नेता विपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक वीडियो जारी किया। जिसमें वो कह रहे हैं कि बहुत संभव है कि पीएम मोदी का नाम भी एपस्टीन फाइल्स में हो। उसमें हरदीप पुरी और अनिल अंबानी के नाम है। राहुल ने इसे ट्रेड डील से जोड़ते हुए समझाया है। जानिएः
एपस्टीन फाइल्स में पीएम मोदी का जिक्र
नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक वीडियो जारी किया। जिसमें उन्होंने यूएस ट्रेड डील, एपस्टीन फाइल्स, अडानी मामले के तार जोड़े। उन्होंने पीएम मोदी पर जबरदस्त हमला करते हुए कहा कि बहुत मुमकिन है कि उनका नाम भी एपस्टीन फाइल्स में हो। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी के नाम तो हैं ही। इस पूरे प्रकरण को राहुल ने अलग तरह से समझाया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे समझौते पर सहमति क्यों दी, 'पूर्ण समर्पण' क्यों किया। इसका जवाब उन पर लगे 'ग्रिप्स' (पकड़) और 'चोक्स' (गला घोंटना) में छिपा है। यानी राहुल यह कहना चाहते हैं कि पीएम मोदी को नियंत्रित करके यूएस ट्रेड डील कराई गई है। वरना किसानों, मजदूरों के साथ इतना बड़ा धोखा नहीं होता। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि इस समझौते से भारत एक 'डेटा कॉलोनी' बन जाएगा।
राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने संसद में अपने हालिया भाषण का जिक्र किया।राहुल ने कहा, "मैंने संसद में ट्रेड डील पर अपने भाषण में कहा कि हमारे किसानों को अमेरीकियों को खुश करने के लिए क्यों बलिदान किया गया? भारत की ऊर्जा सुरक्षा से क्यों समझौता किया गया, अमेरिका को हमारे तेल आपूर्ति पर निर्देश देने की अनुमति कैसे मिली? अमेरिका से आयात को सालाना 100 अरब डॉलर बढ़ाने पर सहमति क्यों दी गई, बिना पारस्परिक वादे के? मैंने क्यों कहा कि यह समझौता भारत को डेटा कॉलोनी में बदल सकता है? मोदी जी ने ऐसे समझौते पर सहमति क्यों दी जहां भारत इतना कुछ देता है और बदले में इतना कम मिलता प्रतीत होता है? इस पूर्ण समर्पण का जवाब पीएम पर लगे 'ग्रिप्स' और 'चोक्स' में है।"
राहुल गांधी इसी वीडियो में कहते सुने जा सकते हैं - “हम जानते हैं कि हरदीप पुरी का नाम एपस्टीन फाइल्स में है। अनिल अंबानी का नाम है। बहुत संभव है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम हो…।ऐसा लग रहा है कि प्रधानमंत्री चीन और अमेरिका के बीच फंसे हुए हैं। पर असली दिक्कत ये नहीं है, असली दिक्कत है उनकी नक़ली छवि!”
राहुल ने कहा कि "मैंने ग्रिप और चोक शब्दों का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि उस खेल में आप विरोधी को कैसे नियंत्रित करते हैं, इसका पता चलता है। लेकिन ये राजनीतिक क्षेत्र में भी मौजूद हैं। और राजनीति के मेरे अनुभव में, मैंने देखा है कि राजनीतिक ग्रिप्स और राजनीतिक चोक्स ज्यादातर छिपे होते हैं। औसत व्यक्ति उन्हें नहीं देख सकता।"
उन्होंने आगे कहा- "और आपको ध्यान से देखना पड़ता है कि चोक कहां लगाया जा रहा है और ग्रिप्स कहां रखे गए हैं। तो यह विचार इसके पीछे था। इसने बहुत शक्तिशाली ढंग से व्यक्त किया कि हमारे प्रधानमंत्री क्या कर गुजर रहे हैं।"
एलओपी ने कहा कि एक तरफ व्यवसायी गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में आपराधिक मामला है और दूसरी तरफ एपस्टीन फाइल्स है।"तीन मिलियन (30 लाख) फाइलें जारी नहीं की गईं। हम सभी जानते हैं कि (केंद्रीय मंत्री) हरदीप पुरी फाइलों में शामिल हैं, हम जानते हैं कि अनिल अंबानी फाइलों में शामिल हैं और हम यह भी जानते हैं कि प्रधानमंत्री का नाम आता है और बहुत मुमकिन है कि पीएम का नाम उन फाइलों में शामिल हो।"
सरकार ने पहले इन आरोपों को "कचरा अफवाहें" और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया था। लेकिन अभी जिस तरह से बिल गेट्स को इंडिया एआई समिट में लाने की कोशिश हुई और बिल गेट्स खुद पीछे हट गए, उससे सरकार दबाव में है। कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर एपस्टीन फाइल्स को लेकर झूठ बोलने के तमाम आरोप लगाए हैं। हरदीप पुरी ने खुद कहा था कि वो 3-4 बार एपस्टीन से मिले हैं। लेकिन कांग्रेस ने तारीखों के साथ दस्तावेज जारी किए कि हरदीप पुरी 14 बार एपस्टीन से मिले थे। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हरदीप पुरी 9 बार एपस्टीन से मिले। हरदीप पुरी उस समय सांसद भी नहीं थे और न ही बीजेपी के कोई नेता, लेकिन मोदी ने उन्हें अपनी कैबिनेट में सीधे शामिल किया। बीजेपी के अंदर से ही इस नियुक्ति पर सवाल उठे थे।
केंद्रीय मंत्री पुरी ने इन दावों को सख्ती से खारिज किया था। पुरी ने स्वीकार किया कि उन्होंने 2014 और 2017 के बीच एपस्टीन से "तीन या चार बार" मुलाकात की, लेकिन कहा कि ये पेशेवर, आधिकारिक बैठकें थीं, जो वे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) के साथ थे और एपस्टीन के अपराधों से असंबंधित थीं। लेकिन पुरी ने कांग्रेस के इन ताजा आरोपों का खंडन नहीं किया है कि वो 14 बार एक कुख्यात अपराधी एपस्टीन से मिले थे। एपस्टीन की ईमेल्स में जिस तरह हरदीप पुरी का जिक्र आया है, पुरी ने उनका भी खंडन नहीं किया।
पुरी ने दावा किया कि अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की गई 3 मिलियन से अधिक पेजों में उनका जिक्र बहुत कम हैं, जो पेशेवर ईमेल से मिलकर बने हैं, और उन्होंने पहले राहुल गांधी को एक नोट में इन इंटरैक्शनों को स्पष्ट किया था।
मोदी की छवि नकली हैः राहुल
राहुल ने पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र किया। राहुल ने कहा- "तो एक तरफ चीनी हैं जो हमारी सीमा पर बैठे हैं और दूसरी तरफ अमेरिका है। हमारे पीएम इन ग्रिप्स के बीच फंसे हैं। वह फंस गए हैं, हर कोई जानता है, हर कोई देख सकता है। समस्या यह है कि नरेंद्र मोदी पर असली ग्रिप वह नकली छवि है जो उन्होंने बनाई है, जो उनके लिए बनाई गई है, एक छवि जिसके लिए बड़ी मात्रा में धन की आवश्यकता पड़ी है। उस छवि की कुंजी अब अमेरिका के हाथों में है और यही कारण है कि भारतीय किसान पीड़ित होंगे, भारतीय कपड़ा उद्योग पीड़ित होगा, हमें अमेरिका से आयात खरीदने के लिए मजबूर किया जाएगा।"
उन्होंने कहा- "सबसे महत्वपूर्ण है डेटा। तथ्य यह है कि हमारा डेटा नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिकी कंपनियों को, अमेरिका को, मामूली राशि के लिए सौंपा जा रहा है। मेरी बात याद रखें, हम डेटा कॉलोनी बनने जा रहे हैं। भारत के आकार का देश क्यों सब कुछ सौंप देगा, जिसमें हमारा डेटा, कपड़ा उद्योग और हमारा कृषि क्षेत्र शामिल है, किस लिए और क्यों? जवाब पीएम पर लगाए गए ग्रिप्स और चोक्स में है।"
कांग्रेस ने भी आरोप लगाया है कि मोदी ने समझौते पर सहमति देकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सामने "समर्पण" कर दिया है। यह डील राज्यों में करोड़ों किसानों की आजीविका को "तबाह" कर देगी और भारत की ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता और आर्थिक आत्मनिर्भरता खत्म हो जाएगी।