SIR के तीसरे चरण में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 6 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए। दिल्ली में 32.7% और महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा नाम हटे। एसआईआर को लेकर सबसे ज्यादा विवाद पश्चिम बंगाल और बिहार में हुआ। महाराष्ट्र और दिल्ली में ज्यादा विरोध नहीं हो रहा है।
एसआईआर के बाद वोटरलिस्ट से 6 करोड़ से ज्यादा नाम बाहर
निर्वाचन आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तीसरे चरण में अब तक प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 6.15 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। तीसरे चरण में 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जा रहा है। उपलब्ध ड्राफ्ट सूचियों के मुताबिक इन क्षेत्रों में पहले दर्ज करीब 36.08 करोड़ मतदाताओं में से 29.93 करोड़ नाम बरकरार रखे गए हैं, जबकि लगभग 6.15 करोड़ यानी 17.04% नाम हटाए गए हैं।
दिल्ली में सबसे ज्यादा कटौती
तीसरे चरण में अब तक सामने आए आंकड़ों में दिल्ली में मतदाता सूची में सबसे बड़ी प्रतिशत गिरावट दर्ज हुई है। दिल्ली की पुरानी मतदाता सूची में करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। SIR के मसौदे के बाद यह संख्या घटकर लगभग 97.53 लाख रह गई है। दिल्ली में करीब 47.56 लाख नाम हटाए गए, यानी कुल मतदाता आधार का लगभग 32.7%। दूसरे शब्दों में, दिल्ली की लगभग हर तीन में से एक पुरानी मतदाता प्रविष्टि मसौदा सूची से बाहर हो गई है।निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में हटाए गए नामों में करीब 43.32 लाख मतदाता ऐसे थे जो अनुपस्थित पाए गए या स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए। करीब 2.82 लाख मतदाताओं को मृत पाया गया, जबकि लगभग 1.41 लाख नाम डुप्लीकेट या एक से अधिक जगह दर्ज होने के कारण हटाए गए। आयोग के अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों के लगातार एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने वाली ‘फ्लोटिंग पॉपुलेशन’ के कारण यह आंकड़ा इतना अधिक हो सकता है।
महाराष्ट्र में भी सबसे ज्यादा नाम हटे
संख्या के लिहाज से महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए हैं। वहां SIR से पहले करीब 9.78 करोड़ मतदाता दर्ज थे। मसौदा सूची में 2.07 करोड़ नाम हटा दिए गए, जो कुल मतदाता सूची का करीब 21.16% है। यह किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में अब तक हटाए गए नामों की सबसे बड़ी संख्या है।
महाराष्ट्र में हटाए गए नामों में करीब 1.54 करोड़ ऐसे मतदाता हैं जिन्हें अनुपस्थित या दूसरी जगह स्थानांतरित पाया गया। करीब 34 लाख मतदाताओं को मृत बताया गया है।तीसरे चरण में किन राज्यों में SIR?
SIR का तीसरा चरण 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहा है। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं। केंद्रशासित प्रदेशों में दिल्ली, चंडीगढ़ तथा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव शामिल हैं। इस चरण में कुल करीब 36.7 करोड़ मतदाताओं को प्रक्रिया में शामिल किया गया था।अधिकांश राज्यों के मसौदा मतदाता रोल प्रकाशित हो चुके हैं। नागालैंड और त्रिपुरा के मसौदा रोल अभी प्रकाशित होना बाकी हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नागालैंड और त्रिपुरा में मसौदा सूची क्रमशः बाद की तारीखों में प्रकाशित होने की उम्मीद है।
SIR के पहले दो चरणों में भी करोड़ों नाम हटे
SIR की शुरुआत 24 जून 2025 को बिहार से हुई थी। बिहार में प्रक्रिया के बाद करीब 65 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इसके बाद दूसरे चरण में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की अंतिम मतदाता सूचियां प्रकाशित की गईं। इन राज्यों में मतदाता संख्या करीब 5.18 करोड़ घटकर 45.81 करोड़ रह गई थी। यह लगभग 10.2% की कमी थी।दूसरे चरण की प्रक्रिया में 66.88 लाख मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। इनमें सबसे ज्यादा करीब 25.47 लाख नाम उत्तर प्रदेश और 24.16 लाख नाम पश्चिम बंगाल से हटाए गए। इसके अलावा आपत्तियों और सुनवाई की प्रक्रिया के बाद 63.16 लाख नाम हटाए गए थे।
अंतिम सूची आने पर आंकड़ा और बढ़ सकता है
तीसरे चरण की मौजूदा संख्या अभी मसौदा मतदाता सूचियों पर आधारित है। इसलिए दावे-आपत्तियों और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची में यह आंकड़ा बदल सकता है। मौजूदा आंकड़ों को पहले दो चरणों के आंकड़ों के साथ जोड़ने पर SIR के तीनों चरणों में हटाए गए मतदाताओं की संख्या अंतिम सूचियां जारी होने के बाद 10-11 करोड़ से भी ऊपर जाने की संभावना जताई जा रही है।SIR पर राजनीतिक विवाद भी जारी
SIR को निर्वाचन आयोग मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाने की प्रक्रिया के रूप में पेश करता है। आयोग के मुताबिक इसमें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान कर सूची को अपडेट किया जा रहा है।हालांकि विपक्षी दल और नागरिक अधिकार समूह लंबे समय से इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि पर्याप्त दस्तावेज न होने या प्रक्रिया संबंधी दिक्कतों के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक और पात्र मतदाता भी सूची से बाहर हो सकते हैं। यही वजह है कि SIR पिछले एक साल से निर्वाचन आयोग और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक विवाद का मुद्दा बना हुआ है।
मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग द्वारा SIR कराने के फैसले की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था। इसके बावजूद मतदाता नामों के बड़े पैमाने पर हटाए जाने को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है।
SIR के तीसरे चरण के मसौदा आंकड़े यह दिखाते हैं कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ है। 6.15 करोड़ से अधिक नाम हटना, दिल्ली में 32.7% और महाराष्ट्र में 21.16% की कटौती इस पूरी प्रक्रिया के पैमाने को दर्शाती है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि दावे-आपत्तियों के बाद अंतिम सूची में कितने नाम वापस जुड़ते हैं और कितने नाम स्थायी रूप से बाहर रहते हैं।