इस स्थिति को सही ठहराने के लिए बेचैन हैं और विभिन्न बहाने गढ़ रहे हैं।
कल लोकसभा में सरकार का विधेयक वोटिंग में पास नहीं हो सका था। विपक्षी दलों द्वारा समर्थन न देने के कारण विधेयक को हार का सामना करना पड़ा। मोदी इस संबोधन के जरिए विपक्ष की इस "महिला विरोधी" रुख को पूरे देश में उजागर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। इसकी शुरुआत मोदी के संबोधन से होगी।
मोदी सरकार की नीयत का पर्दाफाश
मोदी सरकार इसे बार बार महिला आरक्षण विधेयक के नाम से बता रही थी। लेकिन इसे 131 संविधान संशोधन विधेयक के नाम से लाया गया और इसके साथ दो बिल जोड़े गए थे। ये बिल थे महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक। विपक्ष कह रहा था कि उन्हें महिला आरक्षण बिल तो मंजूर है लेकिन इसी से जुड़ा परिसीमन विधेयक पूरे विपक्ष को नामंजूर था। सरकार का ज़ोर महिला आरक्षण बिल पर था। अब वो विपक्ष के खिलाफ प्रचार भी यही कर रही है कि विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं होने दिया। जब सरकार का संविधान संशोधन बिल लोकसभा में वोटिंग के दौरान पिट गया तो सरकार ने दो बिल भी वापस ले लिए गए। इसी से सरकार की असलियत भी सामने आ गई। ये विधेयक हैं- परिसीमन विधेयक 2026ः 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करने का प्रावधान।
संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक 2026- दिल्ली, पुदुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे संघ राज्य क्षेत्रों (जिनमें विधानसभा भी है) से संबंधित। ये दोनों विधेयक मुख्य विधेयक की नाकामी के बाद वापस ले लिए गए।
विपक्ष विरोध में क्यों है
विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन किया, लेकिन 2011 की पुरानी जनगणना के आधार पर जल्दबाजी में परिसीमन का विरोध किया। उनका कहना है:
- इसमें ओबीसी की गिनती नहीं है।
- दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय हो सकता है।
- यह महिलाओं के आरक्षण का बिल नहीं, बल्कि भारत के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है।
- पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए भी समय सही नहीं।
प्रियंका गांधी की सरकार को चुनौती
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी शनिवार को सरकार को महिला आरक्षण बिल पर सीधी चुनौती दी। प्रियंका ने कहा- “सरकार सोमवार को ही पुराना महिला विधेयक लाए। वही विधेयक जिसे 2023 में सभी दलों ने पारित किया था। सोमवार को संसद बुलाइए, विधेयक लाइए और देखिए कौन महिला-विरोधी है। हम सब आपको वोट देंगे और आपका समर्थन करेंगे।” उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए पर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया, जहां इस महीने के अंत में मतदान होने वाला है। बीजेपी विपक्षी दलों को “महिला-विरोधी” बताकर ऐसा करने की कोशिश कर रही है। जबकि तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके ने तो लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में आरक्षण देने के लिए एक विधेयक भी पेश किया है। बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि अगर 50% आरक्षण 2011 की जनगणना पर आधारित परिसीमन से नहीं जुड़ा है, तो वह उसका भी समर्थन करती है।