कांग्रेस ने शुक्रवार को रूसी तेल पर अमेरिकी आदेश को लेकर मोदी सरकार को घेर लिया। कांग्रेस ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दिए जाने के बाद यह 'अमेरिकी ब्लैकमेल' कब तक जारी रहेगा। पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया है कि क्या भारत की विदेश नीति अब अमेरिकी दबाव के आगे झुक रही है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर जोरदार हमला बोला है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच रूसी तेल खरीद पर 30 दिन की अस्थायी छूट की घोषणा की। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ऊर्जा नीति के तहत तेल और गैस उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा, "वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी 30 दिन की छूट जारी कर रहा है।" 
बेसेंट ने एक्स पर पोस्ट में आगे कहा, "भारत अमेरिका का एक आवश्यक साझेदार है, और हम पूरी उम्मीद करते हैं कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी। यह अंतरिम उपाय ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने की कोशिश से उत्पन्न दबाव को कम करेगा।"

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कांग्रेस ने राहुल का पुराना बयान याद दिलाया

कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि 11 फरवरी, 2026 को लोकसभा में बोलते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के खतरे में होने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अमेरिका ही तय करेगा कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं और किससे नहीं। चाहे रूस से खरीदना हो या ईरान से, अमेरिका ही फैसला करेगा। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री फैसला नहीं करेंगे।” सबूत सबके सामने है - और इस समझौतावादी प्रधानमंत्री की चुप्पी शर्मनाक है।

राहुल गांधी का हमला

नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमारे लोगों की सामूहिक इच्छा से पैदा होती है। यह हमारे इतिहास, हमारी भौगोलिक स्थिति और सत्य एवं अहिंसा पर आधारित हमारी आध्यात्मिक विचारधारा में निहित होनी चाहिए। आज हम जो देख रहे हैं वह नीति नहीं है। यह एक भ्रष्ट व्यक्ति के शोषण का परिणाम है।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर हिंदी में कवितानुमा पोस्ट में इस पर तंज कसा:
ट्रम्प का नया खेल
दिल्ली दोस्त को कहा
पुतिन से ले सकते हो तेल
कब तक चलेगा
यह अमेरिकी ब्लैकमेल
रमेश का यह बयान केंद्र सरकार पर सीधा हमला है, जिसमें अमेरिकी दबाव को 'ब्लैकमेल' करार दिया गया है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का हमला

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अमेरिका की भाषा पर सवाल उठाते हुए भारत की स्वतंत्रता पर गंभीर चिंता जताई:"30 दिन की छूट जारी करना- यह घमंडी भाषा नव-साम्राज्यवादी अहंकार से भरी हुई है। क्या हम कोई केला गणराज्य हैं कि हमें अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों के लिए अमेरिका से अनुमति चाहिए?"


मनीष तिवारी ने कहा: "एक अन्यथा बहुत बातूनी सरकार का मौन बहरेपन जैसा है। क्या यह सरकार संप्रभुता का मतलब समझती भी है?"

भारत को अमेरिकी छूट ईरान के वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव के कारण दी गई है, लेकिन आलोचक इसे अमेरिकी प्रभाव का हिस्सा मानते हैं। अमेरिका का मानना है कि यह उपाय वैश्विक ऊर्जा प्रवाह बनाए रखेगा, लेकिन भारत को अमेरिकी तेल की ओर धकेलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस का सवाल है कि क्या मोदी सरकार अमेरिकी दबाव के आगे झुक रही है, और यह 'ब्लैकमेल' कब तक जारी रहेगा।