संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को उनके पद से हटाने की मांग की है। किसान संगठन का आरोप है कि पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते में राष्ट्र से विश्वासघात किया है, जिससे भारतीय किसानों के हितों को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

एसकेएम ने रविवार (22 फरवरी 2026) को राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में कहा कि मोदी सरकार अमेरिका के दबाव में झुक गई है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता और संप्रभुता खतरे में पड़ गई है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निर्देश देने की अपील की है कि वे किसानों के लिए हानिकारक शर्तों पर यह समझौता हस्ताक्षर न करें। साथ ही, वित्त मंत्रालय के हालिया डेमी ऑफिशियल आदेश के खिलाफ भी दिशा-निर्देश मांगे गए हैं, जिसमें केरल सरकार से धान किसानों को बोनस देने की प्रथा समाप्त करने को कहा गया है।

एसकेएम ने आरोप लगाया कि अंतरिम व्यापार समझौते की शर्तें भारतीय अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए घातक हैं। उन्होंने कहा, “वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, जो मुख्य वार्ताकार हैं, के सभी बयानों से यही साबित होता है कि सरकार अमेरिका के आदेशों के सामने खड़ी होने में असमर्थ या अनिच्छुक है। वो लगातार झूठ बोल रहे हैं।”

ताज़ा ख़बरें
एसकेएम के पत्र में उठाए गए खास प्वाइंट:
  • 19 अगस्त 2025 को कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने से घरेलू कपास की कीमतें गिर गईं, जिससे कपास किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। भारत कपास उत्पादन में अमेरिका से दोगुना है, फिर भी आयात बढ़ रहा है।
  • समझौते से सेब के आयात से देश भर में 55 लाख से अधिक सेब किसान परिवार संकट में पड़ जाएंगे।
  • मक्का को ड्राई डिस्टिल्ड ग्रेन (डीडीजी) के रूप में आयात करने से घरेलू कीमतें गिरेंगी, जिससे 120 लाख मक्का किसान प्रभावित होंगे।
  • इथेनॉल और मक्का के आयात से चीनी उद्योग को नुकसान होगा, जिससे लगभग 500 लाख गन्ना किसान प्रभावित होंगे।

एसकेएम ने सवाल उठाया कि जब कोई समझौता अभी हस्ताक्षरित नहीं हुआ है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा क्यों की? प्रधानमंत्री ने भारत को पक्षकार क्यों माना? संसद सत्र चल रहा था, फिर भी कोई बयान क्यों नहीं रखा गया? प्रधानमंत्री ने अभी तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया है।

किसान संगठन ने इसे किसानों के बीच गंभीर रोष का कारण बताया है और आगे संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी है। अभी तक सरकार या मंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह घटना किसानों के लंबे समय से चले आ रहे विरोध प्रदर्शनों और कृषि नीतियों से जुड़ी है, जिसमें एमएसपी, आयात-निर्यात नीतियां और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं।


समझौते में क्या है

भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा फरवरी 2026 में घोषित हुआ, जिसमें अमेरिका ने भारत पर लगाए 25% दंडात्मक टैरिफ को घटाकर 18% करने का वादा किया है। बदले में भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, कुछ कृषि उत्पादों (जैसे डीडीजी, सोयाबीन ऑयल, फल आदि) पर टैरिफ कम करने या हटाने, साथ ही अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान और ऊर्जा खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
देश से और खबरें
एसकेएम का आरोप है कि कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने से घरेलू कीमतें गिर गईं, सेब, मक्का और गन्ना किसानों पर गंभीर असर पड़ेगा, जिससे लाखों किसान परिवार प्रभावित होंगे। संगठन ने इसे भारत की कृषि आत्मनिर्भरता और संप्रभुता पर हमला बताया तथा प्रधानमंत्री से हानिकारक शर्तों पर हस्ताक्षर न करने की अपील की।

यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने का प्रयास है, लेकिन किसान संगठनों में भारी रोष है। एसकेएम ने आगे संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी है, जबकि सरकार इसे निर्यात बढ़ाने वाला लाभकारी बताती है।