राम मंदिर दान में जिस घोटाले के बेहद संगीन आरोप लगे उस पर राम मंदिर ट्रस्ट ने चुप्पी तोड़ी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने कहा है- 'हमारे पास दान में मिली लगभग 2800 चीज़ों की सूची वाला रजिस्टर है और उनमें से हर एक चीज़ सुरक्षित है।'
राम मंदिर चंदा घाटाले से आहत करोड़ों हिंदू तो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक से बड़ी उम्मीदें लगाए बठे थे लेकिन हुआ बस इतना कि इस्तीफ़ स्वीकार किया गया, अंतरिम नियुक्ति हुई और क़रीब-क़रीब ट्रस्ट और इसके लोगों को क्लीन चिट दे दी गई। राम मंदिर में दान में कथित गड़बड़ी के गंभीर आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। ट्रस्ट ने वरिष्ठ सदस्य कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करने और जांच पूरी होने के बाद नए पदाधिकारियों की नियुक्ति का फ़ैसला भी लिया गया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने कहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के लिए इंटरव्यू लेने और नामों का सुझाव देने के लिए 3 सदस्यों की कमेटी बनाई गई है।
यह निर्णय अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में हुई ट्रस्ट की तीन घंटे से अधिक चली बैठक में लिया गया। ट्रस्ट ने घोषणा की कि अगली बैठक 22 जुलाई को होगी, जिसमें विशेष जांच दल यानी एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी और नए ट्रस्टी व पदाधिकारियों की नियुक्ति पर फ़ैसला लिया जाएगा।
चंपत राय ने क्यों दिया इस्तीफा?
बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने पत्रकारों से कहा कि दान घोटाले के आरोपों से पूरा ट्रस्ट दुखी और आहत है। उन्होंने कहा, 'चोरी छोटी हो या बड़ी, इससे भी ज़्यादा दुखद यह है कि मंदिर परिसर में ऐसा माहौल बनने दिया गया।' गोविंद गिरि के अनुसार, महासचिव चंपत राय का मानना था कि जब तक इस मामले के दोषियों की पहचान कर उन्हें सजा नहीं मिल जाती है, तब तक उनके लिए अपने पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसी भावना से उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया।जिस तरह से ट्रस्ट की ओर से सफाई आई उससे सवाल उठने लगे कि एक महीने बाद कुछ चढ़ावा दिखाकर क्या वह यह साबित करता है कि कुछ हुआ ही नहीं? यदि कुछ हुआ नहीं तो फिर चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े क्यों स्वीकार किए गए? ऐसे सवालों पर गोविंद गिरि ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार, किसी पदाधिकारी का इस्तीफा सौंपते ही वह स्वतः प्रभावी माना जाता है। इसलिए ट्रस्ट के पास उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का विकल्प नहीं था।
गोविंद गिरि ने चंपत राय की तारीफ़ क्यों की?
गोविंद गिरि ने चंपत राय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में वर्षों तक अहम भूमिका निभाई है। ट्रस्ट ने उनके लंबे योगदान का सम्मान करते हुए उनका इस्तीफा स्वीकार किया।
कृष्ण मोहन को मिली अंतरिम जिम्मेदारी
ट्रस्ट ने 74 वर्षीय कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी हैं और भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी रह चुके हैं।
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के रहने वाले कृष्ण मोहन को वर्ष 2025 में ट्रस्टी बनाया गया था। वे संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक भी हैं। ट्रस्ट ने कहा कि फिलहाल वही महासचिव की जिम्मेदारियां संभालेंगे, जबकि स्थायी नियुक्ति पर फैसला 22 जुलाई की बैठक में लिया जाएगा।
ट्रस्ट का दावा- दान की सभी चीजें सुरक्षित
दान में मिली सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के गायब होने के आरोपों पर ट्रस्ट ने साफ इनकार किया है। स्वामी गोविंद गिरि ने कहा कि ट्रस्ट के पास लगभग 2800 दान की गई वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है और सभी वस्तुएं सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, 'हम पूरा रजिस्टर लेकर आए हैं। जिन वस्तुओं के गायब होने की चर्चा की जा रही थी, उनमें से कुछ वस्तुएं हमने मीडिया के सामने भी रखी हैं। सभी वस्तुएं सुरक्षित हैं।'
प्रेस वार्ता के दौरान ट्रस्ट ने स्वर्ण रामायण, भगवान राम के चरण चिन्ह, एक हार और कागभुशुंडी की प्रतिमा भी प्रदर्शित की, ताकि यह दिखाया जा सके कि दान में मिली बहुमूल्य वस्तुएं सुरक्षित हैं। लेकिन ट्रस्ट के इन दावों पर भी सवाल उठाया जा रहा है। एक महीने बाद कुछ चढ़ावा दिखाकर क्या वह ये साबित कर सकेगा कि कुछ हुआ ही नहीं? चढ़ावे की लूट के इतने सारे आरोप लगे मगर बिना विश्वसनीय जाँच के खुद ही क्लीन चिट देना क्या सही है? क्या उसके दावों से भक्तों के मन में पैदा हुए संदेह दूर हो जाएंगे? नई समिति बनेगी
ट्रस्ट ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को फिर से होने से रोकने के लिए एक छोटी समिति बनाने का भी फैसला किया है। गोविंद गिरि ने कहा कि यह समिति प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करेगी और ऐसे सुझाव देगी जिससे आगे किसी भी तरह की लापरवाही या विवाद की गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा, 'अब हमारा प्रयास होगा कि भविष्य में काम इस तरह हो कि कोई भी व्यक्ति छोटी से छोटी कमी भी न निकाल सके।'
ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को होगी। माना जा रहा है कि तब तक विशेष जांच दल अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगा। गोविंद गिरि ने कहा कि उसी बैठक में जांच रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा और नए ट्रस्टी तथा पदाधिकारियों की नियुक्ति सहित अन्य प्रशासनिक फैसले लिए जाएंगे।
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
हालाँकि, कई दावों के बीच ही ट्रस्ट ने दोहराया कि दान घोटाले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। गोविंद गिरि ने कहा, 'चोरी, चोरी होती है। जांच प्रशासन का काम है, लेकिन हमारी साफ़ इच्छा है कि सभी आरोपी पकड़े जाएं और कानून के अनुसार उन्हें सजा मिले।'
क्या ट्रस्ट की छवि ख़राब की जा रही है?
राम मंदिर में चोरी के गंभीर आरोपों के बीच ट्रस्ट ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील भी की। गोविंद गिरि ने कहा कि कुछ लोग राम मंदिर और ट्रस्ट की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि यदि किसी को किसी प्रकार का संदेह हो तो वह ट्रस्ट कार्यालय आकर रिकॉर्ड देख सकता है।
उन्होंने कहा, 'हमें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। दोषियों को सजा मिलेगी, लेकिन लोगों से अनुरोध है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें।' हालाँकि, ट्रस्ट पर इस मामले में चुप्पी साधने सहित कई बेहद गंभीर आरोप लग रहे हैं। इतने भारी विवाद और चौतरफ़ा दबाव के बीच सफाई देने आया ट्रस्ट सवालों के घेरे में है।
ट्रस्ट पर सवाल क्यों?
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई दान राशि और बहुमूल्य वस्तुओं में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था।इसके बाद एफ़आईआर दर्ज की गई और दान की गिनती से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। जाँच एजेंसी नकद दान के अलावा सोना, चांदी, आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
इसी विवाद के बाद ट्रस्ट ने अपनी पहले से तय 11 जुलाई की बैठक को पहले कर 6 जुलाई को बुलाया और कई अहम फ़ैसले लिए। अब इसने जितने सवालों के जवाब दिए हैं उससे ज़्यादा अब और सवाल खड़े होने लगे हैं। अब सभी की नज़र 22 जुलाई को होने वाली अगली बैठक और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।