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शरद पवार ने सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को किया बर्खास्त 

महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक उठापटक के बीच एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को पार्टी से बर्खास्त कर दिया है। एनसीपी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने इन बागी नेताओं पर कार्यवाही की मांग की थी। सुले ने ट्विटर पर लिखा था कि सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने दो जुलाई को पार्टी संविधान और नियमों का सीधा उल्लंघन किया। जो कि पार्टी की सदस्यता से परित्याग और अयोग्यता के समान था। उन्होंने पार्टी नेता शरद पवार से इन दोनों नेताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की थी। उन्होंने मांग करते हुए लिखा है कि संसद सदस्यों प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी के समक्ष भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता याचिका दायर करें। 
सुप्रिया सुले ने शरद पवार को इस मामले में भेजे अपने पत्र में लिखा है कि पार्टी से बागी हुए 9 विधायकों को समर्थन देने का इन दो सांसदों का यह फैसला पार्टी अध्यक्ष की अनुमति के बिना और सदस्यों को विश्वास में लिए बिना लिया गया है। ये दल-बदल पार्टी अध्यक्ष की जानकारी या सहमति के बिना इतने गुप्त तरीके से हुई है जो पार्टी छोड़ने के समान है। इससे स्पष्ट है कि ये दोनों सांसद अब एनसीपी के उद्देश्यों और विचारधारा से सहमत नहीं हैं। 
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इन नेताओं पर क्या कहा था शरद पवार ने 

इससे पहले रविवार को शरद पवार ने इन नेताओं की बगावत पर कहा था कि, मैं प्रफुल्ल पटेल और तटकरे को छोड़कर किसी से नाराज नहीं हूं। मैंने उन्हें पार्टी महासचिव नियुक्त किया था, लेकिन उन्होंने पार्टी अध्यक्ष के दिशा निर्देशों को नहीं माना और गलत रास्ता अपना लिया। उन्हें उस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। 

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प्रफुल्ल पटेल को करना पड़ा कड़े सवालों का सामना 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और शरद पवार के करीबी सहयोगी रहे प्रफुल्ल पटेल को सोमवार को मीडिया के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। वह  पॉवर शेयरिंग पर बैठक के लिए अजीत पवार के आवास पर पहुंचे थे। उनसे मीडिया ने सवाल पूछा कि, क्या उन्होंने पार्टी और शरद पवार को धोखा दिया है ?प्रफुल्ल पटेल एनसीपी के बागी नेताओं के साथ दिख रहे हैं। रविवार को राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भी वह उपस्थित थे, जहां अजीत पवार और आठ अन्य एनसीपी नेता पार्टी से बगावत करते हुए महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हुए थे। 
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क़मर वहीद नक़वी
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