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विरोध के बाद फिल्म का टाइटल बदला, हुआ सम्राट पृथ्वीराज 

3 जून को आ रही फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म पृथ्वीराज का टाइटल चेंज कर दिया गया है। अब फिल्म का टाइटल सम्राट पृथ्वीराज होगा। फिल्म का टाइटल बदलने की मांग करणी सेना की ओर से की जा रही थी। करणी सेना ने फिल्म के निर्माताओं को चेताया था कि उन्हें इसका टाइटल बदलना ही होगा।

जब इस फिल्म के बनने की खबरें आई थी तभी से इसे लेकर विवाद शुरू हो गया था। यह फिल्म यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनाई गई है।

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फिल्म का टाइटल बदले जाने से यह साफ समझ आता है कि फिल्म निर्माताओं को करणी सेना की मांग के आगे झुकना पड़ा है।

गुर्जर समुदाय का विरोध

दूसरी ओर इस फिल्म को लेकर गुर्जर समुदाय ने भी विरोध जताया है। अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने कहा है कि पृथ्वीराज चौहान गुर्जर थे इसलिए फिल्म में उन्हें राजपूत सम्राट के बजे गुर्जर सम्राट के तौर पर दिखाया जाना चाहिए।

Prithviraj Film controversy now Samrat Prithviraj - Satya Hindi

गुर्जर समुदाय का दावा 

अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने पृथ्वीराज चौहान के गुर्जर होने के तमाम दावे पेश किए हैं।

महासभा ने कश्मीरी कवि जयनक के द्वारा लिखा गया एक संस्कृत पाठ जिसे 'पृथ्वीराज विजय महाकाव्य' कहा जाता है, को सामने रखा। महासभा ने कहा कि इस पाठ में पृथ्वीराज चौहान के गुर्जर जाति से होने को लेकर कई संदर्भ हैं। महासभा ने कहा कि जयनक 1191-21 के दौरान पृथ्वीराज चौहान के दरबार में काम करते थे। 

महासभा की ओर से चंद बरदाई के द्वारा लिखे गये महाकाव्य पृथ्वीराज रासो को भी सामने रखा गया। महासभा ने कहा कि पृथ्वीराज रासो में लिखा गया है कि पृथ्वीराज चौहान के पिता का नाम सोमेश्वर था और वे गुर्जर थे।

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गुर्जर नेताओं ने चेताया

गुर्जर नेताओं का कहना है कि वे इस मामले में दो जातियों के बीच किसी तरह की दुश्मनी को नहीं बढ़ाना चाहते लेकिन अगर पृथ्वीराज चौहान को सही रूप में नहीं दिखाया गया तो वे लोग प्रदर्शन करेंगे। गुर्जर नेताओं ने कहा कि करणी सेना की तरह जम्मू कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 22 राज्यों में उनका भी संगठन है।

राजपूत नेताओं का दावा

जबकि दूसरी ओर राजपूतों के संगठन करणी सेना का कहना है कि पृथ्वीराज चौहान राजपूत ही थे। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय संयोजक अजीत सिंह ममडोली का कहना है कि पृथ्वीराज चौहान एक राजपूत राजा थे और इतिहास की किताबों में भी इस बात को लिखा गया है लेकिन बेवजह एक नया विवाद खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजपूत और गुर्जर समुदाय के बीच विवाद को खड़ा करने में कुछ राजनीतिक ताकतें काम कर रही हैं।

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