लोकसभा में मंगलवार को फिर से विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चीन मुद्दे को उठाया और हंगामा हो गया। सरकार और विपक्ष के बीच खूब एक-दूसरे के ख़िलाफ़ टोकाटोकी हुई। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत-चीन संबंधों पर बयान देना चाहा, लेकिन बीजेपी सांसदों ने विरोध जताया। लोकसभा ने चेयर की ओर कागज फेंकने जैसे व्यवहार के लिए आठ विपक्षी सांसदों को सस्पेंड कर दिया। सस्पेंड किए गए 8 सदस्यों में से मणिक्कम टैगोर, गुरजीत ओजला, राजा वारिंग, एबि एडन, किरण रेड्डी और वेंकट रमन भी शामिल हैं। स्पीकर ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे संसदीय मर्यादा का उल्लंघन बताया और जोर देकर कहा कि बजट सत्र के दौरान ऐसे कामों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राहुल ने आरोप लगाया कि नेता विपक्ष को सदन में बोलने तक नहीं दिया जा रहा है। यह घटना मंगलवार को हुई, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस चल रही थी। राहुल गांधी ने कहा कि वे सिर्फ़ भारत और चीन के बीच हुई घटनाओं और प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया पर बयान देना चाहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि उन्हें क्यों रोका जा रहा है। सदन में जैसे ही उन्होंने यह मुद्दा उठाया, कई बीजेपी सांसदों ने आपत्ति जताई। इससे सदन में अफरा-तफरी मच गई। स्पीकर ने सभी से शांति रखने और बहस जारी रखने की अपील की।
लोकसभा में अपनी स्पीच में राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत के पाकिस्तान व चीन के साथ संबंधों पर जोर दिया गया है। राहुल ने कहा, 'यह हमारे राष्ट्रपति के भाषण का मुख्य हिस्सा है। जैसा कि आपने देखा है, यह हमारे बजट का भी मुख्य हिस्सा है। और मैं बस इतना कह रहा हूँ कि मैं चीन और भारत के बीच जो हुआ, और हमारे प्रधानमंत्री ने उस पर जैसी प्रतिक्रिया दी, इस बारे में एक बयान देना चाहता हूँ। मुझे क्यों रोका जा रहा है? लद्दाख में, पूर्वी लद्दाख में, एक संघर्ष हुआ था और हमारे सैनिक मारे गए थे।'

राहुल गांधी ने पूर्वी लद्दाख सीमा पर पुराने तनावों का जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि इन घटनाओं पर प्रधानमंत्री ने कैसे प्रतिक्रिया दी और संसद को पूरी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि संसद को इन मुद्दों पर पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। राहुल ने कहा कि चीन-अमेरिका का संघर्ष अब वैश्विक मामलों पर हावी है और यह भारत की विदेश नीति के लिए केंद्रीय मुद्दा है।
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राहुल का कहना था कि सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुई है, जबकि देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर खुली बहस होनी चाहिए। राहुल ने सदन में रोकने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा,
मैं नेता प्रतिपक्ष हूं। मुझे बोलने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है। मैं सिर्फ हाल की घटनाओं और सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में तथ्य सदन के सामने रखना चाहता हूँ।
राहुल गांधी
नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा
यह बहस ऐसे समय में हुई है, जब भारत-चीन सीमा पर तनाव की पुरानी घटनाएँ फिर से चर्चा में हैं। राहुल गांधी पहले भी कई बार चीन मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार चीन के साथ समझौतों और सीमा विवादों पर पारदर्शी नहीं है। बीजेपी सांसदों का कहना है कि राहुल अनावश्यक रूप से मुद्दा उठाकर सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा को राजनीतिक रंग दे रहे हैं।
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सदन में हंगामे के बाद बहस कुछ देर रुकी, लेकिन बाद में जारी रही। विपक्षी सांसदों ने राहुल का समर्थन किया और कहा कि चीन मुद्दा राष्ट्रीय महत्व का है। वहीं, सत्तापक्ष ने कहा कि सरकार सीमा पर मज़बूत क़दम उठा रही है और विपक्ष बेवजह विवाद पैदा कर रहा है।

यह घटना संसद के बजट सत्र के दौरान हुई, जहां कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। माना जा रहा है कि चीन मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्माहट पैदा कर सकता है। कांग्रेस ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगते रहेंगे, जबकि भाजपा ने इसे विपक्ष की हताशा बताया है।