श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है। ट्रस्ट में तीन नये सदस्य बनाए गए। गोविंद देव गिरि ट्रस्ट के नये महासचिव और महेश भगचंदका कोषाध्यक्ष बनाए गए।
रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO बनाया है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक कमान का नेतृत्व किया था। सीईओ की नियुक्ति के साथ ही ट्रस्ट ने अपने संगठनात्मक ढांचे में कई अहम बदलाव भी किए हैं। नए पदाधिकारियों की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है।
राम मंदिर चंदा विवाद के बाद ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव का यह फैसला लिया गया है। राम मंदिर ट्रस्ट अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रहा है। हाल के महीनों में मंदिर में मिले दान से जुड़े कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बाद भी ट्रस्ट के काम करने के तौर-तरीके चर्चा में रहे थे।
कौन हैं एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा?
एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन मिला था। उन्होंने क़रीब 39 वर्षों तक वायुसेना में सेवा दी और इस दौरान कई अहम जिम्मेदारियाँ निभाईं। वह एक फाइटर कॉम्बैट लीडर और प्रयोगात्मक टेस्ट पायलट रहे हैं। उनके पास 3000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है।
जनवरी 2025 में उन्होंने भारतीय वायुसेना की सबसे अहम परिचालन कमानों में से एक वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली थी। बाद में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इस कमान का नेतृत्व किया।
कई अहम पदों पर रह चुके हैं
अपने लंबे सैन्य करियर में एयर मार्शल मिश्रा ने कई अहम जिम्मेदारियाँ निभाईं। उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट के चीफ टेस्ट पायलट, दो अग्रिम एयरबेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग और एयर मुख्यालय में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया। जीतेंद्र मिश्रा नेशनल डिफेंस एकेडमी पुणे, एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल बेंगलुरु, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के पूर्व छात्र भी हैं। उन्हें उत्कृष्ट सेवाओं के लिए अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।
लंबी चयन प्रक्रिया के बाद हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के चयन की प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरू हुई थी। इस पद के लिए 5585 आवेदन मिले थे। चयन समिति ने पहले 111 उम्मीदवारों का चयन किया और उनके ऑनलाइन इंटरव्यू लिए। इसके बाद 16 उम्मीदवारों को अयोध्या बुलाकर आमने-सामने साक्षात्कार किया गया।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने अंतिम तीन नामों की सूची ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंपी थी। ट्रस्ट की बैठक में विचार-विमर्श के बाद एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम मुहर लगी।सीईओ को मिलेंगी बड़ी जिम्मेदारियाँ
राम मंदिर ट्रस्ट के इतिहास में पहली बार CEO का पद बनाया गया है। ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट डीड में संशोधन कर CEO के अधिकार और जिम्मेदारियाँ भी तय की गईं। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने पहले ही कहा था कि मंदिर जैसे बड़े संस्थान के संचालन के लिए पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति ज़रूरी है।
CEO मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक, वित्तीय और क़ानूनी मामलों की निगरानी करेंगे। इसके अलावा वे संस्थान के लिए दीर्घकालिक योजनाएँ तैयार करेंगे और कामकाज को अधिक पेशेवर तरीके से संचालित करेंगे। ट्रस्ट ने साफ़ किया है कि CEO सरकार के हस्तक्षेप से स्वतंत्र होकर काम करेंगे और सीधे ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करेंगे।
संगठन को मज़बूत बनाने की जिम्मेदारी
CEO की भूमिका केवल प्रशासन तक सीमित नहीं होगी। उन्हें ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाना, नई व्यवस्थाएँ विकसित करना, नियमों का पालन सुनिश्चित करना और भविष्य की ज़रूरतों के अनुसार संगठनात्मक ढाँचा तैयार करने की ज़िम्मेदारी भी सौंपी गई है। वे ट्रस्ट के सबसे वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी होंगे और मंदिर के दीर्घकालिक विकास की योजनाओं की निगरानी करेंगे।
ट्रस्ट में नए पदाधिकारी भी नियुक्त
बैठक में ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे में अन्य अहम बदलाव भी किए गए। गोविंद देव गिरि को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया। महेश भगचंदका को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके अलावा ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों- मोहन पांडेय, निर्मला यादव, महेश भगचंदका को भी शामिल किया गया है। इन नियुक्तियों के साथ ट्रस्ट का प्रशासनिक ढांचा और मजबूत करने की कोशिश की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी रहेगा विशेष ध्यान
ट्रस्ट की बैठक में राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। इसके लिए महासचिव की अध्यक्षता में स्थायी स्थानीय सुरक्षा समन्वय समिति बनाने का फैसला किया गया है। यह समिति मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेगी और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा ट्रस्ट के लिए आधिकारिक प्रेस प्रवक्ता नियुक्त करने का प्रस्ताव भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहा।
दान से जुड़े मामले की भी हुई समीक्षा
बैठक में मंदिर में मिले दान से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच की भी समीक्षा की गई। ट्रस्ट ने इस मामले में चल रही विशेष जांच दल यानी SIT की जांच और सुप्रीम कोर्ट में लंबित कानूनी कार्यवाही की स्थिति पर भी चर्चा की।
गौरतलब है कि दान से जुड़े कथित विवाद के बाद 26 जून को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इससे एक दिन पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी।
प्रशासनिक बदलाव का नया दौर
राम मंदिर ट्रस्ट की यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पहली बार CEO की नियुक्ति, नए पदाधिकारियों का चयन, ट्रस्ट डीड में संशोधन और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव आने वाले वर्षों में राम मंदिर के संचालन की दिशा तय करेंगे। ट्रस्ट का कहना है कि इन बदलावों का मक़सद मंदिर के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाना है, ताकि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और भविष्य की ज़रूरतों के अनुसार व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।