शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 सांसद बुधवार 17 जून को दिल्ली पहुंच रहे हैं। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे इन बागी सांसदों के साथ फिर बीजेपी की टॉप लीडरशिप से मुलाकात करेंगे। महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर जारी है।
शिवसेना (यूबीटी) के कुछ लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 6 लोकसभा सांसद बुधवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि ये सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर अलग गुट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। एकनाथ शिंदे भी बुधवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं।
संजय राउत का हर सांसद को 15 करोड़ मिलने का दावा
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत, जो सोमवार से दिल्ली में ही हैं, ने एक्स पर पोस्ट किया, “अपना सपना मनी मनी! यह चौंकाने वाला और घिनौना है कि महाराष्ट्र के सांसदों को साइड बदलने के लिए आज रात 15 करोड़ रुपये प्रत्येक ऑफर किए जा रहे हैं।”
शिवसेना यूबीटी के किस सांसद को क्या मिलेगा, अटकलें
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि परभनी सांसद संजय जाधव को केंद्र में मंत्री पद का ऑफर मिला है, साथ ही उनके क्षेत्र के लिए भारी फंडिंग का आश्वासन दिया गया है। हिंगोली सांसद नागेश पाटील अष्टीकर को भी क्षेत्र विकास के लिए फंड और 2029 के चुनाव में टिकट का वादा किया गया है। उद्धव ठाकरे के करीबी माने जाने वाले सांसद ओमराजे निंबालकर मंगलवार शाम से दिल्ली में हैं।
शिरडी सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे शिंदे गुट में शामिल होने का फैसला कर चुके हैं, क्योंकि उन्हें ठाकरे गुट में भविष्य नहीं दिख रहा है। इससे पहले संजय राउत ने दावों को खारिज करते हुए कहा था कि छह सांसदों के दिल्ली जाने और शिंदे गुट में शामिल होने की कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारा पार्टी कैडर बेस्ड है। किसी को अलग गुट बनाने की कोई जानकारी नहीं है।”
क्या है 'ऑपरेशन टाइगर'?
सत्तारूढ़ एकनाथ शिंदे गुट के नेताओं ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। शिंदे गुट के एमएलसी (MLC) कृपाल तुमाने ने इन खबरों की पुष्टि करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। कृपाल तुमाने ने राजनीतिक हालात की तुलना एक मेडिकल सर्जरी से करते हुए कहा: "जैसे किसी मरीज के ऑपरेशन से पहले जांच की जाती है, ठीक उसी तरह 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। 7 सांसद और 16 विधायक हमारे संपर्क में हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं। मानसून सत्र (Monsoon Session) शुरू होने से पहले यह पूरा ऑपरेशन पूरा कर लिया जाएगा।"इसके साथ ही शिंदे सरकार में मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी कहा कि शिवसेना के दरवाजे सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं के लिए 24 घंटे और 365 दिन खुले हैं। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों को उनके निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े ठेके और काम देने का भी भरोसा दिया गया है।
उद्धव ठाकरे ने 22 जून को बैठक बुलाई
उद्धव ठाकरे ने 22 जून को सभी विधायकों की बैठक बुलाई है, जो विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन है। शिवसेना (यूबीटी) के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 20 विधायक और 6 एमएलसी हैं। यह घटनाक्रम शिवसेना के भीतर सत्ता संघर्ष को नया मोड़ दे रहा है। उद्धव ठाकरे ने पिछले रविवार को मुंबई में अपने निवास 'मातोश्री' पर पार्टी के लोकसभा सांसदों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई थी। हालांकि, 9 सांसदों में से केवल 4 ही इस बैठक में मौजूद रहे। जबकि बाकी 5 सांसदों ने वर्चुअली (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए) या फोन पर हिस्सा लिया। बैठक में कम उपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में संदेह को और गहरा कर दिया है।
खबरों के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने साफ किया है कि वे किसी को जबरदस्ती पार्टी में नहीं रोकेंगे। उन्होंने कहा कि जिन्हें जाना है वे जाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन बालासाहेब की शिवसेना छोड़ने वालों को बाद में पछताना पड़ेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दलबदल विरोधी कानून (Anti-defection Law) के तहत अयोग्यता से बचने के लिए उद्धव गुट के कुल 9 सांसदों में से कम से कम दो-तिहाई (यानी 6 सांसदों) का एक साथ टूटना जरूरी है। यह पूरी राजनीतिक उठापटक ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर भी बड़ी बगावत की खबरें आई थीं, और अब महाराष्ट्र की इस हलचल ने विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) की चिंताएं बढ़ा दी हैं।