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ईवीएम की संवैधानिक वैधता को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट विचार करने को तैयार

देश के चुनावों में जिस ईवीएम में अक्सर गड़बड़ी के आरोप राजनीतिक दल लगाते रहे हैं उसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है और सुनवाई के लिए विचार करने को सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के एक प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करने के लिए सहमत हो गया। अधिनियम में उस प्रावधान के कारण देश में चुनावों के लिए बैलेट पेपर के बजाय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की शुरुआत हुई थी।

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मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील एमएल शर्मा की दलीलें सुनीं और कहा कि वह उनके मामलों को सूचीबद्ध करने पर विचार करेंगे। शर्मा ने अपने व्यक्तिगत स्तर पर याचिका दायर की। शर्मा ने कहा है कि जनप्रतिनिधित्व क़ानून की धारा 61ए संसद द्वारा पारित नहीं की गई थी और इसलिए इसे लागू नहीं किया जा सकता है। धारा 61ए ईवीएम के इस्तेमाल की अनुमति देती है।

वैसे, ईवीएम में कथित गड़बड़ी पर लगातार विवाद होता रहा है। राजनीतिक दल ईवीएम पर अब हर चुनाव में सवाल उठाते रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही मायावती ने कहा था कि 'अगर बीजेपी ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग और ईवीएम में हेरफेर नहीं किया, तो बीजेपी यह चुनाव हार जाएगी।' मायावती पहली नेता नहीं हैं जो इस पर सवाल उठा रही हैं। 

ईवीएम पर सवाल उठाने वालों में समाजवादी पार्टी से लेकिन कांग्रेस और बीजेपी जैसे दल भी शामिल हैं। बीजेपी, कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दल कभी न कभी ईवीएम से छेड़छाड़ किए जाने के आरोप लगा चुके हैं।

कर्नाटक से लेकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, और गुजरात तक और निकाय चुनाव से लेकर लोकसभा चुनावों तक में ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। ये गड़बड़ियाँ ईवीएम की मॉक टेस्टिंग से लेकर मतदान के दौरान भी लगी हैं। विपक्षी पार्टियाँ आरोप लगाती रही हैं। चुनाव आयोग तकनीकी ख़ामियाँ बताकर आरोपों को खारिज करता रहा है। लेकिन क्या इतनी शिकायतें संदेह नहीं पैदा करतीं?

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जनवरी 2019 में लंदन में सैयद शुजा नाम के एक साइबर एक्सपर्ट ने प्रेस कांफ्रेंस कर दावा किया था कि भारत की ईवीएम मशीनों को हैक किया जाता है और चुनावों को जीता जाता है। शुजा ने यह भी दावा किया था कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भी ईवीएम में धाँधली हुई थी। हालाँकि चुनाव आयोग ने साफ़ किया था कि इन मशीनों में गड़बड़ी नहीं की जा सकती है।

बता दें कि 2009 में बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने भी बाक़ायदा प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि ईवीएम फूलप्रूफ नहीं है और मशीनों में छेड़छाड़ कर चुनावों को प्रभावित किया जा सकता है। पार्टी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने ईवीएम में धांधली हो सकती है यह साबित करने के लिए एक किताब भी लिख डाली थी।

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