NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक घोटाले को लेकर कांग्रेस पार्टी ने देशभर में विरोध तेज कर दिया है। राजस्थान में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को बीजेपी प्रदेश मुख्यालय का घेराव किया और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पानी की बौछार का भी इस्तेमाल किया गया। पेपर लीक और इसके ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शन पर सरकार के रवैये को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद हो गया, कई छात्रों ने जान तक दे दी, लेकिन सरकार ने कोई जिम्मेदारी नहीं ली।

राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'जब मोदी जी इटली में टॉफी खिलाते हुए रील्स बना रहे थे - पेपर लीक से त्रस्त भारत के युवा सड़कों पर न्याय मांग रहे थे। क्योंकि NEET पेपर लीक ने लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया। कई बच्चों ने तो अपनी जान तक गंवा दी। और मोदी जी ने न जिम्मेदारी ली, न धर्मेंद्र प्रधान को हटाया, न एक शब्द कहा।'
राहुल ने आगे कहा, 'जो सरकार छात्रों के सवालों का जवाब लाठियों से देती है, वो जवाबदेही से नहीं, डर से चलती है। हम डरने वाले नहीं हैं। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और देश में पेपर लीक रोकने के लिए मज़बूत और सुरक्षित सिस्टम नहीं बनता। यह लड़ाई हर उस छात्र के लिए है जिसका भविष्य इस नाकाम सरकार ने चुराया है।'

राजस्थान में क्या हुआ?

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता, NSUI छात्रों और युवाओं ने जयपुर में बीजेपी मुख्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक माफिया पर सख्त कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार की मिलीभगत से पेपर लीक माफियाओं ने युवाओं के सपनों का सौदा किया है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पानी की बौछार की।
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कांग्रेस की मांग

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
  • पेपर लीक रोकने के लिए देशभर में पक्का और सुरक्षित सिस्टम बनाया जाए।
  • दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और प्रभावित छात्रों को न्याय मिले।
NEET पेपर लीक मामले ने पूरे देश में युवाओं में बहुत गुस्सा पैदा किया है। कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैला हुआ है। कांग्रेस ने कहा है कि यह लड़ाई सिर्फ एक मंत्रालय या एक परीक्षा की नहीं है, बल्कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य की है। पार्टी ने वादा किया है कि वह इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाती रहेगी।

संसदीय समिति को NEET-UG रद्द करने के बारे में क्या बताया?

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के अधिकारियों ने गुरुवार को संसद की एक समिति को बताया कि NEET-UG परीक्षा रद्द करनी पड़ी क्योंकि स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगा था। द इंडियन एक्सप्रेस ने यह रिपोर्ट दी है। यह बैठक शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल संबंधी संसदीय समिति में हुई, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह कर रहे हैं। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह और प्रदीप कुमार जोशी गुरुवार को इस समिति के सामने पेश हुए।
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विपक्षी सदस्यों ने बैठक में पूछा कि खुफिया एजेंसियों की नाकामी को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया? उन्होंने मांग की कि NTA के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले की जिम्मेदारी लें और नैतिक जिम्मेदारी लें। 

बैठक में विपक्ष और भाजपा सदस्यों के बीच इस बात पर मतभेद भी हुआ कि इसे 'पेपर लीक' कहना चाहिए या सिर्फ 'परीक्षा से छेड़छाड़ हुई' कहना चाहिए। भाजपा सदस्य चाहते थे कि इसे 'कंप्रोमाइज्ड परीक्षा' कहा जाए। समिति ने NTA को लीक के बारे में ज्यादा विस्तार से रिपोर्ट देने को कहा है। NTA अधिकारियों ने बताया कि दोबारा परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और सही तरीके से कराने के लिए कदम उठाए गए हैं। शिक्षा मंत्री के बयान पर भी विपक्ष ने आपत्ति जताई। हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि संसदीय समिति में विपक्षी सदस्य हैं, इसलिए वे 'एक खास तरीके से' रिपोर्ट लिखते हैं। समिति के सदस्यों ने इस बयान पर भी नाराजगी जताई और कहा कि यह राजनीति है।