राहुल गांधी ने अब कहा है कि पीएम मोदी को हम भागने नहीं देंगे और उनको क़ानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा। राहुल रामलीला मैदान से साफ़ तौर पर पीएम मोदी और अमित शाह को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि 'ज्ञानेश कुमार के बाद आपका नंबर आएगा, आप भाग नहीं सकते'। उन्होंने अमित शाह के उस बयान का ज़िक्र किया जिसमें शाह ने कहा था कि 'पीएम मोदी कहीं नहीं जाएँगे'। राहुल ने कहा कि शाह ने सही कहा- "मोदी कहीं नहीं जा सकते। अगर जाना भी चाहेंगे तो हम उन्हें कहीं जाने नहीं देंगे, क्योंकि नरेंद्र मोदी ने 'वोट चोरी की' है, इसलिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और देश को न्याय मिलेगा।" उन्होंने कहा कि विपक्ष दोनों नेताओं को नहीं बख्शेगा।
दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। राहुल ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना देश को सही रास्ते पर लाने का पहला कदम होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को खत्म नहीं होने दिया जाएगा।
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राहुल गांधी ने कहा कि रामलीला मैदान में जुटी भीड़ केवल किसी राजनीतिक दल का समर्थन करने नहीं आई है, बल्कि वह देश के युवाओं, किसानों और आम लोगों की आवाज है। उन्होंने कहा, 'यह किसी राजनीतिक पार्टी की आवाज नहीं है। यह भारत के युवाओं, किसानों और लोगों की आवाज है।' राहुल के मुताबिक़ देश के लोगों को यह संदेश देना जरूरी है कि लोकतंत्र में हर नागरिक के वोट की अहमियत है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाकर लोगों की राजनीतिक आवाज को कमजोर करने की कोशिश की गई है।

13.5 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए: राहुल

राहुल गांधी ने अपने भाषण में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद देशभर में 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि हर सात में से एक मतदाता का नाम सूची से बाहर हुआ। राहुल ने इसे करीब 15 फीसदी मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बराबर बताया। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए और विपक्ष के बीच वोटों के अंतर का भी जिक्र किया।

राहुल गांधी ने कहा कि एनडीए और विपक्ष के बीच जीत का अंतर करीब 3 फीसदी था, जबकि उनके दावे के मुताबिक़ मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या 15 फीसदी तक थी। इसी आधार पर उन्होंने 2024 के चुनाव को 'अवैध चुनाव' और 'चोरी किया गया चुनाव' बताया।

राहुल गांधी ने कहा, 'मैं यह नहीं कह रहा हूं। चुनाव आयोग खुद कह रहा है।' उनका दावा था कि मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आंकड़े चुनाव आयोग की ओर से जारी जानकारी पर आधारित हैं।

'यह लोगों की आवाज की चोरी है'

राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोप को केवल चुनावी गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि किसी दुकान से सामान चोरी होने और किसी नागरिक का वोट छीन लिए जाने में बड़ा अंतर है। उनके मुताबिक, वोट चोरी का अर्थ हर व्यक्ति की आवाज छीन लेना है।
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राहुल ने इसे 'दुर्लभ से दुर्लभ' मामला और देशद्रोह जैसा बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा और कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बारे में कहा कि उन्हें जेल जाना पड़ेगा। राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री नहीं बन पाते।

RSS पर संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप

राहुल गांधी ने अपने भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS ने देश की सभी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है। राहुल ने कहा कि देश की संस्थाएं जनता की हैं, न कि RSS या बीजेपी की। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में संस्थाओं को निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का फायदा कुछ चुनिंदा बड़े कारोबारी घरानों को मिल रहा है और देश की आर्थिक व्यवस्था में आम लोगों के बजाय कुछ उद्योगपतियों का प्रभाव बढ़ रहा है।

'अडानी-अंबानी के कर्ज माफ, किसान के बेटे को जेल'

राहुल गांधी ने अडानी और अंबानी का नाम लेते हुए केंद्र सरकार पर कुछ बड़े कारोबारी घरानों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'सारा पैसा कुछ लोगों के पास चला गया है- अडानी, अंबानी। उनके कर्ज माफ कर दिए जाते हैं। लेकिन अगर किसी किसान का बेटा कर्ज लेने के बाद उसे चुका नहीं पाता तो उसे जेल भेज दिया जाता है।'
राहुल ने कहा कि वह ऐसा भारत नहीं चाहते जहां देश की संपत्ति और संसाधनों पर कुछ चुनिंदा लोगों का अधिकार हो जाए। उनके मुताबिक, देश में किसानों, युवाओं और आम नागरिकों को भी आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने आर्थिक असमानता और बड़े उद्योगपतियों को कथित तौर पर मिल रहे लाभ को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

शिव की बारात का उदाहरण दिया

राहुल गांधी ने अपने भाषण में भारत की विविधता और सबको साथ लेकर चलने की बात भी कही। उन्होंने शिव की बारात का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ऐसा देश होना चाहिए जिसमें हर तरह के लोगों के लिए जगह हो। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान मेहनत करता है तो उसे अपना सपना पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए। इसी तरह कोई छात्र 18 घंटे पढ़ाई करता है तो उसकी मेहनत का फल उसे मिलना चाहिए।
राहुल के मुताबिक, देश में अवसरों का बंटवारा किसी जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर नहीं होना चाहिए। हर नागरिक को अपनी मेहनत और क्षमता के आधार पर आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।

'मैं मोदी, शाह या ज्ञानेश कुमार से नफरत नहीं करता'

राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से व्यक्तिगत नफरत नहीं करते। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई राजनीतिक विचारों और उन कामों के खिलाफ है जिन्हें वह लोकतंत्र और देश के हितों के खिलाफ मानते हैं। राहुल ने कहा, 'हम RSS या बीजेपी के लोगों पर हमला नहीं करेंगे। हम उन्हें मारेंगे नहीं।' उन्होंने यह बात कहते हुए राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत हिंसा के बीच अंतर करने की कोशिश की। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में असहमति और विरोध की जगह होनी चाहिए।
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'मेरा धर्म लोगों की आवाज है'

राहुल गांधी ने धर्म और राजनीति के सवाल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर उनसे पूछा जाए कि उनका धर्म क्या है तो वह कहेंगे कि लोगों की आवाज ही उनका धर्म है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और RSS ने देश में नफरत फैलाई है और इससे भारत को नुकसान पहुंचा है। राहुल गांधी के मुताबिक, देश की असली ताकत उसकी विविधता और लोगों की भागीदारी में है। उन्होंने ऐसे भारत की बात की जिसमें हर व्यक्ति को अपनी बात कहने, अपनी पसंद से जीवन जीने और लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने की आजादी हो।

विपक्ष की लड़ाई

रामलीला मैदान में राहुल गांधी का भाषण INDIA ब्लॉक की उस व्यापक मुहिम का हिस्सा था जिसमें विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में इस मुद्दे को सीधे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से जोड़ते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।
उनका कहना था कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना इस लड़ाई का पहला कदम है और इसके बाद सरकार के शीर्ष नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रैली में राहुल गांधी ने बार-बार यह संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष की लड़ाई केवल सत्ता हासिल करने की नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़ी है।