ईरान युद्ध के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल, गैस नहीं आने की चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में बताया कि होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना मंजूर नहीं है। उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर विस्तार से जानकारी दी और कहा कि देश ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बातचीत और कूटनीति ही इस युद्ध का एकमात्र समाधान हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह कूटनीतिक पहल करते हुए सोमवार को लोकसभा में बयान तब दिया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। यह जगह बेहद अहम है क्योंकि दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ कई जहाजों पर हमले किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार क़रीब 20 से ज़्यादा जहाजों पर हमले हुए हैं। इससे जहाजों का आवागमन लगभग रुक गया है। तेल की क़ीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं। पहले यह 75 डॉलर के आसपास थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि क़ीमतें 200 डॉलर तक भी पहुंच सकती हैं।
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इस संकट के बीच भारत में भी गैस सप्लाई बहुत बुरी तरह प्रभावित होने की रिपोर्टें हैं। विपक्ष सरकार पर इसकी पहले से तैयारी नहीं करने के आरोप लगा रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और रास्ते में रुकावट बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह मंजूर है। भारत कूटनीतिक प्रयासों से अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान से शनिवार को भी बात की थी। भारतीय विदेश मंत्री ने भी ईरान के विदेश मंत्री से लगातार बात कर रहे हैं।

53 लाख मीट्रिक टन रिजर्व है, और बढ़ाएँगे: पीएम

बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत ऊर्जा के मामले में सुरक्षित है। पिछले दस साल में देश ने कच्चे तेल का भंडारण बहुत बढ़ाया है। उन्होंने कहा, 'आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व है। यह संकट के समय के लिए रखा गया है। सरकार अब इसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा,
पिछले दशक में हमने कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है। आज हमारे पास मजबूत रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व है।
नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री
भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों को भी बहुत विविध बनाया है। यानी जिन जगहों से तेल आयात किया जाता है उन जगहों की संख्या बढ़ाई है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'पहले हम 27 देशों से तेल आयात करते थे, अब 41 देशों से करते हैं। इससे हम किसी एक जगह पर निर्भर नहीं रहते।' पीएम मोदी ने कहा कि रिफाइनिंग क्षमता भी बढ़ी है। देश कई देशों से लगातार संपर्क में है ताकि तेल और गैस की सप्लाई बनी रहे।
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युद्ध से भारत के लिए आई चुनौतियाँ- मोदी

हालाँकि, उन्होंने माना कि यह युद्ध भारत के लिए कई चुनौतियाँ लाया है। आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय मुद्दे सब प्रभावित हुए हैं। भारत का इन देशों से गहरा व्यापार है। यह इलाक़ा वैश्विक व्यापार का अहम रास्ता है। भारत का बहुत सारा कच्चा तेल, गैस और अन्य ज़रूरी चीजें इसी रास्ते से आती हैं।
फिर भी, पीएम मोदी ने जोर दिया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को अच्छी तरह संभाल रहा है। होर्मुज से आने वाला बड़ा हिस्सा प्रभावित है, लेकिन सरकार लगातार सप्लाई सुनिश्चित कर रही है। घरेलू ऊर्जा सुरक्षा सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी एलपीजी ज़रूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, लेकिन घरों में गैस की कमी नहीं होने दी जा रही।
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कोविड का ज़िक्र क्यों?

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने पहले भी ऐसे संकट देखे हैं, जैसे कोविड के समय। अब भी हम आत्मनिर्भरता और तैयारी से निपट रहे हैं। सरकार लोगों में घबराहट फैलाने वालों की बातों पर ध्यान न देने की सलाह दे रही है।
पीएम ने संकेत दिया कि यह संकट वैश्विक है, लेकिन भारत की तैयारियां मजबूत हैं। प्रधानमंत्री ने लोकसभा को भरोसा दिलाया कि देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी और आम आदमी पर असर कम से कम रहेगा।