पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब नहीं दिए जाने को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के दावे पर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। सर्जियो गोर के बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवालों से डरने का आरोप लगाया, जबकि मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया गया है कि विदेश मंत्रालय ने सफाई दी है कि किसी भी वीवीआईपी बैठक से पहले सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था को लेकर चर्चा करना सामान्य और तय प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

यह बवाल तब खड़ा हुआ जब एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया कि फ्रांस में आयोजित जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की द्विपक्षीय बैठक से पहले भारतीय पक्ष ने अनुरोध किया था कि मीडिया से कोई सवाल न लिया जाए। गोर के अनुसार, उन्होंने यह बात राष्ट्रपति ट्रंप को बताई तो ट्रंप ने कहा, 'ठीक है, कोई समस्या नहीं।' लेकिन बैठक शुरू होने के बाद घटनाक्रम बदल गया।
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सर्जियो गोर ने दावा किया, 'मैंने राष्ट्रपति से कहा कि भारतीय पक्ष कोई सवाल नहीं चाहता। उन्होंने कहा, ठीक है, कोई बात नहीं। फिर मीटिंग शुरू हुई, प्रेस अंदर आई, वहाँ शायद 50 कैमरे रहे होंगे, राष्ट्रपति यहाँ बैठे थे, प्रधानमंत्री वहाँ बैठे थे, दोनों ने कुछ मिनट बात की। जैसे ही उनकी बात ख़त्म हुई, राष्ट्रपति ने सबसे पहले कैमरे की तरफ़ देखा और पूछा, कोई सवाल?' इसके बाद क़रीब 45 मिनट तक प्रेस कॉन्फ्रेंस चली, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर सवाल-जवाब हुए। उन्होंने कहा कि उस दौरान हर विषय पर चर्चा हुई।

कांग्रेस ने साधा प्रधानमंत्री पर निशाना

सर्जियो गोर के बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर बड़ा हमला बोला। कांग्रेस ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि प्रधानमंत्री पत्रकारों के सवालों का सामना करने से बचते हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि यदि भारतीय पक्ष ने वास्तव में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल न लेने का आग्रह किया था, तो यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री कठिन सवालों से बचना चाहते हैं।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कहा, 'मोदी को सवालों से कितना डर लगता है, इसका सबूत सामने आ गया है।' पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने लंबे कार्यकाल में कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। कांग्रेस ने यह भी याद दिलाया कि व्हाइट हाउस में एक अवसर पर पत्रकारों के सवालों के दौरान प्रधानमंत्री असहज दिखाई दिए थे।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, 'ट्रंप नरेंद्र मोदी की कही बात भूले नहीं थे। उन्होंने बस उस पर ध्यान नहीं दिया। जिस प्रधानमंत्री की साख पर सवाल उठते हों, उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता। यह देखना दुखद है कि नरेंद्र मोदी के दौर में भारत की हालत क्या हो गई है। कभी भारत एक ताकतवर देश हुआ करता था। आज उसे हल्के में लिया जाता है। मोदी प्रेस की आज़ादी से इतना क्यों डरते हैं- देश में भी और विदेश में भी?'

विदेश मंत्रालय ने दी सफाई

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार विवाद बढ़ने के बाद विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि किसी भी उच्चस्तरीय विदेशी दौरे से पहले कार्यक्रमों की रूपरेखा और मीडिया व्यवस्था पर चर्चा होना पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, 'नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था को लेकर पहले से बातचीत करना सामान्य प्रक्रिया है। भारतीय पक्ष ने भी केवल अपनी मानक प्रक्रिया से अवगत कराया था।'

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रत्याशित शैली को देखते हुए पहले से सतर्क रहते हैं। उन्होंने मिशाल देते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के नेताओं के साथ ट्रंप की बातचीत भी काफी अप्रत्याशित रही है, इसलिए भारत ने भी सावधानीपूर्ण रुख अपनाया।

जी7 बैठक में किन मुद्दों पर हुई थी चर्चा?

जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कई अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज में बढ़ते तनाव और जहाजों पर हो रहे हमलों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि दुनिया भर में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक समुद्री परिवहन क्षेत्र में काम करते हैं और उनकी सुरक्षा भारत के लिए बेहद अहम है।

इस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के प्रति समर्थन जताते हुए कहा, 'अगर कोई इस व्यक्ति (पीएम मोदी) पर हमला करेगा तो अमेरिका भारत के साथ खड़ा होगा।' उन्होंने भविष्य में भारत आने के संकेत भी दिए थे।
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राजनीतिक विवाद तेज

सर्जियो गोर के बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर कांग्रेस इसे प्रधानमंत्री की प्रेस से दूरी और सवालों से बचने की प्रवृत्ति बता रही है, वहीं सरकार का कहना है कि यह किसी भी उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक से पहले अपनाई जाने वाली सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी और इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। अब इस पूरे विवाद ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया से सीधे संवाद को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।