प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार 21 मई, 2026 को कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल और पश्चिम एशिया संकट की समीक्षा की अटकलें लगाई जा रही हैं। सभी केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली में ही रहने के लिए कहा गया है।न
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (21 मई 2026) दोपहर बाद 4 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक बुलाई है। सभी केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं। यह बैठक विदेश दौरे से लौटने के तुरंत बाद हो रही है, जिसमें शासन, पश्चिम एशिया संकट और संभावित कैबिनेट बदलाव पर चर्चा होने की उम्मीद है।
बैठक में सभी कैबिनेट मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और अन्य राज्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) के चल रहे संघर्ष और उसके भारत पर संभावित आर्थिक प्रभाव पर विस्तार से चर्चा होने वाली है। सरकार तेल की कीमतों, ईंधन आपूर्ति श्रृंखला और मुद्रास्फीति पर नजर रखे हुए है।
प्रधानमंत्री मोदी अपने विदेश दौरे से लौटने के बाद स्थिति की समीक्षा करेंगे। सरकार पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय अनौपचारिक मंत्रियों के समूह का गठन कर चुकी है, जो तमाम तरह के संकट की निगरानी कर रहा है और भारत को किसी भी व्यवधान से बचाने के उपाय सुझाएगा।
इस समूह में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और हरदीप पुरी शामिल हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा था कि सरकार स्थिति पर "24 घंटे निगरानी" रख रही है। उन्होंने आश्वासन दिया, "चाहे कच्चा तेल हो, ऊर्जा हो या एलपीजी, हमारे पास पर्याप्त स्टॉक हैं। कोई खास समस्या नहीं है।"
मंत्रिमंडल विस्तार/फेरबदल की अटकलें
बैठक राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मोदी 3.0 सरकार के पहले वर्षगांठ (10 जून) से पहले कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।पिछले सप्ताह सरकारी सूत्रों ने संकेत दिए थे कि फेरबदल और विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं और जून के दूसरे सप्ताह में यूनियन काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स में बदलाव हो सकते हैं।
सरकार का शीर्ष नेतृत्व विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन और संगठनात्मक कार्यप्रणाली की समीक्षा कर रहा है, जो किसी भी संभावित बदलाव से पहले हो रहा है। यह बैठक शासन व्यवस्था को मजबूत करने, वैश्विक चुनौतियों से निपटने और आंतरिक राजनीतिक रणनीति पर फोकस करने का मौका मानी जा रही है।