अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान, सोने, चांदी और आभूषणों की चोरी और गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। सोमवार 22 जून को को शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में भाजपा की तुलना सोमनाथ मंदिर को लूटने वाले आक्रमणकारी महमूद गजनवी से कर दी है।

सामना के संपादकीय में गंभीर आरोप

'सामना' के संपादकीय में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि देश अब देख रहा है कि भाजपा के लिए 'मंदिर विकास' का असल मतलब क्या है। संपादकीय के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
  • दान पेटियों की लूट: पार्टी का आरोप है कि अयोध्या के राम मंदिर में भगवान के दान बक्से, सोने, चांदी और गहनों को बेरहमी से लूटा गया है।
  • कारसेवकों का अपमान: संपादकीय में कहा गया, "राम मंदिर के लिए कारसेवकों ने अपना खून बहाया और सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन भाजपा ने उसी मंदिर को लूट लिया। जिस तरह महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा था, उसी तरह भाजपा ने राम मंदिर को लूटा है।"
  • कानून व्यवस्था पर सवाल: पार्टी ने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बताते हुए कहा कि जो लोग राम मंदिर की रक्षा नहीं कर सकते, वे कोल्हापुर के अंबाबाई मंदिर के विकास की बात करने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं।
  • अमित शाह पर निशाना: शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में देश के कई बड़े मंदिरों को लूटा गया है और ये कथित लुटेरे भाजपा के भीतर ही मौजूद हैं।

अमित शाह का बयान और महाराष्ट्र की राजनीति

यह तीखा हमला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोल्हापुर दौरे के बाद आया है, जहां उन्होंने अंबाबाई मंदिर के जीर्णोद्धार और कॉरिडोर विकास को लेकर बात की थी। अपने संबोधन के दौरान शाह ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट को "असली शिवसेना" बताया था। इसी मुद्दे पर सामना का संपादकीय है। सामना का संपादकीय इन लाइनों से शुरू होता है कि अमित शाह को प्रधानमंत्री बनने की जल्दी है।
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यह संपादकीय ऐसे समय आया है जब उद्धव ठाकरे गुट (यूबीटी) में एक और बड़ी बगावत की खबरें गर्म हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं, जिसकी औपचारिक घोषणा जल्द होने की उम्मीद है। विपक्ष इसे संसद के मानसून सत्र से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रहा है।

अमित शाह पर सीधा हमला

सामना ने लिखा है- अमित शाह काफी समय से देश के गृहमंत्री हैं। यह उनकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भाग्य है। देश के लिए तो यह दुर्भाग्य है। इन्हीं अमित शाह ने कल कोल्हापुर में कहा कि, ‘यह देश कोई ‘धर्मशाला’ नहीं है। यहां केवल इसी देश में पैदा हुए लोग रहेंगे।’ शाह ने यह भी कहा कि, ‘हम देशभर से एक-एक घुसपैठिए को ढूंढ़कर बाहर निकालेंगे।’ शाह ने अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है, लेकिन यह सब प्रत्यक्ष रूप से अमल में कब आएगा? देश धर्मशाला नहीं है। कोई भी आता है और अपना बिस्तरा फैलाकर रहने लगता है। न कोई नियम है, न कोई कानून। अवैध रूप से रहना और गंदगी फैलाना, इसे कोई भी मान्यता नहीं देगा। इसलिए शाह के इस रुख का समर्थन होना ही चाहिए। सवाल सिर्फ इतना है कि भारत ‘धर्मशाला’ बन गया है, यह तय करनेवाले अमित शाह कौन होते हैं? शाह कम से कम दो ‘टर्म’ से गृहमंत्री हैं और अगर देश धर्मशाला बना है तो इसके लिए पूरी तरह से गृहमंत्री ही जिम्मेदार हैं। मोदी बारह साल से प्रधानमंत्री हैं।

सामना ने कहा- भगवान की दानपेटियों पर डकैती

सामना ने लिखा है- यह देश ने अयोध्या के राम मंदिर में अब देख लिया है। राम मंदिर का दान, सोना, चांदी, गहने सीधे लूट लिए गए। कारसेवकों ने राम मंदिर के लिए खून बहाया, शहादत दी और भाजपा वालों ने उसी मंदिर को लूट लिया। गजनी के महमूद ने जैसे सोमनाथ को लूटा, वैसे ही भाजपा ने राम मंदिर को लूटा। जरा इस पर भी बोलिए। अंबाबाई मंदिर में कम से कम ऐसी चोरियां-मक्कारियां तो नहीं हुई हैं। अयोध्या में दानपेटी पर डकैती कानून-व्यवस्था का दिवाला निकलना है। राम मंदिर की सुरक्षा तो कर नहीं पाते और चले हमारे अंबाबाई मंदिर का विकास करने। 
सामना ने लिखा है- देश के कई प्रमुख मंदिरों की लूट पिछले दस वर्षों में हुई और ये सभी लुटेरे भाजपा में और श्रीमान अमित शाह की ही गोद में बैठे दिखाई देते हैं। शाह कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी की गोद में उद्धव ठाकरे बैठे हैं और वह पार्टी घुसपैठियों को ‘वोट बैंक’ के रूप में इस्तेमाल कर अपना अस्तित्व बचाए रखना चाहती है। यह उनकी महाराष्ट्र-विरोधी उल्टी (अहंकार की बदबू) है। ये खुद राम मंदिर के डकैत हैं, लोकतंत्र के हत्यारे हैं। स्वतंत्रता संग्राम में जिनका कोई योगदान नहीं रहा, वे लोग ‘ठाकरे’ की तरफ उंगली उठाते हैं। यह शाह के मानसिक संतुलन बिगड़ने का लक्षण है। 
अमित शाह पर हमला तेज़ करते हुए सामना ने लिखा- अमित शाह के दिमाग को फालिज मारने का एक और लक्षण यह है कि कोल्हापुर में उन्होंने ‘मिंधे’ (शिंदे) को शिवसेना प्रमुख घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में जब शिवसेना का मुकदमा चल रहा है, तब गृहमंत्री खुद ही फैसला सुना देते हैं कि शिवसेना किसकी है। यह न्याय व्यवस्था में शाह की घुसपैठ है। शाह को प्रधानमंत्री बनने की जल्दी मची है और वह मिंधे जैसे झुंडों की मदद से मोदी को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। मोदी को अब सावधान हो जाना चाहिए।
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राम मंदिर में दान चोरी का मामला अन्य विपक्षी दलों ने भी उठाया

राम मंदिर के दान से जुड़ा यह विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है, और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार को घेरा है:

  • अखिलेश यादव (सपा प्रमुख): समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, "जो रिपोर्ट सामने आ रही हैं, वे बेहद परेशान करने वाली हैं। भगवान राम के प्रति लोगों की अटूट आस्था है और किसी ने नहीं सोचा था कि उनके चढ़ावे को लेकर ऐसी खबरें आएंगी। सरकार ने SIT तो बना दी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या SIT को निष्पक्ष रूप से काम करने दिया जाएगा?"
  • अरविंद केजरीवाल (आप राष्ट्रीय संयोजक): आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले की हैंडलिंग पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े पैमाने पर दान की चोरी के दावे होने के बावजूद अब तक इस मामले में कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है। केजरीवाल शुक्रवार 26 जून को अयोध्या दर्शन के लिए जा रहे हैं।