राहुल गांधी का यह अभियान मोदी सरकार के खिलाफ युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित होगा। कांग्रेस ने कहा मोदी सरकार ने युवकों के साथ विश्वासघात किया है। यह लड़ाई उसी के खिलाफ है।
जागेगा जेन ज़ीः राहुल गांधी का प्रतिरोध आंदोलन 17 जून को कोटा से
नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का 13 जून को एक ऑडियो वायरल हुआ। इस ऑडियो में उनका इंडिया गठबंधन की 8 जून की बैठक में दिया गया भाषण था। सोशल मीडिया राहुल गांधी की तारीफों से भर गया। बड़े बड़े विश्लेषकों ने तारीफ की। राहुल ने अपने भाषण में प्रतिरोध आंदोलन की बात कही थी। जब देश में राहुल गांधी के भाषण पर बात हो रही थी, उसी समय कांग्रेस ने राहुल गांधी के प्रतिरोध आंदोलन के शुरू होने की घोषणा कर दी। राहुल गांधी 17 जून को कोटा पहुंच रहे हैं। जहां वो पेपर लीक से परेशान छात्रों के कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। राजस्थान का कोटा शहर प्रतियोगी छात्रों का गढ़ है। जहां देशभर से छात्र परीक्षा की तैयारी के लिए पढ़ने आते हैं।
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा कि इस आंदोलन का मकसद राजनीतिक संबद्धता से ऊपर उठकर सभी छात्रों को एकजुट करना है। यह अभियान प्रभावित युवाओं को एक ऐसा मंच प्रदान करेगा जहां वे अपने अनुभव साझा कर सकेंगे और परीक्षाओं की लगातार हो रही विफलताओं व पेपर लीक घोटालों के लिए सरकार से जवाबदेही की मांग कर सकेंगे।
राहुल गांधी का प्रतिरोध अभियान कोटा के बाद कहां-कहां
राहुल गांधी देश के प्रमुख शिक्षा और कोचिंग केंद्रों में जाकर छात्रों, अभ्यर्थियों, शिक्षकों और शिक्षाविदों से सीधा संवाद करेंगे। पहले चरण की तारीखें इस तरह हैं:
- 17 जून: कोटा (राजस्थान) से अभियान की शुरुआत
- 10 जुलाई: इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
- 11 जुलाई: पटना (बिहार)
- 14 जुलाई: दिल्ली
राहुल गांधी के प्रतिरोध आंदोलन की मुख्य मांगें क्या हैं
कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने युवाओं के भविष्य, उनकी योग्यता और निष्पक्षता की रक्षा को राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा बना दिया है। इस अभियान के जरिए कांग्रेस कुछ प्रमुख मांगों को सड़क से लेकर संसद तक उठाएगी। जिसमें NEET परीक्षा का विकेंद्रीकरण (Decentralisation) यानी नीट परीक्षा के मौजूदा ढांचे में बदलाव की मांग। छात्रों पर से परीक्षा फॉर्म की फीस का बोझ पूरी तरह हटाने की मांग। पेपर लीक रैकेट में शामिल माफियाओं और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई। पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
क्या जेन ज़ी की सोच बदल रही, जिसे राहुल आवाज़ देना चाहते हैं
भारत के युवा मतदाताओं का राजनीतिक नज़रिया अब बुनियादी तौर पर बदल चुका है। हाल ही में दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन यह साफ दिखाता है कि 'जेन जी' (Gen Z - आज का युवा वर्ग) पूरी तरह से सक्रिय और आंदोलित है। हालांकि, क्या यह सक्रियता राहुल गांधी के समर्थन में बदल जाएगी, इसके लिए इंतज़ार करना होगा। लेकिन राहुल गांधी के प्रतिरोध आंदोलन को जेन ज़ी के नज़रिए से समझना ज़रूरी है। कुछ प्वाइंटस पर गौर करिएःयुवा आंदोलनों के साथ तालमेल
राहुल गांधी ने रणनीतिक रूप से उन मुद्दों को निशाना बनाया है जो सीधे तौर पर जेन जी और सहस्राब्दी पीढ़ी (millennials) को प्रभावित करते हैं- खासतौर पर शिक्षा और रोजगार क्षेत्र का संकट। राष्ट्रीय परीक्षाओं के पेपर लीक और धांधली को लेकर छात्रों में बढ़े भारी असंतोष के बाद, उन्होंने खुद को युवाओं के साथ खड़ा करते हुए कहा था कि "जेन ज़ी सरकार के अहंकार को तोड़ देगा।"शिक्षा और बेरोज़गारी ने जेन ज़ी को जगा दिया
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन जो सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के जवाब में सोशल मीडिया पर शुरू हुए एक मजाक से उपजा था, यह साबित करता है कि भारत का युवा मुख्यधारा के राजनीतिक तंत्र से स्वतंत्र होकर भी खुद को संगठित कर सकता है। रोजगारहीन विकास (jobless growth) और ध्वस्त हो चुकी परीक्षा प्रणाली के खिलाफ गहरी हताशा और मीम्स (memes) तथा डिजिटल समझ का उपयोग करते हुए हजारों युवा जवाबदेही की मांग के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार लगते हैं। यह आंदोलन इस बात का सबूत है कि जेन जी सड़कों पर उतरने और शांतिपूर्ण असंतोष जताने के लिए तैयार है। हालांकि, सीजेपी की मूल पहचान अत्यधिक स्वतंत्र, युवाओं के नेतृत्व वाली और पारंपरिक राजनीतिक बयानों के प्रति बेहद संशयवादी (skeptical) है।बड़ा सवाल- क्या जेन ज़ी राहुल गांधी की ओर रुख करेंगे?
राहुल गांधी के लगातार संपर्क के बावजूद, इस बात को लेकर बड़े सवाल हो रहे हैं कि क्या यह युवा वर्ग व्यापक रूप से उनके नेतृत्व को स्वीकार करेगा। यह आसान नहीं है लेकिन भारत जोड़ो यात्रा जैसा बड़ा कार्यक्रम कर चुके राहुल गांधी के पक्ष में कुछ बातें ज़रूर जा रही हैंः
पारंपरिक राजनीति के प्रति अविश्वास: युवा प्रदर्शनकारी पारंपरिक विपक्षी दलों के झंडे तले आने के बजाय नए नेतृत्व की तलाश कर रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा भी है कि पारंपरिक तरीकों से अब आरएसएस जैसे संगठनों से नहीं लड़ा जा सकता। राहुल गांधी ने जेन ज़ी की इस तलाश को पहचान लिया है।
राहुल के खिलाफ आरोप ध्वस्त हुए: प्रतिद्वंद्वी, विशेष रूप से सत्ताधारी भाजपा राहुल गांधी के खिलाफ लंबे समय से "वंशवादी राजनीति" का अभियान चलाती रही है। लेकिन राहुल के खिलाफ भाजपा के सारे अभियान नाकाम हो चुके हैं। राहुल का खुद कहना है कि भाजपा ने उन्हें बदनाम करने के लिए करोड़ों रुपये बहा दिए। भारत जोड़ो यात्रा और संविधान बचाओ अभियान के दौरान युवक राहुल गांधी के साथ बड़े पैमाने पर जुड़े।
"ऑनलाइन आक्रोश" की धारणा: राजनीतिक आलोचक अक्सर गांधी के युवा-केंद्रित दृष्टिकोण को "ऑनलाइन आक्रोश की कुलीन राजनीति" कहकर खारिज करते रहे हैं। उनका मानना है कि यह सोशल मीडिया पर जुड़ाव तो पैदा कर सकता है, लेकिन दीर्घकालिक विश्वास हासिल करने के लिए ठोस, संरचनात्मक नीतिगत विकल्प पेश करने में विफल रहता है। लेकिन खुद कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन ने ऐसा कहने वालों की धारणा को खत्म कर दिया। तमाम ऐसे युवा चेहरे सामने आए जो आज की पुरानी पीढ़ी के नेताओं से बेहतर सोचते हैं। राहुल गांधी का साथ देने के लिए ऐसे ही युवक तैयार हैं।जेन जी (Gen Z) का राजनीतिक झुकाव फिलहाल काफी परिवर्तनशील है। हालांकि नौकरियों, राज्य के भ्रष्टाचार और व्यवस्था की विफलताओं पर उनका गुस्सा राहुल गांधी के 'प्रतिरोध' के विमर्श से मेल खाता है। यह पीढ़ी साबित कर रही है कि उसे अपने गुस्से को सही ठहराने के लिए पारंपरिक राजनीतिक नेताओं की जरूरत नहीं है।
जमीनी स्तर पर बड़े आउटरीच की तैयारी
बहरहाल, राहुल के अभियान को व्यापक रूप देने के लिए नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), यूथ कांग्रेस (Youth Congress), प्रदेश कांग्रेस कमेटियों (PCC), जिला कांग्रेस कमेटियों (DCC) और स्थानीय इकाइयों को बड़े पैमाने पर सक्रिय किया गया है। पार्टी कोचिंग सेंटरों, विश्वविद्यालयों, स्कूलों और यूथ हब्स में जाकर छात्रों से सीधे संपर्क करेगी। इसके लिए फिजिकल और डिजिटल इनविटेशन भेजे जाएंगे, साथ ही सोशल मीडिया कैंपेन, लाइव स्क्रीनिंग और सीधी मुलाकातों के जरिए करोड़ों युवाओं तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।मोदी सरकार को घेरने की बड़ी रणनीति
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हाल ही में हुई महासचिवों और राज्य प्रभारियों की बैठक में मोदी सरकार को बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी और चुनावी हेरफेर के साथ-साथ पेपर लीक के मुद्दे पर चौतरफा घेरने का फैसला लिया गया था। वेणुगोपाल के अनुसार, सरकार की विफलताओं के खिलाफ यह अभियान अगले दो से तीन महीनों तक लगातार जारी रहेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है।