आरएसएस नेता राम माधव ने अमेरिका में एक कार्यक्रम में स्वीकार किया कि भारत ने रूस और ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया है।लेकिन बाद में पलट गए। इस बयान के राजनीतिक प्रभाव को जानिए। राहुल गांधी ने संघ को अब नया नाम दिया है। सब जानिएः
अमेरिका में राम माधव का बयान आरएसएस और बीजेपी को महंगा पड़ने जा रहा है। इस बयान को लेकर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष हमलावर है। लेकिन नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आरएसएस को राष्ट्रीय सरेंडर संघ घोषित कर दिया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि राष्ट्रवाद का झंडा उठाने वाला आरएसएस राम माधव के इस बड़बोलेपन वाले बयान से कैसे उबरेगा। हालांकि बयान को लेकर राम माधव ने माफी मांग ली है। लेकिन यह विवाद उनके माफीनामे से खत्म नहीं हुआ है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित 'न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में एक पैनल चर्चा में शामिल हुए। जहाँ उन्होंने कहा- "हम ईरान और रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गए, इसके लिए हमें देश में विपक्ष की ओर से कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी।" यह बयान न केवल भाजपा सरकार के लिए शर्मनाक साबित हुआ, बल्कि इसने यह भी उजागर किया कि भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांगों के आगे घुटने टेक दिए। उसने ईरान और रूस से तेल आयात रोका और ट्रंप के 50% शुरुआती टैरिफ को स्वीकार किया। विवाद बढ़ने के बाद राम माधव ने अपने बयान से पलटते हुए कहा, "मैंने जो कहा वह गलत था।मुझे खेद है।" उनकी सफाई लंबी चौड़ी है। बचाव की मुद्रा है।
राहुल गांधी और कांग्रेस ने घेरा
राहुल गांधी ने शनिवार को बड़ा हमला किया। राहुल ने एक्स पर लिखा- राष्ट्रीय आत्मसमर्पण संघ। नागपुर में फर्जी राष्ट्रवाद। अमेरिका में घोर चाटुकारिता। राम माधव ने संघ का असली चेहरा उजागर कर दिया है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- "नरेंदर की सरेंडर नीति यहाँ पूरी तरह उजागर हो गई! भाजपा और आरएसएस के नेता राम माधव मोदी सरकार की तुष्टीकरण नीति को जायज ठहरा रहे हैं और 'विश्वगुरु' की विनाशकारी विदेश नीति को बेनकाब कर रहे हैं। कभी अंग्रेजों के गुलाम थे, अब RSS अमेरिकियों का गुलाम बनना चाहता है!" कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने X पर पोस्ट करते हुए कहा- "एक वरिष्ठ RSS नेता ने खुलकर स्वीकार किया- पीएम मोदी वाशिंगटन की धुन पर नाच रहे हैं। एक समय था जब अमेरिका का 7वां बेड़ा बंगाल की खाड़ी में था, तब भी भारत नहीं झुका। और आज एक समझौतापरस्त प्रधानमंत्री ने भारत की संप्रभुता अमेरिका को सौंप दी।"
समाजवादी पार्टी का भी निशाना
समाजवादी पार्टी ने भी इस मौके पर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा- "यह बयान भारत की संप्रभुता को अमेरिका के चरणों में अर्पित करने की स्वीकारोक्ति है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा सरकार ने भारत को अमेरिका की दासता में जकड़ दिया है और देश की जनता तथा भारत के साथ घोर विश्वासघात किया है।"राम माधव का बोलना महत्वपूर्ण क्यों
महीनों से राहुल गांधी और विपक्ष यह आरोप लगाते रहे हैं कि मोदी ने ट्रंप के सामने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता किया है। अब तक सरकार इन आरोपों को विपक्षी बयानबाजी कहकर खारिज कर रही थी। लेकिन आरएसएस के राम माधव की यह स्वीकारोक्ति इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि उन्हें RSS में विदेश मामलों पर बोलने के लिए सबसे योग्य व्यक्ति माना जाता है। उनकी हालिया पुस्तक को RSS के विश्व नज़रिए की सबसे ताजा अभिव्यक्ति माना जाता है। इससे "भारत ने अपनी संप्रभुता गिरवी रख दी" के नैरेटिव को वह विश्वसनीयता मिली जो किसी भी विपक्षी आरोपों से संभव नहीं थी।
भारत के फैसले अमेरिकी दबाव में
भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका ने 50% का संयुक्त टैरिफ लगाया था, जिसमें रूस से तेल खरीदने पर 25% का दंडात्मक शुल्क भी शामिल था। 7 फरवरी को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर यह अतिरिक्त 25% शुल्क हटा दिया, जिससे अंतरिम व्यापार समझौते के बाद प्रभावी टैरिफ दर 18% रह गई। इससे एक लेन-देन की राजनीति उजागर होती है। यानी भारत ने टैरिफ राहत के बदले अपनी तेल खरीद नीति में बदलाव किया हो सकता है, जो सीधे विपक्ष के इस तर्क को बल देता है कि विदेश नीति के फैसले राष्ट्रीय हित की बजाय अमेरिकी दबाव में लिए जा रहे हैं।
मोदी सरकार के लिए इस बयान ने असहज सवाल उठाए
यह प्रकरण स्पष्ट रूप से भाजपा सरकार के लिए शर्मनाक रहा, खासकर ऐसे समय में जब मोदी पहले से ही ट्रंप की मांगों के आगे झुकने के लिए घरेलू स्तर पर कड़े हमलों का सामना कर रहे हैं। यह शर्मिंदगी इसलिए और गहरी है क्योंकि यह बात किसी भाजपा प्रवक्ता ने नहीं, बल्कि स्वयं एक RSS नेता ने कही। इससे RSS और भाजपा सरकार के बीच कूटनीतिक समन्वय और संदेश-प्रबंधन को लेकर असहज सवाल उठते हैं।
राम माधव के यू-टर्न ने नुकसान और बढ़ाया
राम माधव का पलटना, नुकसान सीमित करने की बजाय, विवाद को और भड़का गया। इससे तीन बातें हुईं। यह साबित हुआ कि मूल बयान इतना विस्फोटक था कि उसे सुधारना जरूरी हो गया। विपक्षी दलों को हमला करने का दूसरा न्यूज़ साइकल मिल गया। यह सवाल उठा कि रूसी तेल पर भारत की वास्तविक नीति क्या है। क्योंकि अगर नीति कभी बदली ही नहीं, तो RSS के वरिष्ठ विदेश मामलों के विशेषज्ञ को ऐसा क्यों लगा?
मोदी की कथित "विश्वगुरु" छवि को गहरी चोट
मोदी सरकार ने भारत को एक उभरती वैश्विक शक्ति और "विश्वगुरु" के रूप में प्रस्तुत किया है। कांग्रेस ने इस छवि पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि राम माधव ने "विश्वगुरु की विनाशकारी विदेश नीति" को बेनकाब कर दिया। एक RSS नेता का अमेरिकी मांगों के समक्ष भारत के झुकने को अमेरिकी धरती पर उचित ठहराना- इस छवि के सीधे विरुद्ध है।यह प्रकरण सिर्फ इस बारे में नहीं है कि राम माधव ने क्या कहा। बल्कि यह इस बारे में है कि उन्होंने क्या पुष्टि की। यानी मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति का निर्णय-तंत्र, यहाँ तक कि सत्तारूढ़ खेमे के भीतर भी, तेजी से अमेरिकी दबाव की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। न कि रणनीतिक तरीके से संचालित। इसके राजनीतिक नतीजे संसद के अगले सत्र तक गूंजते रहेंगे।