कर्नाटक के गृहमंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे के आरएसएस को लेकर पूछे गए सवाल के बाद मामला तूल पकड़ गया है। बीजेपी-आरएसएस के लोगों ने खड़गे के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। बीजेपी सांसद ने प्रियांक खड़गे के दलित होने पर टिप्पणी की। इस पर खड़गे ने शनिवार 20 जून 2026 को बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए भाजपा के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया।

प्रियांक खड़गे ने आरएसएस को फिर घेरा

पीटीआई के मुताबिक प्रियांक खड़गे ने शनिवार को कहा- "जब आरएसएस जनता के बीच मार्च (पथ संचलन) करता है, तो उन्हें सुरक्षा कौन देता है? क्या वाणिज्य विभाग या महिला एवं बाल कल्याण विभाग सुरक्षा देता है? गृह विभाग ही उन्हें सुरक्षा देता है, है ना? तो मैं यह जानना चाहता हूँ कि मैं आखिर किसे सुरक्षा दे रहा हूँ... जब आरएसएस की अपनी रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक भर में बार-बार 20 लाख लोग इकट्ठा हो रहे हैं, तो यह जानना किसका काम है कि ये लोग कौन हैं और किसलिए इकट्ठा हो रहे हैं?"

क्यों शुरू हुआ यह टकराव?

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब प्रियांक खड़गे ने आरएसएस की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए संगठन के प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखा था। उन्होंने मांग की थी कि आरएसएस को एक कानूनी संस्था के रूप में खुद को पंजीकृत (Register) कराना चाहिए और अपने नेतृत्व के ढांचे, फंडिंग, ट्रस्टियों के नाम तथा खर्चों का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।

एक दलित का RSS से क्या लेना-देनाः बीजेपी सांसद

खड़गे की इस मांग पर पलटवार करते हुए विजयपुरा से भाजपा के लोकसभा सांसद रमेश जिगाजिनगी (जो स्वयं दलित समुदाय से आते हैं) ने बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे यह विवाद अलग बहस में बदल गया। जिगाजिनगी ने कहा: "एक दलित व्यक्ति का आरएसएस से क्या लेना-देना है? उन्हें गृह मंत्रालय इसलिए दिया गया क्योंकि उनके पिता (मल्लिकार्जुन खड़गे) ने कांग्रेस के लिए काम किया था। उनमें बुद्धि की कमी है।" उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो लोग भी पहले आरएसएस से टकराए हैं, वे टिक नहीं पाए हैं।

खड़गे ने पूछा- क्या आरएसएस आतंकवादी संगठन है

जिगाजिनगी के बयान को "जातिवादी" और "सामंती सोच" से प्रेरित बताते हुए प्रियांक खड़गे ने उन पर तीखे सवाल दागे: 
गर्भगृह में प्रवेश: क्या यह रमेश जिगाजिनगी की अपनी निराशा है क्योंकि एक दलित होने के नाते उन्हें आरएसएस के आंतरिक गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं है?
संवैधानिक अधिकार: क्या यह एक मज़ाक है कि दलित होने के नाते मुझे आरएसएस जैसी संस्था से सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है, जो सामाजिक श्रेष्ठता के सिद्धांतों पर काम करती है?
धमकी पर सवाल: 'कोई नहीं बचा' कहने का क्या मतलब है? क्या आरएसएस कोई आतंकवादी संगठन है जो सवाल उठाने वालों को खत्म कर देता है?

खड़गे ने स्पष्ट किया, "मैं डॉ. बी.आर. आम्बेडकर की विचारधारा का अनुयायी हूँ। सवाल उठाने का साहस मुझे उन्हीं से मिला है। बाबा साहेब को मानने वाले किसी भी धमकी से डरना नहीं जानते।"

खड़गे के समर्थन में आए अन्य नेता और संगठन

भाजपा सांसद रमेश जिगाजिनगी द्वारा प्रियांक खड़गे पर की गई इस टिप्पणी की राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चौतरफा आलोचना हो रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने खुलकर खड़गे का समर्थन किया और कहा, "किसी भी संघी से एक जायज़ सवाल पूछकर देखिए, उनका जातिवादी, सांप्रदायिक और जहरीला चेहरा तुरंत सामने आ जाता है। हमारी पार्टी के नेता प्रियांक खड़गे के साथ भी यही हुआ। उन्होंने सिर्फ इतना पूछा कि संघ खुद को पंजीकृत क्यों नहीं कराता? इस पर पूरी ट्रोल आर्मी उन पर टूट पड़ी। संघ और संविधान की लड़ाई दशकों पुरानी है। 
  • खेड़ा ने कहा- पहले मोहन भागवत और अब उनके सांसद रमेश जिगाजिनगी दलितों का अपमान कर रहे हैं। भागवत को सिर्फ कागजात दिखाने ही नहीं होंगे, बल्कि उन्हें सार्वजनिक भी करना होगा।"

दलित संगठनों के बयान

दलित संघर्ष समिति (DSS) और भीम आर्मी ने बीजेपी सांसद जिगाजिनगी के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे पूरे दलित समाज की बौद्धिक क्षमता का अपमान बताया है। नवा कर्नाटक निर्माण आंदोलन के संयोजक गोपीनाथ मुनिस्वामी ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस हमेशा शिक्षित और जागरूक दलित नेताओं की आवाज को दबाने के लिए अपने ही दल के दलित चेहरों का इस्तेमाल करते हैं।
विचारक प्रोफेसर विठ्ठलदास प्यारे ने सवाल उठाया कि यदि जिगाजिनगी के अनुसार एक दलित का आरएसएस से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए, तो खुद जिगाजिनगी एक दलित होकर आरएसएस के बचाव में इतने उग्र क्यों हो रहे हैं? खड़गे ने केवल कानून के दायरे में रहकर संगठन की जवाबदेही तय करने की बात कही है।