पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच घोषित नाजुक सीजफायर के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों का दौरा कर रहे हैं। माना जा रहा है कि भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों के तहत इन्हें पश्चिम एशिया के देशों के दौरे पर भेजा है। होर्मुज स्ट्रेट को फिर से सुरक्षित खुलवाने का प्रयास करना भी एक मक़सद है, ताकि तेल, एलएनजी और एलपीजी की सप्लाई बिना रुके भारत पहुंच सके।
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है, लेकिन भारत सीधे क्षेत्र के अपने प्रमुख साझेदारों ओमान, यूएई, सऊदी अरब और कतर से संपर्क कर रहा है।

जयशंकर का दौरा

विदेश मंत्री एस जयशंकर गुरुवार को मॉरीशस के पोर्ट लुई पहुंच गए। यहां वे दो दिनों तक 9वीं भारतीय महासागर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के दौरान वे ओमान, सऊदी अरब, मिस्र, श्रीलंका, मालदीव, सेशेल्स, मेडागास्कर, तंजानिया, थाईलैंड, सिंगापुर, कंबोडिया, भूटान और बांग्लादेश के मंत्रियों से द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। ये बैठकें पिछले 40 दिनों के संघर्ष के बाद पैदा हुई चुनौतियों पर केंद्रित रहेंगी।
इसके बाद 11 अप्रैल को जयशंकर दो दिवसीय दौरे पर संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई जाएंगे। यूएई पर ईरानी हमलों का असर पड़ा है। वहां अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले हुए, आर्थिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और कुछ नागरिक भी हताहत हुए। दुबई और अबू धाबी की सुरक्षित छवि को धक्का लगा है। यूएई में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर यूएई के नेतृत्व से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग की समीक्षा करेंगे और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगे।

हरदीप सिंह पुरी का क़तर दौरा

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी गुरुवार को दो दिवसीय दौरे पर कतर पहुंच रहे हैं। कतर भारत का एलएनजी और एलपीजी का सबसे बड़ा स्रोत है। 

रिपोर्ट है कि पुरी की बैठक में भारत को एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता देने का मुद्दा सबसे ऊपर रहेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि मंत्री के दौरे की विस्तृत जानकारी उनके लौटने के बाद दी जाएगी।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम?

भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरत का लगभग आधा हिस्सा एलएनजी आयात से पूरा करता है। इनमें से 55-60 प्रतिशत सप्लाई पश्चिम एशिया से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आती है। कतर अकेला भारत के कुल एलएनजी आयात का 41.4 प्रतिशत हिस्सा देता है। 2024-25 में भारत ने 27 मिलियन टन एलएनजी आयात किया, जिसमें से 11.2 मिलियन टन यानी 41.4% कतर से आया। कतर के साथ भारत के लंबे समय के अनुबंध हैं। एलपीजी में भारत की आयात निर्भरता करीब 60 प्रतिशत है और 90 प्रतिशत सप्लाई होर्मुज से गुजरती है, जिसमें कतर सबसे बड़ा सप्लायर है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई। मार्च की शुरुआत से कोई एलएनजी टैंकर पर्शियन गल्फ से भारत नहीं आया। केवल 8 भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकर ही गुजर सके। इसके कारण सरकार को कुछ उद्योगों में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति कम करनी पड़ी ताकि जरूरी क्षेत्रों को गैस मिल सके। एलपीजी की कमी और गंभीर रही, इसलिए घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए व्यावसायिक और औद्योगिक ग्राहकों को कम दिया गया।
इसके अलावा, कतर के रास लफ्फान औद्योगिक शहर पर हमले में कतर एनर्जी की बड़ी एलएनजी फैसिलिटी को नुकसान पहुंचा, जहां से भारत को लगभग सारी एलएनजी आती है। ईरान ने कहा है कि होर्मुज से जहाजों का सुरक्षित गुजरना उसके सशस्त्र बलों के समन्वय और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखकर संभव होगा।
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बहरहाल, जानकारों का कहना है कि भारत की यह कूटनीति सिर्फ ऊर्जा सप्लाई बहाल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में स्थिरता और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है। पश्चिम एशिया में स्थिति अभी भी बेहद नाजुक है। अगर सीजफायर टिकता है और होर्मुज फिर से खुलता है तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो सकती है, वरना कीमतें बढ़ने और कमी का खतरा बना रहेगा।