सोनिया गांधी ने कहा है कि उनका संस्मरण ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ आने पर हंगामा होना तय है। उन्होंने कहा है कि दशकों तक दूसरे लोग उनकी कहानी सुनाते रहे, लेकिन अब अपनी बात कहने की बारी उनकी है। सोनिया के मुताबिक़ उनकी किताब से कुछ लोगों की राय उनके बारे में बदल सकती है, जबकि कुछ लोगों की राय और ख़राब हो सकती है। उन्होंने कहा कि किताब आएगी तो ‘तमाशा’ होना तय है।
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ में अपने निजी जीवन, परिवार से जुड़े अनुभवों और भारतीय राजनीति में अपने लंबे सफर को दर्ज किया है। किताब को लेकर जारी एक वीडियो में सोनिया गांधी ने एक ऐसा खुलासा किया है, जो गांधी परिवार और भारतीय राजनीति के इतिहास के एक अहम दौर से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि जब उनके पति राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया था, तब वह इस फैसले के पूरी तरह ख़िलाफ़ थीं।

‘अब तक दूसरों ने मेरी कहानी सुनाई, अब मेरी बारी है’

सोनिया गांधी ने अपनी किताब लिखने की वजह बताते हुए कहा कि लंबे समय तक दूसरे लोग उनकी कहानी बताते रहे हैं। अब वह खुद अपने अनुभवों और घटनाओं को अपने नजरिये से सामने रखना चाहती हैं। सोनिया गांधी के मुताबिक, संस्मरण लिखने से उन्हें उन घटनाओं का अपना पक्ष रखने का अवसर मिला, जिन्हें उन्होंने खुद देखा और अनुभव किया था।
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सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि किताब पढ़ने के बाद कुछ लोगों की राय उनके बारे में बदल सकती है। कुछ लोग उन्हें पहले से बेहतर नजरिये से देख सकते हैं, जबकि कुछ लोगों की राय और ख़राब हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति किताब लिखता है या सार्वजनिक जीवन में रहता है तो इस तरह की प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि उनकी किताब आने के बाद ‘तमाशा’ होना तय है। उनकी इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि संस्मरण में परिवार और राजनीति से जुड़े ऐसे प्रसंग भी हो सकते हैं, जिन पर पहले से बहस होती रही है।

राजीव के पीएम बनने के ख़िलाफ़ क्यों थीं सोनिया?

सोनिया गांधी का सबसे चर्चित खुलासा राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने से जुड़ा है। उन्होंने वीडियो में कहा कि जब उनके पति को प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया था, तब वह इसके पूरी तरह ख़िलाफ़ थीं। यह प्रसंग गांधी परिवार के उस दौर से जुड़ा है, जब राजीव गांधी ने राजनीति में प्रवेश किया और बाद में देश के प्रधानमंत्री बने। 
राजीव गांधी राजनीति में आने से पहले विमान चालक के रूप में काम करते थे। छोटे भाई संजय गांधी की 1980 में विमान दुर्घटना में मौत के बाद राजीव गांधी का राजनीति में प्रवेश हुआ। इसके बाद 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। सोनिया गांधी ने अपने ताजा बयान में यह नहीं बताया कि राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने का उन्होंने विरोध क्यों किया था। इसलिए उनकी इस टिप्पणी के पीछे की पूरी वजह जानने के लिए किताब के संबंधित हिस्से का सामने आना अहम होगा।
हालाँकि, उनका बयान यह ज़रूर बताता है कि राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने का फैसला उनके लिए केवल राजनीतिक घटना नहीं था, बल्कि परिवार के जीवन से जुड़ा एक बड़ा और संवेदनशील मोड़ भी था।

पहले भी आई थीं ऐसी ख़बरें

राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर सोनिया गांधी की आशंकाओं का जिक्र पहले भी कुछ लेखन में हुआ है। लेखक जेवियर मोरो के नाटकीय शैली में लिखे गए जीवनीपरक उपन्यास ‘द रेड साड़ी’ में सोनिया गांधी को राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के फ़ैसले से परेशान दिखाया गया है। किताब में उनके विरोध और राजीव गांधी को पद स्वीकार न करने के लिए मनाने की कोशिश का वर्णन है। इस उपन्यास में राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के फैसले को सोनिया गांधी की नजर से बेहद गंभीर और जोखिम भरा कदम बताया गया था। हालांकि, यह एक नाटकीय जीवनीपरक रचना है, इसे सोनिया गांधी के अपने संस्मरण का विकल्प नहीं माना जा सकता।
अब सोनिया गांधी खुद अपने संस्मरण में इस घटना का जिक्र कर रही हैं। ऐसे में उनकी किताब से यह जानने की उम्मीद की जा रही है कि उस समय उनके मन में क्या आशंकाएं थीं और उन्होंने राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के फैसले को किस तरह देखा था।

10 नवंबर को प्रकाशित होगी ‘बिलॉन्गिंग’

सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ़ लव’ 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है। यह संस्मरण उनके बचपन से लेकर भारतीय राजनीति में उनके लंबे सफर तक की कहानी कहता है। इसमें इटली में बिताए शुरुआती वर्षों, राजीव गांधी से मुलाकात, शादी, भारत आने और गांधी परिवार का हिस्सा बनने जैसे निजी प्रसंग शामिल हैं।
किताब का शीर्षक भी इसके विषय की ओर इशारा करता है। ‘बिलॉन्गिंग’ का अर्थ किसी जगह, परिवार या समाज से जुड़ाव और अपनापन महसूस करने से है। सोनिया गांधी ने अपनी किताब को प्यार, कर्तव्य, अपनों को खोने और अपनेपन की तलाश की कहानी बताया है। संस्मरण के जरिए वह यह बताने की कोशिश कर रही हैं कि एक विदेशी पृष्ठभूमि से आने वाली महिला के लिए भारत में परिवार, समाज और राजनीति के बीच अपनी जगह बनाना कैसा अनुभव रहा।

इटली के बचपन से भारत की राजनीति तक का सफर

सोनिया गांधी की किताब की शुरुआत इटली में उनके बचपन से होती है। वह युद्ध के बाद के दौर में इटली के वेनेटो क्षेत्र में पली-बढ़ीं। इसके बाद उनका जीवन एक नए मोड़ पर पहुंचा, जब 1965 में कैंब्रिज में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। दोनों के बीच संबंध आगे बढ़े और उन्होंने शादी की।
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शादी के बाद सोनिया गांधी का परिचय भारत और गांधी परिवार से हुआ। इसमें उनकी सास और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ उनके संबंध तथा भारत में नए माहौल के साथ तालमेल बैठाने के अनुभव भी शामिल हैं। संस्मरण में उनके निजी जीवन के साथ-साथ उन ऐतिहासिक घटनाओं का भी जिक्र है, जिन्होंने गांधी परिवार की जिंदगी बदल दी। इनमें 1980 में संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और 1991 में राजीव गांधी की हत्या जैसी त्रासदियां शामिल हैं।
संजय गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी राजनीति में आए। इसके कुछ ही वर्षों बाद इंदिरा गांधी की हत्या हुई और राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी की प्रधानमंत्री के रूप में राजनीतिक यात्रा के दौरान सोनिया गांधी सार्वजनिक जीवन से अपेक्षाकृत दूर रहीं। लेकिन 1991 में राजीव गांधी की हत्या ने उनके जीवन को एक बार फिर बदल दिया। सोनिया गांधी ने लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। बाद में वह कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुईं और पार्टी के नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली।

सोनिया ने पीएम बनने से किया था इनकार

सोनिया गांधी के संस्मरण का एक और बड़ा हिस्सा 2004 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद की राजनीति से जुड़ा है। 2004 के आम चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए को सत्ता से बाहर कर दिया था। चुनाव के बाद सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर देशभर में चर्चा होने लगी थी।

2004 में कांग्रेस की जीत के बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया। उनकी जगह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। यह फैसला सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन के सबसे चर्चित प्रसंगों में शामिल है।

उस समय उनके प्रधानमंत्री न बनने के पीछे की वजहों पर राजनीतिक बहस भी हुई थी। अब जब सोनिया गांधी अपने संस्मरण में राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के फैसले का विरोध करने की बात कह रही हैं, तो इससे गांधी परिवार और सत्ता के बीच उनके निजी अनुभवों को समझने का एक नया संदर्भ सामने आता है।

सोनिया का पहली बार इंस्टाग्राम, एक्स पर खाता

सोनिया गांधी ने 22 अक्टूबर को अपने संस्मरण का वीडियो साझा किया था। यह उनके सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिहाज से भी एक बड़ा क़दम था। उन्होंने पहली बार इंस्टाग्राम और एक्स पर अपने खाते शुरू किए। इससे पहले वह सार्वजनिक बयान, पत्र और संदेश जारी करने के लिए मुख्य रूप से कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल करती रही थीं।
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वीडियो में सोनिया गांधी अपनी किताब की प्रतियां प्राप्त करती दिखाई देती हैं। इस दौरान वह अपनी बेटी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ मिठाई भी बांटती हैं। सोनिया गांधी ने अपने सोशल मीडिया खातों से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस पार्टी के खातों को फॉलो किया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके खाते को फॉलो किया।

‘तमाशा’ वाली टिप्पणी क्यों है महत्वपूर्ण?

सोनिया गांधी का यह कहना कि उनकी किताब आने पर ‘तमाशा’ होगा, केवल एक हल्की टिप्पणी नहीं है। यह उस राजनीतिक माहौल की ओर भी इशारा करता है, जिसमें गांधी परिवार से जुड़ी घटनाओं और फैसलों पर लंबे समय से बहस होती रही है। सोनिया गांधी भारतीय राजनीति की सबसे चर्चित नेताओं में से एक रही हैं। उनके विदेशी मूल, कांग्रेस के नेतृत्व, 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने और गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा होती रही है।
अब तक उनके जीवन और राजनीतिक सफर पर कई लेख, किताबें और विश्लेषण सामने आ चुके हैं। लेकिन अपने संस्मरण में वह घटनाओं को अपनी नजर से दर्ज कर रही हैं। उनका कहना है कि लोग उनकी किताब पढ़कर उनके बारे में अपनी राय बदल सकते हैं। संस्मरण की अहमियत इसी बात में होगी कि वह किन घटनाओं का अपना विवरण देती हैं, उन फैसलों के पीछे की परिस्थितियों को कैसे समझाती हैं और अपने निजी अनुभवों को भारतीय राजनीति के इतिहास से किस तरह जोड़ती हैं।