राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने किरेन रिजिजू से कहा कि संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर आप विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री को अवगत करा सकते हैं। विपक्ष जंतर मंतर प्रोटेस्टरों के ख़िलाफ़ पुलिसिया 'दमन' पर अमित शाह से जवाब मांग रहा है।
क्या गृहमंत्री अमित शाह आख़िरकार संसद में विपक्ष का सामना करने आएँगे? यह सवाल इसलिए कि राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने केंद्र सरकार से कहा कि वह विपक्ष की इस मांग पर विचार करे कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर बयान दें। सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से कहा कि वह विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री को अवगत कराएँ। विपक्ष जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई पर गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहा है कि आख़िर पैलेट गन, आंसू गैस के गोले छोड़ने और लाठी चार्ज जैसी दमनकारी कार्रवाई का आदेश किसने दिया।
सभापति ने क्या कहा?
जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई और अयोध्या राम मंदिर में कथित दान चोरी को लेकर राज्यसभा में लगातार हो रहे हंगामे के बीच सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने किरेन रिजिजू से कहा, 'मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि गृह मंत्री के सदन में आने की विपक्ष की मांग पर विचार करें। संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर आप विपक्ष की भावनाओं को गृह मंत्री तक पहुँचा सकते हैं।' सभापति की यह टिप्पणी उस समय आई जब विपक्ष लगातार नारे लगा रहा था कि गृह मंत्री संसद में आकर जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब दें।'अमित शाह जवाब दो, सदन में आओ'
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने एक बार फिर सदन में नारे लगाए। सांसदों ने कहा, 'अमित शाह जवाब दो, सदन में आओ।' विपक्ष का आरोप है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने हद से ज़्यादा बल प्रयोग किया। विपक्ष चाहता है कि इस पूरे मामले पर गृह मंत्री संसद में बयान दें।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के विरोध पर आपत्ति जताते हुए राज्यसभा के नियम 235 और नियम 240 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे रोज एक ही मुद्दा दोहरा रहे हैं। रिजिजू ने कहा, 'हर दिन खड़गे जी वही बात दोहराते हैं। नियम 240 के अनुसार एक ही विषय को बार-बार उठाना उचित नहीं है।'
खड़गे बोले- मुझे कोई नहीं बताएगा क्या बोलना है
रिजिजू की टिप्पणी पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'मुझे किसी से सीखने की जरूरत नहीं है कि सदन में क्या बोलना है। यह मेरा अधिकार है कि मैं कब, क्या और कैसे बोलूं।' खड़गे ने कहा कि विपक्ष देश के अहम मुद्दे उठा रहा है और सिर्फ यह चाहता है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आकर अपना पक्ष रखें। उन्होंने कहा, 'हम चर्चा के लिए तैयार हैं। गृह मंत्री यहां आएं और बयान दें।'रिजिजू ने कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा को सदन में बोलने का पर्याप्त मौका मिला, लेकिन वह अपनी सीट पर बैठकर बोलने के बजाय नारेबाजी करते रहे। इस पर खड़गे ने पवन खेड़ा का बचाव करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध और व्यवधान भी संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने भी कहा था कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना संसदीय व्यवस्था का हिस्सा है।
संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
सदन के भीतर हंगामे के साथ-साथ संसद परिसर में भी विपक्ष ने प्रदर्शन किया। बारिश के बीच कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसद मकर द्वार के सामने धरने पर बैठे। सांसद अपने हाथों में तख्तियाँ और छाते लिए हुए थे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने नारे लगाए- 'अमित शाह जवाब दो', 'चंदा चोर, गद्दी छोड़', 'चंदा चोर कहां मिलेंगे, बीजेपी के दफ्तर में'। विपक्षी सांसद अपने साथ एक दानपात्र भी लेकर पहुंचे। उनका कहना था कि यह अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदे की गड़बड़ी के मुद्दे का प्रतीक है।विपक्ष के निशाने पर दो बड़े मुद्दे
इंडिया गठबंधन ने साफ़ कर दिया है कि वह संसद के भीतर और बाहर दो मुद्दों पर सरकार को लगातार घेरता रहेगा। एक है जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादती का और दूसरा है अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी का। इन मुद्दों पर रणनीति तय करने के लिए गुरुवार सुबह राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में इंडिया गठबंधन के फ्लोर नेताओं की बैठक भी हुई।
विपक्ष की लगातार मांग और सरकार के जवाब न देने के कारण राज्यसभा और लोकसभा दोनों में कई बार कार्यवाही बाधित हुई। हंगामे के बीच ही सदन की कार्यवाही चलती रही और कई बार स्थगित भी करनी पड़ी। फिलहाल विपक्ष अपनी मांग पर कायम है कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर छात्र प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई और उससे जुड़े सवालों का जवाब दें, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। तो सवाल है कि अमित शाह को सदन में बुलाने के लिए विचार करने का राज्यसभा चेयरमैन का आग्रह क्या अमित शाह के जल्द ही संसद में आकर जवाब देने का संकेत है?