नीट (NEET) पेपर लीक मामले और परीक्षाओं में कथित धांधलियों के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब और तेज हो गया है। प्रख्यात शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन सोमवार (13 जुलाई) को 16वें दिन में प्रवेश कर गया। वांगचुक की लगातार गिरती सेहत के बीच विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने उनके समर्थन में मोर्चा खोल दिया है।

सोनम वांगचुक का तेजी से गिरा वजन

'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित इस धरने में 28 जून से शामिल हुए सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। CJP द्वारा जारी हेल्थ अपडेट के अनुसार: 
वजन में गिरावट: पिछले 16 दिनों में वांगचुक का वजन 8.2 किलोग्राम कम हो चुका है।
ग्लूकोज का स्तर: उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल खतरनाक रूप से गिरकर 67 mg/dL पर पहुंच गया है।
रक्तचाप (Blood Pressure): उनका ब्लड प्रेशर 107/70 mm Hg रिकॉर्ड किया गया है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सरकार से भावुक अपील करते हुए कहा, "मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इसे अहंकार की लड़ाई न बनाएं, क्योंकि यहां इंसानी जिंदगी दांव पर लगी है। अपनी गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि जवाबदेही और परिपक्वता की निशानी है।"
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क्या हैं मुख्य मांगें?

जंतर-मंतर पर CJP का यह आंदोलन बीते 24 दिनों (20 जून) से जारी है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • परीक्षाओं में हुई धांधली और नीट पेपर लीक विवाद की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।

  • परीक्षा संबंधी दिक्कतों और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

  • देश में एक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली लागू की जाए।

इस आंदोलन के तहत आगामी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की भी योजना है।

उद्धव ठाकरे का खुला समर्थन: "यह राजनीतिक मुद्दा नहीं, देश का मामला है"

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सोनम वांगचुक और CJP के आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा: "देश में स्थिति बहुत अजीब है और यह सरकार असंवेदनशील हो चुकी है। यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है। पूरे देश को जागने की जरूरत है और सभी राजनीतिक दलों को इसके लिए एक साथ आना चाहिए।"
ठाकरे ने यह भी बताया कि सोनम वांगचुक उनसे मिलने आए थे और उन्होंने वांगचुक से भूख हड़ताल न करने का अनुरोध किया था क्योंकि इस सरकार को किसी की परवाह नहीं है। उन्होंने महाराष्ट्र को नीट पेपर लीक का केंद्र बताते हुए पूछा कि लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद करने वाले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने में क्या हर्ज है?

ठाकरे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और देश के अन्य नेताओं से अपील की कि वे पार्टी लाइन से ऊपर उठकर 20 जुलाई को होने वाले छात्रों के मार्च का समर्थन करें। उन्होंने एलान किया कि शिवसेना (UBT) के सांसद संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाएंगे।

विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों का जंतर-मंतर पर जमावड़ा

सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पहुंचा। AAP नेताओं ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनके प्रति एकजुटता व्यक्त की और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसके अलावा, सीपीआई(एम) [CPI(M)] के सांसद अमरा राम के साथ आंध्र प्रदेश और राजस्थान के वरिष्ठ वामपंथी नेताओं ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और 20 जुलाई के संसद मार्च को अपना समर्थन दिया।
प्रदर्शन स्थल पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े छात्र (नेहा, मनीष, दीपक और आमीन) भी एक अलग मंच पर पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिनकी हालत नाजुक बनी हुई है। छात्र संगठनों का कहना है कि सरकार के उदासीन रवैये के बावजूद उनका यह संघर्ष पीछे हटने वाला नहीं है।